क्या आप भी फुल ब्राइटनेस में मोबाइल यूज करते हैं ? आंखों का हो सकता है ये हाल

25 साल की एक लड़की के साथ, जो दिन-रात मोबाइल पर फुल ब्राइटनेस में लगी रहती थी. मोबाइल यूज करने से न सिर्फ लड़की की आंखें खराब हो गईं, बल्कि उसकी कार्निया में 500 से अधिक छेद हो गए।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : February 24, 2019 6:06 PM IST

आज-कल हर कोई मोबाइल में घंटों समय बिताता है, कभी काम के चलते तो कभी एंटरटेनमेंट के चलते लोग हर समय मोबाइल में ही लगे रहते हैं, ऐसे में कई बार यही मोबाइल हमारी परेशानी का सबब बन जाता है।

ऐसा ही कुछ हुआ 25 साल की एक लड़की के साथ, जो दिन-रात मोबाइल पर फुल ब्राइटनेस में लगी रहती थी. मोबाइल यूज करने से न सिर्फ लड़की की आंखें खराब हो गईं, बल्कि उसकी कार्निया में 500 से अधिक छेद हो गए।

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जी हां, मामला ताइवान का है, जहां एक लड़की के दिन-रात मोबाइल यूज करने से उसकी आंखों को इतना नुकसान हुआ कि कोर्निया में 500 से अधिक छेद हो गए. लड़की को इस बारे में तब पता चला, जब वह अपनी आंखों में जलन और कम दिखाई देने की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंची।

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लड़की प्रोफशन से सैक्रेटरी है, जिसे काम के चलते हर वक्त मोबाइल और कम्प्यूटर पर अपना समय बिताना पड़ता है. ऐसे में कोई भी जरूरी मेल मिस न हो, इसके लिए उसने मोबाइल की ब्राइटनेस बढ़ा कर रखना शुरू कर दिया. दिन-रात मोबाइल पर एक्टिव रहने की वजह से अचानक से लड़की को आंखों में परेशानी होने लगी और जब वह इसका इलाज कराने डॉक्टर के पास पहुंची तो डॉक्टर भी लड़की की आंखों को देखकर हैरान रह गए. डॉक्टर्स ने बताया कि फुल ब्राइटनेस में मोबाइल यूज करने से कोर्निया में 500 से ज्यादा छेद हो गए हैं।

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लड़की ने डॉक्टर को बताया कि कोई भी जरूरी मेल न छूटे, इसके लिए उसने मोबाइल की ब्राइटनेस ज्यादा रखना शुरू कर दिया. उसने करीब 2 सालों तक फुल ब्राइटनेस में काम किया, जिसके चलते उसे कुछ समय से आंखों में दिक्कत होने लगी थी. धीरे-धीरे आंखों में दर्द और ब्लडशॉट होने लगा, जिसके बाद उसकी परेशानी बढ़ती ही गई. उसने कई बार आई ड्रॉप की मदद ली, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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बता दें, आंख की सबसे सामने वाली ट्रांसपेरेंट परत को कार्निया कहते हैं. आखों पर गुंबद के आकार की ये परत आंखों को दृष्टि केंद्रित करने में मदद करती है और आंखों को सुरक्षित रखती है।

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