मुजफ्फरपुर (बिहार) में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम से 7 बच्चों की मौत, जानें क्या है एईएस और जापानी एन्सेफलाइटिस

मौसम की तल्खी और हवा में नमी के कारण संदिग्ध एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस ) और जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) नामक बीमारी से पिछले चार दिनों में मुजफ्फरपुर (बिहार) में सात बच्चों की मौत हो गई।

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Written By: Anshumala | Published : June 7, 2019 5:32 PM IST

इस मौसम में प्राय: हर वर्ष मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में बच्चों पर कहर बनकर टूटने वाली बीमारी इस साल भी अपना रूप दिखाने लगी है। मौसम की तल्खी और हवा में नमी के कारण संदिग्ध एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस ) और जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) नामक बीमारी से पिछले चार दिनों में सात बच्चों की मौत हो गई।

मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में संदिग्ध एइएस और जेई की वजह से चार बच्चों की मौत हो गई है, वहीं एक दर्जन नए मरीज भर्ती हुए हैं। गुरुवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में संदिग्ध एईएस से पीड़ित आठ बच्चों को आईसीयू में भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान ही उनमें से तीन की मौत हो गई। इसमें सरैया चकना गांव के ही तीन बच्चे शामिल थे।

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन एस पी सिंह ने शुक्रवार को बताया कि पिछले चार दिनों के अंदर मुजफ्फरपुर में सात बच्चों की मौत हो गई है। उन्होंने बताया कि अब तक दो बच्चों की मौत एईएस से होने की पुष्टि हुई है। सिंह ने कहा कि अन्य बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जी एस सहनी ने बताया कि अब तक बीमार बच्चों का उपचार बीमारी के लक्ष्ण को देखते हुए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एईएस से ग्रसित बच्चों को पहले तेज बुखार और शरीर में ऐंठन होता है और फिर ये बेहोश हो जाते हैं। इधर, एसकेएमसीएच में चिकित्सकों एवं कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने कहा कि उमस भरी गर्मी के कारण ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।

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क्या है एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम 

एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) सहित जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) समान रूप से न्यूरोलॉजिक मेनिफेस्टेशन का एक समूह है जो कई अलग-अलग वायरस, बैक्टीरिया, फंगस, परजीवी, स्पाइरोकेट्स, रासायनिक/विषाक्त पदार्थों आदि के कारण होता है।

जेई का प्रकोप आमतौर पर मानसून और मानसून के बाद के समय में होता है, जब मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जबकि अन्य वायरस के कारण एन्सेफलाइटिस विशेष रूप से एंटरो-वायरस साल भर में होता है, क्योंकि यह जल जनित बीमारी है। यह मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र की आबादी को प्रभावित करता है।

एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम से रोकथाम

मच्छरों से बचाव व टीकाकरण ही इस बीमारी से बचने का उपाय है। इसका टीका काफी प्रभावी है और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।

एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम के लक्षण

इन्सेफ्लाइटिस रोग विषाणु के प्रकोप से होता है। यह विषाणु इतने सूक्ष्म होत हैं कि साधारण सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) से भी नहीं देखे जा सकते हैं। इस रोग का वाहक मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और लगभग 4 दिन से चौदह दिन के अन्दर उस व्यक्ति में इस रोग के लक्षण दिखने लगते हैं। दिमाग में ज्वर, सिरदर्द, ऐंठन, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। रोगी का शरीर निर्बल हो जाता है। प्रकाश से डरता है। कुछ रोगियों (बहुत कम) के गर्दन में अकड़न आ जाती है। ये सभी लक्षण मस्तिष्क की सुरक्षा प्रणाली के ऐक्टिव होने के कारण प्रकट होते हैं, क्योंकि सुरक्षा प्रणाली संक्रमण से मुक्ति पाने के लिए क्रियाशील हो जाती है।

क्या है जापानी एन्सेफलाइटिस ?

इसे जापानी बुखार भी कहते हैं। यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है, जो वाइरल संक्रमण से होता है। खास किस्म के वायरस से होता है, जो मच्छर या सूअर के द्वारा फैलते हैं। दिमाग में यह वायरस जाकर सोचने, समझने, देखने और सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है। ज्यादातर 1 से 14 साल के बच्चे एवं 65 वर्ष से ऊपर के लोग इसकी चपेट में आते हैं।

इसके लक्षण

इसके शुरुआती लक्षण कई प्रकार के होते हैं। हालांकि, इससे ग्रसित 50 से 60 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है।

बुखार, सिरदर्द, गरदन में अकड़न, कमजोरी और उल्टी होना इसके शुरुआती लक्षण हैं।

समय के साथ सिरदर्द बढ़ने लगता है। हमेशा सुस्ती छाई रहती है।

भूख कम लगना, तेज बुखार, अतिसंवेदनशील होना वहीं, कुछ समय के बाद भ्रम का शिकार होना फिर पागलपन के दौरे आना, लकवा मारना और स्थिति कोमा तक पहुंच सकती है।

बहुच छोटे बच्चों में ज्यादा देर तक रोना, भूख की कमी, बुखार और उल्टी होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।

बचाव के उपाय

समय से टीकाकरण कराएं। साफ-सफाई का ध्यान रखें।

गंदे पानी के संपर्क में आने से बचें ।

मच्छरों से बचने के उपाय आजमाएं। घरों के आस-पास पानी न जमा होने दें।

बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खान-पान दें। बाहर का अधिक खाने से मना करें।

इनुपट: आईएएनएस हिंदी

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