फैल रहा है इबोला वायरस का प्रकोप, जानें इसे बचने के उपाय

अधिकतर मामलों में इबोला पीड़ितों की मृत्यु हो जाती है। बीमारी बढ़ने के साथ ये समस्याएं उभर सकती हैं- शरीर के अंगों का काम करना बंद हो जाना, अत्यधिक रक्तस्राव, पीलिया, दौरा पड़ना, कोमा और सदमा आदि। इसके लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

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Written By: Anshumala | Updated : June 13, 2019 3:06 PM IST

अफ्रीका में पहली बार इबोला से पीड़ित मरीज का पता चला था। वर्ष 1976 में सूडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पहली बार इस रोग के लक्षण देखने को मिले थे। कहा जाता है कि इबोला नदी के पास के गांव में इस रोग के लक्षण नजर आने के कारण इसका नाम इबोला पड़ा। आज यह वायरस पूरी दुनिया में अपना पांव पसार रहा है।

हाल ही में, युगांडा में इसका पहला मामला सामने आया है। डब्लूएचओ ने यहां एक पांच वर्ष के बच्‍चे में इबोला वायरस से पीड़ित होने की पुष्टि की है। इतना ही नहीं, कांगो क्षेत्र में पिछले दस से ग्यारह महीने के अंदर इस वायरस से संक्रमित लगभग दो हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। इबोला रक्तस्रावी ज्वर है, जानें इस वायरस से बचने के उपाय:

इबोला वायरस से कैसे बचें

इबोला वायरस के संपर्क से बचाव इसकी रोकथाम का सबसे अच्छा तरीका है। निम्न एहतियात बरतने से इसका संक्रमण और इसे फैलने से रोक सकते हैं।

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वहां ना जाएं जहां इसका प्रकोप है

अफ्रीका जाने से पहले, वहां फैली ताजा महामारियों के बारे में अच्छी तरह से जान लें। नियमित रूप से हाथ धोते रहें। अन्य संक्रामक बीमारियों की तरह ही इबोला से बचने का भी एक महत्वपूर्ण तरीका है, नियमित रूप से अपने हाथ धोते रहना। हाथ धोने के लिए साबुन और पानी का इस्तेमाल करें या साबुन व पानी उपलब्ध न होने पर अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर-रब का उपयोग करें, जिनमें कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल का मिश्रण हो।

जंगली जानवरों का मीट न खाएं

अफ्रीका जाने के बाद अफ्रीकी देशों में स्थानीय बाजारों में मिलने वाले चिम्पांजी, गोरिल्ला जैसे प्राइमेट समेत जंगली जानवरों का मीट खरीदने या खाने से बचें।

संक्रमित लोगों से दूर रहें

मरीज की देखभाल करने वालों को विशेष रूप से उनके खून, लार समेत अन्य किस्म के स्रावों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। इबोला बीमारी अंतिम चरण में सबसे अधिक संक्रामक हो जाती है।

संक्रमण-नियंत्रण के प्रक्रिया का पालन करें

यदि आप स्वास्थ्य कर्मी हैं तो दस्ताने, मास्क, गाउन और आई शील्ड (आंखों के बचाव का उपकरण) आदि जरूर पहनें। संक्रमित रोगियों को दूसरों से दूर रखें। सुइयों को नष्ट कर दें और अन्य उपकरणों को भी कीटाणु-मुक्त करें।

संक्रमित व्यक्ति का शव ना छूएं

इबोला पीड़ितों के शव भी संक्रमित होते हैं। इनका अंतिम संस्कार विशेष तौर पर संगठित और प्रशिक्षित टीम द्वारा उचित सुरक्षा उपकरणों के जरिए किया जाना चाहिए।

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टीका तैयार करना

वैज्ञानिक इबोला वायरस से बचाव के लिए टीका बनाने का प्रयास अभी किया जा रहा है।

इबोला से जुड़ी कुछ जटिलताएं

अधिकतर मामलों में इबोला पीड़ितों की मृत्यु हो जाती है। बीमारी बढ़ने के साथ ये समस्याएं उभर सकती हैं-

शरीर के अंगों का काम करना बंद कर देना

अत्यधिक रक्तस्राव

पीलिया

दौरा पड़ना

कोमा और सदमा

जीवित रोगी को हो सकती हैं ये समस्याएं

ये वायरस जानलेवा होता है, क्योंकि यह शरीर की इम्यूनिटी क्षमता को प्रभावित कर देता है। जो लोग इबोला से बच जाते हैं, उनके स्वास्थ्य में सुधार धीरे-धीरे होता है। उन्हें वजन और ताकत बढ़ाने में महीनों लग जाते हैं। रोगी के शरीर में वायरस हफ्तों सक्रिय रहता है। ऐसे में उन्हें ये शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं-

बाल झड़ना

सुनाई और दिखाई कम देना

भोजन का स्वाद बदल जाना

बोलने में परेशानी महसूस करना

लीवर में सूजन

कमजोरी, थकान, सिरदर्द

आंखों और अंडाशय में सूजन।

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