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Zoonotic Disease: चंद दिनों में जान ले सकती हैं जानवरों से होने वाली ये बीमारियां, जानें क्या हैं जूनोटिक डिजीज

Prevention of zoonotic disease: जानवरों से इंसानों को होने वाली बीमारियों को जूनोटिक रोग कहा जाता है। इनमें से कुछ बीमारियां अत्यधिक गंभीर हो सकती है और ऐसे में उनका समय पर इलाज करना बेहद जरूरी होता है।

Zoonotic Disease: चंद दिनों में जान ले सकती हैं जानवरों से होने वाली ये बीमारियां, जानें क्या हैं जूनोटिक डिजीज

Written by Mukesh Sharma |Published : July 19, 2022 10:31 AM IST

जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों को जूनोटिक बीमारियां कहा जाता है। जब कोई वायरस, बैक्टीरिया पैरासाइट, प्रोटोजोआ और फंगी किसी जानवर से किसी व्यक्ति के शरीर तक फैल जाए और उन्हें बीमार कर दे तो इसे जूनोटिक बीमारियां कहा जाता है। एनसीबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार मनुष्यों में रोग फैलाने वाले 60 प्रतिशत से भी ज्यादा रोगाणु जूनोटिक ही होते हैं, जिसका मतलब है वे किसी जानवर के शरीर से ही आते हैं। कुछ जूनोटिक बीमारियां इतनी गंभीर हो सकती हैं, कि उससे गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियों में मरीज की मृत्यु भी हो सकती हैं। हालांकि, जैसा कि आपको पता है कि जूनोटिक बीमारियां जानवरों से ही मनुष्य के शरीर तक आती हैं और ऐसे में जानवरों से उचित दूरी बनाकर और घर से पालतू जानवरों की समय-समय पर जांच कराकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही जूनोटिक बीमारियों जुड़ी पूर्ण जानकारी हमें इन बीमारियों से बचा सकती है। चलिए जानते हैं जूनोटिक बीमारियों के बारे में

इन जानवरों से फैलती है जूनोटिक बीमारियां

बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रकार के जानवर हैं, जिनसे जूनोटिक बीमारियां हो सकती हैं। आमतौर पर घरों में रखे जाने वाले जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली, सूअर, गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और मुर्गी आदि के कारण ये बीमारियां फैल सकती हैं। हालांकि, यह बीमारी सिर्फ उसी जानवर से ही फैलती है, जब वह पहले से ही किसी ऐसी बीमारी से संक्रमित हो। वैसे आमतौर पर घरों में रखे जाने वाले जानवर (विशेष रूप से कुत्ते व बिल्ली) स्वस्थ होते हैं और उनकी समय-समय पर जांच कराई जाती है।

जंगली जानवरों से ज्यादा खतरा

जंगली जानवरों से ये बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है, कोविड 19 और मंकीपॉक्स जैसी बीमारियां भी जूनोटिक हैं। जो लोग ज्यादातर जंगली जानवरों के संपर्क में आते हैं उन्हें ये बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है और इसी लिए जंगली इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों में ये बीमारियां देखी जाती हैं।

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कुछ बीमारियां हो सकती हैं जानलेवा

जानवरों से मनुष्यों को होने वाली कुछ बीमारियां व संक्रमण अत्यधिक खतरनाक होते हैं और अगर उनकी समय पर देखभाल न की जाए तो कुछ ही दिनों में इनसे व्यक्ति की जान जा सकती है। उदाहरण के तौर पर इबोला भी जानवरों से मनुष्यों तक जाने वाला एक वायरस है और इससे होना वाला संक्रमण व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकता है।

जूनोटिक बीमारियों से बचाव कैसे करें

जितना हो सके जानवरो से करीबी संपर्क में न आना ही आपको ज्यादातर जूनोटिक बीमारियों से दूर रख सकता है। साथ ही बाहर से आने वाले मीट, अंडे और दूध जैसी उत्पादों पर भी खास नजर रखनी होगी। हमेशा किसी विश्वसनीय जगह से ही ऐसे प्रोडक्ट लाएं और घर पर भी उन्हें अच्छे से पकार कर ही सेवन करें। इसके अलावा आप जूनोटिक बीमारियों से निम्न तरीके से बच सकते हैं -

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  • बार-बार अपने हाथों को धोनें की आदत डालें
  • अगर आप किसी बाहर के जानवर के करीब से आए हैं, तो नहा लें और दूसरे कपड़े ही पहनें
  • मच्छर, मक्खियों व अन्य कीटों को घर में न होनें दें, जिसके लिए आप इन्सेक्ट रिपेल्लेंट का उपयोग कर सकते हैं
  • घर में चूहों को न होनें दें और उनके लिए समय-समय पर विशेष उपाय करें
  • घर के जानवरों की समय-समय पर जांच कराएं और उन्हें नियमित रूप से नहलाते रहें

जूनोटिक बीमारियों का इलाज

जूनोटिक बीमारियों का इलाज आमतौर पर रोगाणु के प्रकार, मरीज को महसूस हो रहे लक्षण और व्यक्ति की उम्र व स्वास्थ्य क्षमता के आधार पर किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर व्यक्ति को कोई बैक्टीरियल इंफेक्शन है तो एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं और उसके साथ मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के आधार पर अन्य दवाएं दी जा सकती हैं जैसे पेनकिलर व एंटीपायरेटिक दवाएं। वहीं किसी वायरस के कारण अगर व्यक्त बीमार हुआ है, तो उसके लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जाता है, लेकिन कुछ वायरस ऐसे हैं जिनका अभी तक सटीक इलाज नहीं मिल पाया है। ऐसी स्थितियों में मरीज को महसूस होरहे लक्षणों के आधार पर उन्हें दवाएं दी जाती हैं।