क्या आपको पता है कि पीरियड्स की वजह से menstrual gingivitis हो सकता है?

जानें मसूड़ों की बीमारी मेंस्ट्रुअल जिन्जवाइटिस के बारे में।

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Written By: Editorial Team | Updated : October 6, 2017 5:10 PM IST

मेन्स्ट्रुएशन अपने साथ ढेर सारी समस्याएं लेकर आते हैं। पीरियड्स के दौरान आपको दर्द, मतली, हेवी फ्लो जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं। लेकिन पीरियड्स के साथ हम शायद ही इससे बड़ी किसी और समस्या को जोड़कर देखते हैं। धीरे-धीरे हम इन छोटी-मोटी समस्याओं के साथ समझौता कर लेते हैं और यह तकलीफ बर्दाश्त कर जाते हैं। लेकिन लड़कियों, सुनो, पीरियड्स की वजह से केवल क्रैम्पस और फ्लो जैसी समस्याएं ही नहीं होती। पीरियड्स के दौरान होने वाली हार्मोनल उथल-पुथल आपके दांतों से जुड़ी कुछ  समस्याओं का भी मरीज़ बना सकता है, जिन्जवाइटिस (gingivitis) या मेंस्ट्रुअल जिन्जवाइटिस (menstrual gingivitis) मसूड़ों की एक ऐसी ही बीमारी है जहां मसूड़ों में सूजन हो जाती है। डॉ. करिश्मा जरादी (डेंट्ज् डेंटल केयर सेंटर) के अनुसार, हार्मोनल परिवर्तन और ओरल हेल्थ एक ही सिक्के के 2 पहलू हैं। डॉ. करिश्मा जरादी ने हमें बताया जिन्जवाइटिस के बारे में और साथ ही उसे कैसे रोकना है।

मेंस्ट्रुअल जिन्जवाइटिस क्या है?

मेंस्ट्रुअल जिन्जवाइटिस मुंह की एक आम समस्या है, जिनसे महिलाएं गुज़रती तो हैं लेकिन शायद ही उन्हें इसके बारे में पता है। हार्मोन्स के स्तर में उतार-चढ़ाव की वजह से पीरियड्स के दौरान या पीरियड्स शुरु होने से पहले महसूस होते है। जिन्जाइवल टिश्यू (Gingival tissues) या मसूड़ों के ऊतकों में बहुत  से एस्ट्रोजेनिक रिसेप्टर्स (estrogenic receptors) होते हैं। यह हार्मोनल परिवर्तनों को तेज प्रतिक्रिया देता है। आपके पीरियड्स की शुरूआत के समय एस्ट्रोजन का स्तर काफी कम होता है, लेकिन फिर यह बढ़ना शुरू हो जाता है और इसका स्तर बढ़ते रहता है। ऐसा होता है, हार्मोन मसूड़ों में एस्ट्रोजेन रिसेप्टर्स को प्रभावित कर और उन्हें नष्ट कर सकते हैं।

हालांकि, हर किसी को मुंह की इस समस्या से परेशान नहीं होना पड़ता, लेकिन ख़राब ओरल हेल्ध वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए। मुंह में पहले से ही मौजूद बैक्टीरिया हार्मोनल की भरमार के कारण तेजी से बढ़ते हैं और मसूड़ों या गम्स से जुड़े रोगों के लिए माहौल बनाते हैं। अगर इसपर ध्यान नहीं दिया जाता है तो यह पीरियरोडिटिस (periodontitis) की वजह बन सकता है।

मेंस्ट्रुअल जिन्जवाइटिस क्यों होता है?

पीरियड्स के दौरान, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है जो मसूड़ों में रक्त के प्रवाह को बढ़ा देता है। इस प्रक्रिया में, गम के टिश्यूज़  लाल, नरम, फूले हुए और नाजुक बन जाते हैं, जो सांसों की बदबू, मसूढ़ों से खून निकलने, सख्त खाद्य पदार्थों को चबाने में तकलीफ, ब्रश करते समय खून और जिन्जाइवल पेन या मसूड़ों में दर्द जैसी तकलीफें हो सकती हैं। यदि आप अपने मसूड़ों की सही तरीके से देखभाल नहीं करती हैं तो वे कमजोर हो जाते हैं और इससे मसूड़ों की बीमारियां हो सकती हैं। कमजोर मसूड़ों के कारण दांतों और मसूड़ों के बीच अंतर दिखायी पड़ने लगते हैं। इन गड्ढ़ों में प्लैक और खाने के टुकड़े जमा हो जाती हैं और परेशानी गम्भीर होने लगती है। मेंस्ट्रुअल साइकल की शुरुआत से 1-2 दिन पहले यह समस्या महसूस हो सकती है और पीरियड्स शुरु होने के साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है।

अगर आप पीरियड्स के दौरान अपने मसूड़ों का खास ख्याल नहीं रखते , तो यह मसूड़े की सूजन का कारण बन सकता है जो बाद में पीरियरोडिटिस (periodontitis) में तब्दील हो सकता है। इससे आपको कम उम्र में ही अपने दांत खोने पड़ सकते हैं।

जिन्जवाइटिस को रोका कैसे जा सकता है?

दांतों से जुड़ी इन समस्याओं से बचने के लिए आपको अपने मुंह की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना होगा। हम यहां बता रहे कुछ टिप्स जो इस समस्या से निपटने में आपके काम आएंगी:

  • रोजाना ब्रश करना: नरम नायलॉन-ब्रिसल वाले टूथब्रश से अपने दांतों को नियमित रूप से दिन में कम से कम 2 बार साफ करना सबसे अच्छा तरीका है। गोल-गोल करते हुए और गम लाइन पर ध्यान देते हुए सफाई करें।
  • जीभ की सफाई: यह एक अनिवार्य काम है जो मुंह में इकट्ठा बैक्टेरिया को साफ करने में मदद करता है।
  • अपने दांतों को फ्लॉस करें: ब्रश करने के बाद आप हर बार फ्लॉस करें। यह आपके दांतों के बीच बैठी गंदगी को कम करने में मदद करता है।
  • माउथ-वॉश का प्रयोग करें: माउथ-वॉश से मुंह धोने से, मसूड़ों की सूजन को ठीक करने में मदद होती है। एंटी-बैक्टीरियल माउथ-वॉश में क्लोराहेक्साइडिन (chlorhexidine) होता है जो दांतों के बैक्टीरिया और कैविटीज़ से राहत दिलाता है।

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत-Shutterstock Images.

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