
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : April 17, 2026 2:06 PM IST
Medically Verified By: Dr Abhijit Borse
जब हम हार्ट हेल्थ की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान अक्सर इसकी धमनियों, धड़कन की रफ्तार और दिल की मांसपेशियों की ताकत पर होता है। लेकिन साइंस अब एक गहरा सच सामने ला रहा है। साइंस के हिसाब से हमारा लिवर हमारे हार्ट के काम करने के तरीके को नियंत्रित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। कई मायनों में तो लिवर, हार्ट के लिए एक रिमोट कंट्रोल की तरह काम करता है, जो मेटाबॉलिज्म, सूजन और हार्मोनल संतुलन के जरिए हमारे कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को करता है।
लिवर और हार्ट के कनेक्शन का सेंट्रल प्वांट मेटाबॉलिज्म है। लिवर शरीर का 'मेटाबॉलिक हब' है। यह पोषक तत्वों को प्रोसेस करता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और फैट का क्या करना, इसका पूरा हिसाब किताब लिवर ही मैनेज करता है। जब भी हम कुछ खाते हैं, लिवर तय करता है कि उस ऊर्जा को कैसे स्टोर करना है और कैसे बांटना है। जब यह सिस्टम सही काम करता है, तो दिल को फायदा होता है। लेकिन खराब डाइट या सुस्त जीवनशैली की वजह से जब लिवर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है, तो यह एक ऐसी चेन रिएक्शन शुरू कर देता है जो सीधे हार्ट को नुकसान पहुंचाती है।
अगर लिवर में दिक्कत है तो हार्ट को भी नुकसान होगा?बिलकुल! जब मोटापे या टॉक्सिन्स की वजह से लिवर पर दबाव बढ़ जाता है तो वह खून में हानिकारक पदार्थ छोड़ता है। जिससे शरीर में पहले से हो रही सूजन बढ़ जाती है और ये आगे चलकर स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है। इतना ही नहीं, लिवर ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से जब लिवर शुगर का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ शुगर नसों को नुकसान पहुंचाता है और डायबिटीज का कारण बनता है। अक्सर डायबिटीज आगे चलकर हार्ट की बीमारी का सबसे बड़ा खतरा बनती है।
लिवर ही खून में कोलेस्ट्रॉल बनाता है और उसे साफ भी करता है। अगर लिवर जरूरत से ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बनाने लगे या उसे साफ न कर पाए, तो यह नसों में जमने लगता है। समय के साथ यह धमनियों को सिकोड़ देता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देता है। इस तरह लिवर ही तय करता है कि दिल तक पहुंचने वाले खून की क्वालिटी कैसी होगी। ठीक इसी तरह, फैटी लिवर (NAFLD) का भी दिल की बीमारियों से गहरा संबंध है। जिन लोगों को फैटी लिवर होता है, उनमें अक्सर सूजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खराब लिपिड प्रोफाइल की समस्या होती है। ये चीजें हार्ट की बीमारियों के चांस बढ़ा देती है।
लिवर उन प्रोटीन को भी बनाता है जो खून जमने के लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर लिवर में दिक्कत है तो बैलेंस बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में या तो ऐसे खतरनाक क्लॉट बन सकते हैं जो दिल की नसों को ब्लॉक कर दें या ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है।
सबसे पहले तो रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मीठे ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड से जितना हो दूर रहना चाहिए। ये चीजें रेगुलर खाने से लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कुल मिलाकर बात ये है कि अगर लिवर हेल्दी है तो हार्ट अपने आप सही काम करता है। इसके अलावा नियमित एक्सरसाइज, वॉकिंग, वजन पर कंट्रोल, कम चीनी और साबुत अनाज वाली डाइट लेनी चाहिए। इससे लिवर के फंक्शन भी सही रहते हैं और हार्ट भी हेल्दी रहता है।