दिल ही तो है, न संग ओ खिश्‍त...

जीना चाहते हैं खुशहाल जिंदगी, तो अपने दिल का रखें बच्‍चों की तरह ख्‍याल।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 28, 2018 12:04 PM IST

गालिब का ये शेर तो आपने सुना ही होगा, पर माना नहीं न। दिल असल में ‘दिल’ है, शरीर को संभालने, चलाने वाला एक अनिवार्य अंग, लेकिन हम उसके साथ ऐसा व्‍यवहार करते हैं कि जैसे सीने में रखा हुआ कोई ईंट-पत्‍थर का टुकड़ा। दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है कि उसे दिल ही समझा जाए। ईंट-पत्‍थर नहीं।

हद है लापरवाही की

दिल के साथ बरती जाने वाली लापरवाही का नतीता है कि विश्व भर में हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार, भारत में 10.2 करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। अव्यवस्थित जीवन शैली और असंतुलित खानपान के चलते दुनिया भर में हृदय रोग के पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। भागती-दौड़ती जिंदगी में लोगों को अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिलता, जिसका उन्हें भारी खामियाजा चुकाना पड़ता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार दिल की बीमारी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है, इसके लिए कोई निर्धारित उम्र नहीं होती।

औरतें तो और भी लापरवाह हैं

महिलाओं में हृदय रोग की संभावनाएं ज्यादा होती हैं, बावजूद इसके वे इस बीमारी के जोखिमों को नजरअंदाज कर देती हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक दिल ही है, जिस पर सबसे अधिक बोझ पड़ता है। तनाव, थकान, प्रदूषण आदि कई वजहों से रक्त का आदान-प्रदान करने वाले इस अति महत्वपूर्ण अंग को अपना काम करने में मुश्किल होती है, इसीलिए 'विश्व हृदय दिवस' लोगों में यह भावना जागृत करता है कि वे हृदय की बीमारियों के प्रति सचेत रहें।

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मेरा दिल, तुम्‍हारा दिल

हृदय संबंधी बीमारियों में लगातार हो रहे इजाफे ने पूरे विश्‍व की चिंता बढ़ा दी है। इसलिए इस पर समग्र जागरुकता की जरूरत महसूस हो रही है। इसी उद्देश्‍य से वर्ष 2000 से हर साल 29 सितंबर को वर्ल्‍ड हार्ट डे मनाने का संकल्‍प लिया गया। इस वर्ष इस विशेष दिवस की थीम है ‘मेरा दिल, तुम्‍हारा दिल’ ताकि हम अपने दिल और अपने अपनों के दिल का भी ख्‍याल रखें। इसी साल वर्ल्‍ड हार्ट डे का नया लोगो भी जारी किया गया।

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