
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : May 1, 2025 2:55 PM IST
Medically Verified By: Dr Nitin K Sethi
Young Onset Parkinson's Disease In Hindi: आज के समय में एक हैरान करने वाली बात यह देखने को मिल रही है कि पार्किंसन डिजीज जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। पारंपरिक रूप से यह बीमारी 55 से 70 वर्ष की आयु के बाद देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके बढ़ते मामलों को लेकर चिंता करना जरूरी हो गया है, क्योंकि यह रोग जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। आज इस लेख में हम आपको युवाओं में पार्किंसंस डिजीज के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने दिल्ली स्थित पीएसआरआई हॉस्पिटल के अध्यक्ष (न्यूरोसाइंस) डॉ नितिन सेठी से बातचीत की।
पार्किंसन डिजीज एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, यानी यह मस्तिष्क की कोशिकाओं के धीरे-धीरे नष्ट होने से जुड़ी होती है। इस बीमारी में मुख्य रूप से मस्तिष्क के बेसल गैंग्लिया नामक हिस्से में मौजूद एक केमिकल डोपामाइन की कमी हो जाती है। डोपामाइन हमारे शरीर में मूवमेंट और मोटर कंट्रोल को रेगुलेट करने में मदद करता है। जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो व्यक्ति के शरीर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं।
पार्किंसन डिजीज के कुछ मुख्य लक्षण होते हैं, जिनकी पहचान समय रहते हो जाए तो इलाज की दिशा में बेहतर कदम उठाए जा सकते हैं।
यह सवाल आज के समय में बहुत प्रासंगिक हो गया है। कई रिसर्च यह इशारा करती हैं कि युवा वर्ग में इस बीमारी का एक बड़ा कारण वातावरणीय और जीवनशैली से जुड़ा जोखिम है। इनमें प्रमुख हैं:
केमिकल और पेस्टिसाइड एक्सपोजर: आजकल खाने-पीने की चीजों में उपयोग हो रहे रासायनिक पेस्टीसाइड और कीटनाशकों से युवाओं का अधिक संपर्क हो रहा है। ये तत्त्व मस्तिष्क पर असर डाल सकते हैं और डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ड्रग अब्यूज: कुछ विशेष ड्रग्स जैसे MDMA या Ecstasy जैसी पार्टी ड्रग्स, जो रेव पार्टियों में ली जाती हैं, उनके साथ पार्किंसन डिजीज को जोड़ा गया है। ये ड्रग्स मस्तिष्क की डोपामाइन प्रणाली पर बुरा असर डाल सकती हैं।
तनाव और खराब जीवनशैली: आज की तेज भागती जिंदगी में युवाओं में तनाव, नींद की कमी, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता भी न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
पार्किंसन डिजीज से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन इसके खतरे को कम किया जा सकता है। यहां कुछ सरल लेकिन असरदार उपाय दिए गए हैं:
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: संतुलित और पौष्टिक आहार लें, जिसमें हरी सब्जियां, फल, नट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स शामिल हों।
नियमित व्यायाम करें: रोजाना थोड़ी देर की फिजिकल एक्टिविटी, जैसे तेज चलना, योग या साइकलिंग, मस्तिष्क की सेहत को बनाए रखने में मदद करती है।
ड्रग्स से दूर रहें: किसी भी प्रकार की इलिसिट ड्रग्स या नशीली दवाओं के सेवन से पूरी तरह बचें, क्योंकि ये मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
ऑर्गेनिक और स्वच्छ भोजन करें: पेस्टिसाइड से बचने के लिए जैविक (ऑर्गेनिक) या अच्छी तरह से धुला हुआ खाना ही खाएं।
मानसिक तनाव को कम करें: ध्यान, मेडिटेशन, या काउंसलिंग जैसी तकनीकों का सहारा लें जिससे तनाव कम हो और मस्तिष्क स्वस्थ बना रहे।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।