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Written By: Yogita Yadav | Published : January 23, 2019 2:19 PM IST
ज्यादातर लोग पेट की गैस से परेशान रहते हैं, जबकि वे यह नहीं जानते कि गैस पास करना भी शरीर के ठीक से काम करने का संकेत है, अगर आप भी गैस की समस्या से परेशान हैं तो इसके कारण और बचाव के बारे में जान लेना भी जरूरी है। ©Shutterstock.
भोजन का ठीक तरह से न पचना गैस बनने का प्रमुख कारण है। कई लोगों के पाचन मार्ग में गैस जमा हो जाती है। कुछ लोगों के साथ दिन में कई बार ऐसा होता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में एंजाइम का स्तर कम हो जाता है, इस कारण भी गैस की समस्या बढ़ जाती है।
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सबको बनती है गैस
गैस प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में बनती है। यह शरीर से बाहर या तो डकार द्वारा या गुदा मार्ग के द्वारा निकलती है। अधिकतर लोगों के शरीर में 1 से 4 पॉइन्ट गैस उत्पन्न होती है और एक दिन में एक सामान्य व्यक्ति कम से कम 14 से 23 बार गैस पास करता है। जिनकी पाचन शक्ति अकसर खराब रहती है और जो प्राय: कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमें गैस की समस्या अधिक होती है।
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कारण हैं अनेक
यह भी हैं गैस बनने के लक्षण
पेट में गैस बनने के सबसे आम लक्षण हैं- पेट फूलना, पेट में दर्द होना, डकार आना और गैस पास करना। कारणों को समझकर इसका उपचार किया जा सकता है।
डकार लेना
जो लोग खाने के दौरान या बाद में डकार लेते हैं, वे खाने के दौरान ज्यादा मात्रा में हवा निगल रहे होते हैं। ज्यादा डकार का कारण पाचन तंत्र के ऊपरी भाग में पेप्टिक अल्सर जैसी समस्याएं होना भी हो सकता है।
फ्लैटुलेंस
इसे सामान्य भाषा में गैस पास करना कहते हैं। अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि एक दिन में 14 से 23 बार गैस पास करना सामान्य बात है। अधिक गैस बनना कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण नहीं होने का संकेत है।
पेट फूलना
पेट गैस की वजह से या बड़ी आंत के कैंसर या हर्निया के कारण भी फूल सकता है। ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है। इससे भी पेट फूल जाता है और बेचैनी होती है। किसी अंग का आकार बढ़ने से भी पेट फूल सकता है।
पेट दर्द
जब आंत में गैस मौजूद होती है, तब कुछ लोगों को पेट दर्द होता है। जब बड़ी आंत की दायीं ओर दर्द होता है, तो इससे हृदय रोग का भ्रम होता है, लेकिन जब दर्द दायीं ओर होता है, तो यह अपेन्डिक्स हो सकता है।
गैस बनती हैं तो इनका सेवन करें सीमित
गैस से बचने के उपाय
कार्बोनेटेड ड्रिंक और वाइन न पिएं, क्योंकि ये कार्बन डाई ऑक्साइड रिलीज करते हैं।
पाइप के द्वारा कोई चीज न पिएं, सीधे गिलास से पिएं।
अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन न करें।
तनाव भी गैस बनने का एक प्रमुख कारण है, इसलिए तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।
कब्ज भी इसका एक कारण हो सकता है।
खाने को चबाकर खाएं। दिन में तीन बार मेगा मील खाने की बचाय कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर मिनी मील खाएं।
खाने के तुरंत बाद न सोएं। थोड़ी देर टहलें। इससे पाचन भी ठीक होगा और पेट भी नहीं फूलेगा।
अपनी बायोलॉजिकल घड़ी को दुरुस्त रखने के लिए एक निश्चित समय पर खाना खाएं।
जिन लोगों में लैक्टोस से यह समस्या होती है, वह दूध और दूध से बने उत्पाद न लें या कम लें।
मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें।
अधिक रेशेयुक्त भोजन के साथ अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें।
खाना पकाते समय सरसों, इलाइची, जीरा और हल्दी का उपयोग करें। इससे गैस कम मात्रा में बनती है।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।