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वजन बढ़ना और बाल झड़ना थाइरॉइड के संकेत (Thyroid Symptom) हो सकते हैं। इसके अलावा चिढ़चिढ़ापन, मानसिक अवसाद और थकावट भी थाइराइड के संकेत ही हैं। थाइरॉइड (Thyroid Symptom) ऐसी बीमारी है जिसके साथ और भी कई बीमारियां दस्तक देने लगती हैं। इसलिए जरूरी है कि शुरुआत में ही थाइराइड के संकेत (Thyroid Symptom) पहचान कर, इलाज शुरू कर दें। वरना देर होने पर यह शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है। अगर आप भी थाइराइड का समय से उपचार करना चाहते हैं तो पहचानें थाइराइड के संकेत।
थाइराइड के संकेत (Thyroid Symptom) समझने से पहले जरूरी है कि हम थाइरॉइड (Thyroid) के बारे में जानेें। थाइरॉइड हमारे शरीर में मौजूद ऐसी ग्रंथि है जो मेटाबॉलिज्म में मदद करती है। इसमें मौजूद हार्मोन टी3, टी4 और टीएसएच का स्तर कम या ज्यादा होने से समस्या होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायराइड विकार दस गुना ज्यादा होता है. इसका मुख्य कारण है महिलाओं में ऑटोम्यून की समस्या ज्यादा होना है।
थाइरॉइड (Thyroid) के संकेत जानने के लिए सामान्य भाषा में कहें तो थाइरॉइड दो तरह का होता है। एक में वजन बढ़ने लगता है, जबकि दूसरे में वजन घटने लगता है। यह थाइराइड की सामान्य विविधता है। मेडिकल भाषा में इसे हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म में बांटा जाता है। हाइपरथाइरायडिज्म से एट्रियल फिब्रिलेशन, ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर होने की संभावना रहती है। वहीं हाइपोथाइरायडिज्म, मायक्सेडेमा कोमा और मृत्यु का कारण बनता है।
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लगातार थकान रहना और वजन बढ़ जाना थाइराइड के सामान्य संकेत हैं। ©Shutterstock.[/caption]
लगातार थकान रहना और वजन बढ़ जाना थाइरॉइड के संकेत हैं। ऐसा अगर लगातार महसूस हो रहा हो तो आपको अपना थाइराइड चैक करवा लेना चाहिए। इसके अलावा कुछ और भी संकेत हैं जो बताते हैं कि आपको थाइराइड हो सकता है।
हेयर फॉल यानी बालों का झड़ना पोषण की कमी से भी हो सकता है। पर यह थाइरॉइड (Thyroid) के संकेत भी है। खासतौर पर हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में त्वचा में रूखापन, बालों का झड़ना, भौंहों के बालों का झड़ना जैसी समस्याएं होती हैं। जबकि हाइपरथाइरॉइड में बालों का तेजी से झड़ना और संवेदनशील त्वचा जैले लक्षण दिखते हैं।
अगर आप लंबे समय तक पाचन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो यह थाइराइड के संकेत (Thyroid Symptom) में शामिल हो सकता है। इसमें कब्ज और लूज मोशन दोनों हो सकते हैं। लंबे समय तक कान्सटिपेशन की समस्या हाइपोथाइरॉइड में होती है जबकि हाइपरथाइरॉइड में डायरिया की दिक्कत बार-बार होती है।
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हाइपोथाइरॉडड यानी शरीर में टीएसएच अधिक और टी3,टी4 कम होने पर मांसपेशियों में जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है। ©Shutterstock.[/caption]
हाइपोथाइरॉडड यानी शरीर में टीएसएच अधिक और टी3,टी4 कम होने पर मांसपेशियों में जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है। इससे पैरों में ज्यादा दर्द देखने में आया है। जबकि थाइरॉइड बढ़ने पर गर्दन में सूजन की संभावना बढ़ जाती है। गर्दन में सूजन या भारीपन का एहसास हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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महिलाओं को पीरियड्स के दौरान थाइरॉइड (Thyroid) की स्थिति में पेट में दर्द अधिक रहता है वहीं हाइपरथाइरॉइड में अनियमित पीरियड्स रहते हैं। थाइरॉइड की स्थिति में गर्भ धारण करने में भी दिक्कत हो सकती है। जिससे तनाव और अवसाद का सामना भी करना पड़ सकता है।
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हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में अक्सर तेजी से वजन बढ़ता है। इतना ही नहीं शरीर में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ जाता है। वहीं हाइपरथाइरॉइड में कॉलेस्ट्रॉल बहुत कम हो जाता है। अगर बिना अधिक मेहनत करने के बाद भी आप थकान महसूस करते हैं या छोटी-छोटी बातों पर घबराहट होती है तो इसकी वजह थाइरॉइड हो सकती है।