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Written By: Anshumala | Published : August 6, 2018 5:32 PM IST
क्या आप जरूरत के मुताबिक प्रतिदिन पर्याप्त नींद लेते हैं? हो सकता है आपका जवाब हां में हो, लेकिन नींद से संबंधित हुए सर्वे में मिली जानकारी कुछ और ही कहती है। हाल ही में भारत के प्रमुख मैट्रेस और स्लीप-रिलेटेड प्रोडक्ट्स इनोवेटर वेकफिट ने देश की नींद संबंधी सूचनाओं को हासिल करने के लिए एक सर्वे कराया। इस ऑनगोइंग एक्सरसाइज ने कुछ चौंकाने वाले तथ्यों को उजागर किया है, जिनसे यह साबित होता है कि भारतीय अपनी नींद को बहुत ज्यादा महत्व नहीं देते हैं। इस सर्वे में लोगों ने अपनी नींद से संबंधित कई बातों का खुलासा किया।
सर्वे के अनुसार, 80 प्रतिशत भारतीय सप्ताह में एक से तीन बार नींद महसूस करते हैं, 32 प्रतिशत जब उठते हैं तब थकान महसूस करते हैं और 17 प्रतिशत का मानना है कि उन्हें अनिद्रा (इनसॉम्निया) है।
वेकफिट द्वारा कराए गए इस सर्वे में भारत में रहने वाले लगभग 7,500 से अधिक लोगों से तीन महीने से अधिक समय तक बातचीत की गई। साथ ही इस बात को भी जानने की कोशिश की गई कि क्यों हम हर दिन थकान महसूस करते हैं। शुरुआती सर्वेक्षण में अलग-अलग श्रेणियों के लोगों को शामिल किया गया। इनमें 71 % विवाहित, 26 % सिंगल और 3 % ऐसे लोग थे, जो रिश्ते में होने पर अपनी नींद खो देते हैं। सात महानगरों- बेंगलुरू, दिल्ली, गुरुग्राम, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में 69 % लोगों को चुना गया, जिनमें से 81 % लोग 25 से 44 वर्ष वाले थे। 79 % दिल्लीवासियों ने कहा कि उन्हें हफ्ते में कम से कम तीन बार काम के समय नींद आती है।
सर्वे के अनुसार, एक प्रतिशत लोग आधी रात के बाद सोते हैं और 59 प्रतिशत रात 11 बजे के बाद सोते हैं। ऐसे में सर्केडियन रिदम को दुरूस्त रखना चाहते हैं,तो नियमित रूप से 10 से साढ़े दस बजे के बीच सो जाना चाहिए। देर से सोने की वजह से हमारे दिन की शुरुआत देरी से और थकान के साथ होती है। 26 प्रतिशत से ज्यादा लोग सुबह 8 बजे के बाद उठने की बात स्वीकार कर चुके हैं। हालांकि, सपनों की नगरी मुंबई में 69 प्रतिशत से ज्यादा लोग तो 11 बजे के बाद ही सोते हैं।
क्या है अनिद्रा
अनिद्रा आमतौर पर किसी छिपी बीमारी का लक्षण है। इनसॉम्निया किसी भी उम्र में हो सकती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी से ज्यादा ग्रस्त रहती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक कारण रेस्टलेस लेग सिन्ड्रोम है। ऐसे रोगियों की टांगें नींद में छटपटाती रहती हैं, जिससे दिमाग के अंदर नींद बार-बार टूटती और खुलती रहती है। अधिक दिनों तक इससे ग्रस्त होने पर मरीज डिप्रेशन का शिकार हो सकता है, क्योंकि अनिद्रा के लक्षण उसे मानसिक रोगी बना देते हैं।
क्या हैं लक्षण
इनसॉम्निया की पहचान इसके लक्षणों से हो जाती है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए रोगी की नींद का अध्ययन करना जरूरी है क्योंकि जब तक रोगी की नींद का अध्ययन नहीं किया जाएगा बीमारी की गंभीरता का भी पता नहीं चल पाएगा। स्लीप स्टडीज के दौरान, मरीज की दिल की गति, आंखों की गति, शारीरिक स्थिति, सांस की स्थिति, रक्त प्रवाह आदि को मॉनिटर किया जाता है। इससे यह पता लगता है कि रोगी को सोने के समय क्या दिक्कत आती है। अनिद्रा स्वयं एक बीमारी है साथ ही दूसरी बीमारी या बीमारियों का लक्षण भी है। इनसॉम्निया का इलाज करने के लिए उसके मूल कारणों को जानना और उस कारण का इलाज करना जरूरी हो जाता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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