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Written By: Anshumala | Updated : May 10, 2020 10:26 PM IST
Blood Circulation: शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बाधित होने के कारण? 3 योगासन जो रक्त संचार को बनाते हैं बेहतर।© Shutterstock.
Yoga to improve blood circulation: शरीर में रक्त का संचार (Blood circulation) बेहतर रूप से होते रहना बेहद जरूरी है। ब्लड सर्कुलेशन सही होता है, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग अपना कार्य अच्छी तरह से कर पाते हैं। दिल की सेहत अच्छी रहती है, तो आपको कार्डियोवैस्कुलर डिजीज नहीं होते हैं। सिर से लेकर पांव तक जब लगातार बिना रुकावट के खून आपकी नसों में दौड़ता रहता है, तो आप कई बीमारियों से भी बचे रहते हैं। जब ब्लड सर्कुलेशन किसी भी तरीके से प्रभावित होता है, तो हृदय रोग जैसे हार्ट अटैक, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा आदि का खतरा बढ़ जाता है। खून के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ऑक्सीजन, मिनरल्स, पोषक तत्वों का संचार होता है। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंग अपना काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं और आप स्वस्थ रहते हैं।
आजकल की सेडेंटरी लाइफस्टाइल (Sedentary Lifestyle) के कारण काफी हद तक शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके (Tips to improve blood circulation) से नहीं होता है। सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी अधिक देर तक बैठे रहना। इसके अलावा, एक्सरसाइज नहीं करना, स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन, अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स जैसे जंक और फास्ट फूड का अधिक सेवन आदि शरीर में रक्त संचार को प्रभावित करते हैं। ब्लड सर्कुलेशन कई बार नसों और धमनियों में ब्लड क्लॉट (yoga poses to clean blockage in arteries) जमने या ब्लॉकेज होने से भी प्रभावित होता है।
नसों में रक्त का थक्का जमना जानलेवा साबित हो सकता है। दिल की धमनियां जब ब्लॉक हो जाती हैं, तो दिल को ब्लड पंप करके पूरे शरीर में पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। हार्ट की आर्टरीज में किसी भी तरह की ब्लॉकेज हार्ट अटैक, हृदय गति का रुकना, स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थिति उत्पन्न कर सकता है। आप चाहते हैं कि शरीर में रक्त का संचार सही तरीके (How to improve blood circulation) से होता रहे, तो योगासन का भी सहारा ले सकते हैं। कुछ योग ऐसे हैं, जो नसों को साफ करके ब्लड सर्कुलेशन (Yoga to improve blood circulation) को बेहतर बनाते हैं।
यदि आप त्रिकोणासन का अभ्यास करते हैं, तो ब्लड सर्कुलेशन शरीर में (Trikonasana to improve blood circulation) सही होता है। साथ ही अन्य रोग जैसे कब्ज, ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से भी आप बचे रहते हैं। प्रेग्नेंसी में भी महिलाएं त्रिकोणासन का अभ्यास कर सकती हैं।
दोनों पैरों को कंधों के समान एक समान अंतर पर फैलाकर खड़े हो जाएं। अब दाहिने तरफ झुकें और अपने पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें। दूसरे हाथ को उसी दिशा में ऊपर की ओर उठाकर रखें। हथेली खुली हुई होनी चाहिए। इस मुद्रा में 20-30 सेकेंड तक रहें। इसी तरह से अब बाईं तरफ झुकें। पैरों के उंगलियों को नहीं छू पा रहे हैं, तो घुटनों को छू सकते हैं। जिन लोगों को स्लिप डिक्स, पेट की कोई सर्जरी हुई है या साइटिका दर्द है, तो इस योगासन को करने से बचें।
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उष्ट्रासन करने से शरीर में ऑक्सीजन का सर्कुलेशन बेहतर होता है। जिन लोगों को सांस से संबंधित कोई रोग है, उन्हें भी इस योग का अभ्यास करना चाहिए। उष्ट्रासन करने के लिए पैरों को लंबाई में फैलाकर बैठें। दाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए, दाईं एड़ी को दाएं नितंब (हिप) के नीचे रखें। इसी तरह बाएं पैर को मोड़ते हुए बाईं एड़ी को बाएं नितंब के नीचे रखें। घुटनों के बल खड़े हो जाएं। ध्यान रहे कि दोनों घुटने और पैरों के पंजे समान दूरी पर खुले हों। लंबी सांस लें और सांस छोड़ते हुए कमर के ऊपरी हिस्से को पीछे की ओर ले जाएं। दाईं हथेली से दाईं एड़ी को और बाईं हथेली से बाईं एड़ी को पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे, पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे।
इस योगासन से पेट के अंगों को मजबूती मिलती है, जिससे पाचन प्रणाली बेहतर होती है। इसे करने से शरीर में रक्त संचार तेज होता है। नौकासन करने के लिए सीधे लेट जाएं। एड़ी और दोनों पंजे आपस में जुड़े हों। गहरी सांस लेते हुए पैरों को ऊपर की ओर 45 डिग्री के एंगल में उठाएं। दोनों हाथों को घुटनों की सीध में स्थापित करें। धड़ को भी धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए उसी अवस्था में वापस आएं। यह प्रक्रिया 5 बार दोहराएं।
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