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Written By: Anshumala | Published : February 22, 2019 8:11 AM IST
Opt for fish oil to reduce your asthma risk. © Shutterstock
बढ़ते प्रदूषण, धूम्रपान की आदतों और खराब जीवनशैली के कारण अस्थमा की समस्या इन दिनों बहुत से लोगों को प्रभावित कर रही है। इससे आमतौर पर सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द के साथ जीवन को खतरा भी हो सकता है। अस्थमा एक आजीवन बीमारी है, जो पूरी तरह से ठीक नहीं की जा सकती है। हालांकि स्वस्थ जीवन-शैली को अपनाकर और नियमित रूप से दवाओं का सेवन कर इसकी तीव्रता को नियंत्रित किया जा सकता है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली को बनाए रखने और अस्थमा के लक्षणों को कम करने में योग मददगार हो सकता है। फिटनेस एक्सपर्ट और मंतन फिटनेस लाउंज के डीएम, गगन दीप खजोटिया कुछ योग आसन के बारे में बता रहे हैं, जो अस्थमा से ग्रस्त लोगों के लिए लाभदायक हो सकते हैं।
उज्जायी प्राणायाम : इस तरह का प्राणायाम नीचे लेटकर और खड़े होकर किया जा सकता है। यह फेफड़ों के काम में सुधार करने, फेफड़ों में इजाफा करने, सांस को लंबे समय तक रोकने और शरीर को ऑक्सीजन की आवश्यक मात्रा देने में मदद करता है। अगर आप प्राणायाम को पहली बार कर रहे हैं, तो उज्जायी प्राणायाम को पहली बार लेटने वाली मुद्रा में करें।
उज्जायी प्राणायाम करने की विधि
अपने पैरों को बाहर फैलाकर और हाथों को अपनी तरफ स्ट्रेच करके फर्श पर लेट जाएं। फिर अपने पूरे शरीर को आराम दें और मुंह से बाहर की तरफ सांस लें। सांस को बाहर करते समय ध्यान रखें कि फेफड़े पूरी तरह से खाली हों और होठों को पाउट (इस तरह जैसे आप सीटी बजा रहे हैं) की तरह बनाएं। एक बार फेफड़े खाली होने के बाद, अपनी नाक के माध्यम से हवा अंदर लें। ध्यान रखें कि आप अपने फेफड़ों को पूरी तरह भर लें। अब अपनी सांस को रोक कर अपने पैरों को बाहर की तरफ स्ट्रेच करें। इस अवस्था में थोड़ी देर रहें और फिर सांस को बाहर छोड़कर शरीर को आराम दें।
एकपाद उत्तानासन : यह आसन अस्थमा से ग्रस्त लोगों के लिए एकदम सही है क्योंकि यह फेफड़ों को खोलने में मदद करता है और पूरे श्वसन प्रणाली को ऑक्सीजन से भर देता है। साथ ही यह आसन कूल्हों को अधिक लचीला बनाने, पाचन में सुधार करने, पेट के आसपास की मांसपेशियों को टोन और कामेच्छा से संबंधित ग्रंथियों की कार्यप्रणाली को बढ़ाने में मदद करता है।
एकपाद उत्तानासन करने की विधि
सीधे पीठ के बल लेट जाएं। हाथों को बिल्कुल शरीर के बराबर रखें। अब धीरे से सांस लेते हुए दाएं पैर को (घुटने से सीधा रखते हुए) 60 डिग्री का कोण बनाते हुए उठाएं और सांस निकालते हुए वापस लेकर आएं। ऐसे ही इस प्रक्रिया को बाएं पैर से दोहराएं।
योग मुद्रा : यह आसन चेस्ट के विस्तार और फेफड़ों के व्यायाम में मदद करता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस आसन में झुकाव के कारण, शरीर के निचले हिस्सों से खून ऊपर की ओर भागता है और फेफड़े, श्वासनलिका के निचले हिस्से की मालिश में मदद करता है। उस हिस्से की नसों को पोषण देता है। यह फेफड़े और समग्र श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करता है।
योग मुद्रा करने की विधि
इस योग को करने के लिए आराम से सुखासन में बैठ जाएं। अब अपने हाथ को पीठ के पीछे ले जाएं और एक हाथ की कलाई से दूसरे हाथ को पकड़ने का प्रयास करें। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने सिर को जमीन की ओर ले जाना शुरू करें। आप देखेंगे कि आपके हाथ ऊपर की तरफ बढ़ना शुरू कर देंगे। अपने माथे से जमीन को छूने और सांसों को कुछ देर पकड़ने का प्रयास करें। शुरू की मुद्रा में लौटने के लिए अपनी पीठ को आराम से ऊपर उठाने और अपने हाथ की मांसपेशियों को ढीला करने और धीरे-धीरे पकड़ को छोड़ें। फिर से आसन शुरू करने से पहले खुद को कुछ सेकंड के लिए आराम दें।
मुख्य बातें- नियमित आधार पर इन योग आसान को करने से आपको अस्थमा अटैक की चिंता किए बिना फिट रह सकते हैं। इसके अलावा, एक स्वस्थ जीवन-शैली को बनाए रखने और अस्थमा के प्रभाव को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ना, स्वस्थ खाद्य पदार्थों को शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है।