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World Leprosy Day: कुष्ठ रोग के मरीज़ों के लिए इन योगासनों का अभ्यास है लाभदायक

30 जनवरी को जाना जाता है विश्व कुष्ठ रोग दिवस के तौर पर। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश में कुष्ठ रोगियों की भलाई के लिए कई कार्य किए थे। जिसे, ध्यान में रखते हुए उनकी पुण्यतिथी यानि 30 जनवरी 1948 से भारत में लेप्रोसी डे या विश्व कुष्ठरोग दिवस मनाए जाने का फैसला किया है। आइए जानते हैं उन योगासनों (yoga Asanas for Leprosy Patients) के बारे में जो लेप्रोसी के प्रभाव को कर सकते हैं कम।

World Leprosy Day: कुष्ठ रोग के मरीज़ों के लिए इन योगासनों का अभ्यास है लाभदायक
कुष्ठ रोग के मरीज़ों के लिए इन योगासनों का अभ्यास है लाभदायक

Written by Sadhna Tiwari |Published : January 30, 2020 8:24 PM IST

लेप्रोसी (Leprosy ) यानि कुष्ठ रोग के इलाज में कुछ विशेष योगासनों (yoga Asanas for Leprosy Patients) को भी कारगर बताया जाता है। 30 जनवरी को जाना जाता है विश्व कुष्ठ रोग दिवस World Leprosy Day के तौर पर। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश में कुष्ठ रोगियों की भलाई के लिए कई कार्य किए थे। जिसे, ध्यान में रखते हुए उनकी पुण्यतिथी यानि 30 जनवरी 1948 से भारत में लेप्रोसी डे या विश्व कुष्ठरोग दिवस मनाए जाने का फैसला किया है। आइए जानते हैं उन योगासनों (yoga Asanas for Leprosy Patients) के बारे में जो लेप्रोसी के प्रभाव को कर सकते हैं कम।

कुष्ठ रोग के मरीज़ों के लिए इन योगासनों का अभ्यास है लाभदायक (yoga Asanas for Leprosy Patients):

गोमुखासन:

इस आसन से पीठ से जुड़ी तकलीफों से राहत मिलती है। साथ ही पीठ की फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ती है। गोमुखासन किडनी को भी हेल्दी बनाता है। अगर, इसके पूरे फायदे चाहिए तो सुबह ही इसका अभ्यास करना चाहिए। (yoga Asanas for Leprosy Patients)

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अभ्यास का तरीका :

गोमुखासन का अभ्यास करते समय ज़मीन पर बैठकर पीठ को सीधा रखें। हाथों को पीछे ले जाकर एक-दूसरे से जोड़कर लॉक कर दें। इस स्थिति में हाथों और कलाइयों के मसल्स की स्ट्रेचिंग होती है। जिससे, कलाइयों में होने वाले दर्द और तकलीफ से राहत मिलती है। इसका अभ्यास करते समय कोशिश करें कि जितना हो सके उतनी देर आसन में बने रहें।

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सिद्धासन:

सिद्धासन करने से पोस्चर में सुधार होता है। इससे रीढ़ की हड्डी मज़बूत बनती है। इससे, हिप्स, छाती और कंधों की मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है।  इसके, अभ्यास से ग्रॉइन और हिप्स की मांसपेशियो की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है। इससे,  अर्थराइटिज़ और जॉइंट पेन जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है। सिद्धासन से डायजेशन की प्रक्रिया में भी सुधार होता है।  (yoga Asanas for Leprosy Patients)

अभ्यास का तरीका :

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सिद्धासन करने के लिए अपने बाएं पैर की एड़ी को पैरों के बीच रखें। इस आसन में बैठते समय इस बात का ध्यान रखें कि जेनाइटल्स पर बहुत अधिक दबाव ना बनें। दोनों पैरों के तलवों को एकसाथ लाते हुए अपनी थाईज़ के बीच में रखें। अब दोनों हाथों को दोनों घुटनों के ऊपर रखें। हथेलियां ऊपर की तरफ रखें और अपना ध्यान आईब्रोज़ के बीच के स्थान पर केंद्रित करें। इस स्थिति में रहते हुए धीरे-धीरे सांस लें। कोशिश करें कि इस स्थिति में 3-4 मिनट रहें। अगर, आपको इसका अच्छा अभ्यास है तो आप इसे कुछ अधिक समय तक दोहरा सकते हैं।