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24 मार्च को दुनिया भर में विश्व तपेदिक दिवस यानी वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे मनाया जाना है। भारत ने वर्ष 2020 तक टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। यह तभी संभव है, जब हम अपनी और अपने आसपास की हर अच्छी और बुरी आदत पर नजर रखें। हमें उन बुरी आदतों के बारे में जानना भी जरूरी है जो इस बीमारी के जोखिम और ज्यादा बढ़ा देती हैं। ऐसी ही एक बुरी आदत है स्मोकिंग, जिसके कारण हर साल लाखों लोग इस बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं। आइए पहचानें इसके खतरे और लक्षण।
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बढ़ रही है संख्या
अभी तक यह माना जा रहा था कि स्मोकिंग से होने वाली बीमारियों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों का औसत ज्यादा है। पर धीरे-धीरे यह अंतराल भी कम होने लगा है। स्मोकिंग की बढ़ती लत के कारण अब कम उम्र के स्त्री पुरुष भी फेफड़ों की टीबी से ग्रस्त हो रहे हैं।
जानें टीबी और स्मोकिंग का संबंध
ट्यूबरकुलोसिस हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से होता है और आजकल स्त्री हो या पुरूष सभी का ज्यादातर समय बाहर ही बीतता है। घर के बाहर हर प्रकार के वातावरण से इनका सामना होता है। इसका असर उनके खान-पान और उनकी दिनचर्या पर भी नजर आता है। आजकल युवा धूम्रपान और तंबाकू का ज्यादा सेवन करने लगे हैं, जिसकी वजह से उनमें टीबी होने की संभावना ज्यादा बढ़ गई है।
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क्षय रोग यानी टीबी के लक्षण
पुरूषों और महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण एक जैसे ही होते हैं लेकिन महिलाओं का इम्यून सिस्टम पुरूषों की तुलना में ज्यादा मजबूत होता है जिसकी वजह से उनपर टीबी या अन्य बीमारी का कम प्रभाव होता है।
खांसी आना
दो हफ्तों या उससे ज्यादा समय तक खांसी लगातार आना तपेदिक का लक्षण है। शुरूआत में सूखी खांसी आती है लेकिन बाद में खांसी के दौरान बलगम में खून भी आने लगता है। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी आने पर स्वास्थ्य केंद्र जाकर बलगम की जांच करानी चाहिए। लगातार खांसी आने से पुरूषों को सांस संबंधित अन्य बीमारियां भी होने लगती है।
बुखार
इससे पीडि़त होने पर अकसर बुखार रहने लगता है। ट्यूबरकुलोसिस का संक्रमण रहने पर आदमी को हमेशा बुखार रहता है। शुरूआत में लो-ग्रेड फीवर होता है लेकिन बाद में संक्रमण ज्यादा फैलने पर बुखार तेज हो जाता है।
कमजोरी
टीबी होने पर व्यक्ति की खाने के प्रति रुचि समाप्त होने लगती है। जिससे शरीर में कमजोरी आ जाती है और व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है। टीबी होने पर आदमी की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है और उसकी ताकत भी समाप्त होने लगती है। जिसके चलते वजन लगातार कम होने लगता है।
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पसीना आना और सांस लेने में तकलीफ
क्षय रोग होने पर आदमी को रात को सोते वक्त पसीना आता है। मौसम चाहे जैसा भी हो (जबरदस्त ठंड पडने के बावजूद) रात को तेज पसीना आता है। इसके साथ ही जबरदस्त खांसी आती है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। कई बार ज्यादा खांसी आने के वजह से आदमी की सांस भी फूलने लगती है। क्षय रोग होने पर आदमी के शरीर के अन्य भाग भी प्रभावित होते हैं। शरीर के जोड़ों, हड्डियों, मांसपेशियों और सेंट्रल नर्वस सिस्टम में दिक्कत शुरू हो जाती है।