गर्भनिरोधक गोलियों से भी बढ़ता है थ्रोम्बोसिस का खतरा, इन लोगों के लिए भी है इस जानलेवा बीमारी का हाई रिस्क

ब्लड क्लॉटिंग से जुड़ी जानलेवा बीमारी थ्रोम्बोसिस के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों को इससे सुरक्षित रखने के लिए हर साल 13 अक्टूबर को विश्व थ्रोम्बोसिस डे (World Thrombosis Day 2022) मनाया जाता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 9, 2022 11:17 AM IST

High Risk Groups Of  Thrombosis: थ्रोम्बोसिस (Thrombosis) नामक बीमारी की गम्भीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि दुनियाभर में मरनेवाले 4 लोगों में से एक की मृत्यु इस बीमारी की वजह से होती है। वहीं आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 9 लाख से अधिक लोगों को थ्रोम्बोसिस की बीमारी है। आंकड़ों के अनुसार, एड्स, ब्रेस्ट कैंसर और गाड़ियों से होनेवाले एक्सीडेंट्स से मरनेवाले लोगों की संख्या की तुलना में प्रति वर्ष थ्रोम्बोसिस की बीमारी से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है। इसी गम्भीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों को इससे सुरक्षित रखने के लिए हर साल 13 अक्टूबर को विश्व थ्रोम्बोसिस डे (World Thrombosis Day 2022) मनाया जाता है। (High Risk Groups Of Thrombosis In Hindi.)

थ्रोम्बोसिस क्या है और क्यों होती है यह बीमारी ? (What is Thrombosis)

मेडिकल भाषा में थ्रोम्बोसिस एक ऐसी स्थिति को कहा जाता है जिसमें ब्लड वेसल्स में रक्त के थक्के बनते हैं। ये थक्के या ब्लड क्लॉट खून का एक गाढ़ा स्वरूप है जो खून के जमने के बाद ठोस या सॉलिड अवस्था में बदल जाता है। ये थक्के नसों और धमनियों में आंशिक या पूर्ण रूप से रक्त के संचार या ब्लड सर्कुलेशन (Blood circulation) में रूकावटें डाल सकता है। साधारणत: थ्रोम्बोसिस की समस्या शरीर के इन हिस्सों में दिखायी देती है-

  • पैरों के निचले हिस्से
  • थाइज या जांघों में
  • हाथ और ब्रेन
  • किडनी और लिवर
  • आंत

एक्सपर्ट्स के अनुसार थ्रोम्बोसिस एक ऐसी समस्या है जिसके लक्षणों को पहचान कर जल्द से जल्द इलाज शुरू करना चाहिए। इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने से यह बीमारी घातक भी साबित हो सकती है।

थ्रोम्बोसिस के लक्षण क्या हैं ? (Symptoms of  Thrombosis)

  • पैरों में क्रैम्स या ऐंठन
  • पैरों, पैर के निचले हिस्से या टखने में सूजन
  • प्रभावित क्षेत्र की स्किन का रंग पीला-लाल होना
  • सांस लेने से जुड़ी परेशानी
  • चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना
  • चेस्ट पेन और एंग्जायटी
  • तेज खांसी और खांसते समय खून गिरना
  • पल्स रेट बढ़ जाना
  • तकलीफ वाली जगह की स्किन का तापमान बढ़ना

थ्रोम्बोसिस के लगभग 15 प्रकार (Types of Thrombosis) हैं जिनके नाम शरीर के अलग-अलग हिस्सों में महसूस होने के अनुसार तय किए गए हैं। पर आमतौर पर थ्रोम्बोसिस के 2 मुख्य प्रकार होते हैं-

1.डीप वेन थ्रोम्बोसिस-जिसमें पैरों के गहरे नसों में तेज दर्द महसूस होता है।

2.आर्टेरियल-आर्टरीज में होनेवाले दर्द।

किन लोगों को है थ्रोम्बोसिस का रिस्क सबसे अधिक? (People at higher risk of DVT)

डॉ. प्रदीप महाजन (Dr. Pradeep Mahajan, Regenerative Medicine Researcher, StemRx Bioscience Solutions Pvt. Ltd., Navi Mumbai) कहते हैं कि, डीप वेन थ्रोम्बोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की नसों (अधिकांश मामलों में पैरों की नसों) में रक्त के थक्के बनते हैं। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ इसका रिस्क बढ़ सकता है। वहीं, ऐसी हेल्थ कंडीशन्स जिनमें ब्लड फ्लो ठीक तरीके से नहीं हो पाता उनमें भी डीवीटी का रिस्क अधिक होता है। जैसे-

  • लम्बे समय तक स्टेरॉइड वाली दवाओं ( steroid medication) का इस्तेमाल करने से भी डीप वेन थ्रोम्बोसिस की स्थिति गम्भीर हो सकती है। क्योंकि, इससे रक्त में फैट की मात्रा बढ़ सकती है और ब्लड फ्लो गड़बड़ हो सकता है।
  • जबकि, कुछ मरीजों में जेनेटिक्स (genetics) या अनुवांशिकी की वजह से भी रक्त में थक्के बनने और डीवीटी का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं, रक्त के थक्के बनने या थ्रोम्बोसिस की सबसे बड़ी वजह ये स्थितियां बन सकती हैं

पुरानी चोट

किसी एक्सीडेंट या दुर्घटना में चोटिल होने वाले लोगों के शरीर में रक्त का संचार प्रभावित हो सकता है क्योंकि ऐसे लोगों में रक्त के थक्के बनने की संभावना बहुत अधिक होती है।

सर्जरी

कई बार ऑपरेशन या सर्जरी के दौरान नसों या ब्लड वेसल्स डैमेज हो सकती हैं। इससे आगे चलकर ब्लड क्लॉटिंग की समस्या बढ़ सकती हैं।

सुस्त और मोटे लोग

एक जगह बैठे रहने वाले लोग या ऐसी स्थितियां जिसमें लोगों को चलने-फिरने में परेशानी हो, वहां भी मरीजों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा बढ़ सकता है। जब हम चलते-फिरते हैं तो इससे मांसपेशियों का व्यायाम भी होता है और सर्कुलेशन बढ़ता है।

फिजिकली एक्टिव ना रहने वाले लोगों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या बढ़ सकती है। जो लोग लगातार कई घंटों तक बैठे रहते हैं, लेटे रहते हैं या बहुत अधिक आराम करते हैं। इससे रक्त का संचार ठीक तरीके से नहीं होता और ब्लड क्लॉटिंग भी बहुत अधिक होती है। इससे मोटापा भी बढ़ता है जो ब्लड क्लॉटिंग का एक बड़ा कारण है।

वहीं,  बहुत अधिक वजन बढ़ने की वजहसे भी डीप वेन थ्रोम्बोसिस होने का खतरा बढ़ सकता है।

सिगरेट-बीड़ी पीना

स्मोकिंग करे से शरीर में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है जिससे ब्लड क्लॉटिंग बढ़ सकती है।

हार्मोनल दवाइयां

इसके अलावा कुछ दवाइओं जैसे गर्भनिरोधक या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के लिए इस्तेमाल की जानेवाली दवाइओं से भी ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ सकता है।

डीप वेन थ्रोम्बोसिस का इलाज कैसे किया जाता है? (Treatment of Deep Vein  Thrombosis)

डॉ. महाजन के अनुसार, क्वाटंम एनर्जी दवाइयों (Quantum energy medicine) और सेल-बेस्ड थेरपीज जिनमें लेजर पद्धती की मदद ली जाती है, उनकी मदद से DVT जैसी स्थितियों का इलाज करने में आसानी होती है।