
Also Read
High Risk Groups Of Thrombosis: थ्रोम्बोसिस (Thrombosis) नामक बीमारी की गम्भीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि दुनियाभर में मरनेवाले 4 लोगों में से एक की मृत्यु इस बीमारी की वजह से होती है। वहीं आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 9 लाख से अधिक लोगों को थ्रोम्बोसिस की बीमारी है। आंकड़ों के अनुसार, एड्स, ब्रेस्ट कैंसर और गाड़ियों से होनेवाले एक्सीडेंट्स से मरनेवाले लोगों की संख्या की तुलना में प्रति वर्ष थ्रोम्बोसिस की बीमारी से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है। इसी गम्भीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों को इससे सुरक्षित रखने के लिए हर साल 13 अक्टूबर को विश्व थ्रोम्बोसिस डे (World Thrombosis Day 2022) मनाया जाता है। (High Risk Groups Of Thrombosis In Hindi.)
मेडिकल भाषा में थ्रोम्बोसिस एक ऐसी स्थिति को कहा जाता है जिसमें ब्लड वेसल्स में रक्त के थक्के बनते हैं। ये थक्के या ब्लड क्लॉट खून का एक गाढ़ा स्वरूप है जो खून के जमने के बाद ठोस या सॉलिड अवस्था में बदल जाता है। ये थक्के नसों और धमनियों में आंशिक या पूर्ण रूप से रक्त के संचार या ब्लड सर्कुलेशन (Blood circulation) में रूकावटें डाल सकता है। साधारणत: थ्रोम्बोसिस की समस्या शरीर के इन हिस्सों में दिखायी देती है-
एक्सपर्ट्स के अनुसार थ्रोम्बोसिस एक ऐसी समस्या है जिसके लक्षणों को पहचान कर जल्द से जल्द इलाज शुरू करना चाहिए। इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने से यह बीमारी घातक भी साबित हो सकती है।
थ्रोम्बोसिस के लगभग 15 प्रकार (Types of Thrombosis) हैं जिनके नाम शरीर के अलग-अलग हिस्सों में महसूस होने के अनुसार तय किए गए हैं। पर आमतौर पर थ्रोम्बोसिस के 2 मुख्य प्रकार होते हैं-
1.डीप वेन थ्रोम्बोसिस-जिसमें पैरों के गहरे नसों में तेज दर्द महसूस होता है।
2.आर्टेरियल-आर्टरीज में होनेवाले दर्द।
डॉ. प्रदीप महाजन (Dr. Pradeep Mahajan, Regenerative Medicine Researcher, StemRx Bioscience Solutions Pvt. Ltd., Navi Mumbai) कहते हैं कि, डीप वेन थ्रोम्बोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की नसों (अधिकांश मामलों में पैरों की नसों) में रक्त के थक्के बनते हैं। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ इसका रिस्क बढ़ सकता है। वहीं, ऐसी हेल्थ कंडीशन्स जिनमें ब्लड फ्लो ठीक तरीके से नहीं हो पाता उनमें भी डीवीटी का रिस्क अधिक होता है। जैसे-
वहीं, रक्त के थक्के बनने या थ्रोम्बोसिस की सबसे बड़ी वजह ये स्थितियां बन सकती हैं
किसी एक्सीडेंट या दुर्घटना में चोटिल होने वाले लोगों के शरीर में रक्त का संचार प्रभावित हो सकता है क्योंकि ऐसे लोगों में रक्त के थक्के बनने की संभावना बहुत अधिक होती है।
कई बार ऑपरेशन या सर्जरी के दौरान नसों या ब्लड वेसल्स डैमेज हो सकती हैं। इससे आगे चलकर ब्लड क्लॉटिंग की समस्या बढ़ सकती हैं।
एक जगह बैठे रहने वाले लोग या ऐसी स्थितियां जिसमें लोगों को चलने-फिरने में परेशानी हो, वहां भी मरीजों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा बढ़ सकता है। जब हम चलते-फिरते हैं तो इससे मांसपेशियों का व्यायाम भी होता है और सर्कुलेशन बढ़ता है।
फिजिकली एक्टिव ना रहने वाले लोगों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या बढ़ सकती है। जो लोग लगातार कई घंटों तक बैठे रहते हैं, लेटे रहते हैं या बहुत अधिक आराम करते हैं। इससे रक्त का संचार ठीक तरीके से नहीं होता और ब्लड क्लॉटिंग भी बहुत अधिक होती है। इससे मोटापा भी बढ़ता है जो ब्लड क्लॉटिंग का एक बड़ा कारण है।
वहीं, बहुत अधिक वजन बढ़ने की वजहसे भी डीप वेन थ्रोम्बोसिस होने का खतरा बढ़ सकता है।
स्मोकिंग करे से शरीर में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है जिससे ब्लड क्लॉटिंग बढ़ सकती है।
इसके अलावा कुछ दवाइओं जैसे गर्भनिरोधक या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के लिए इस्तेमाल की जानेवाली दवाइओं से भी ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. महाजन के अनुसार, क्वाटंम एनर्जी दवाइयों (Quantum energy medicine) और सेल-बेस्ड थेरपीज जिनमें लेजर पद्धती की मदद ली जाती है, उनकी मदद से DVT जैसी स्थितियों का इलाज करने में आसानी होती है।