
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 8, 2026 6:09 PM IST
Medically Verified By: Dr. Pawan Kumar Singh
thalassemia prevention (Image Credit: chatgpt)
थैलेसीमिया से भी ज्यादा खतरनाक है इस बीमारी के प्रति अवेयरनेस की कमी। ऐसा भी नहीं है कि थैलेसीमिया की बीमारी के बारे में किसी को जानकारी नहीं है, लेकिन ज्यादातर लोगों को अभी तक भी इस बीमारी के नाम और इसके लक्षणों की पहचान नहीं है। ज्यादातर लोग अभी भी इसे बच्चों की बीमारी समझते हैं, लेकिन यह जेनेटिक कंडीशन है, जो जन्म से ही शरीर में होती है और शुरुआती एक या दो सालों में ही इसके लक्षण गंभीर होने लगते हैं और इस बीमारी का पता चल जाता है। अभी भी थैलेसीमिया को लेकर लोगों के बीच में बहुत सी कनफ्यूजन्स हैं और बहुत सी अफवाहें हैं। आज विश्व थैलेसीमिया दिवस है और इस मौके पर हर पर हम एक्सपर्ट्स से थैलेसीमिया के बारे में कुछ ऐसी चीजें जानेंगे जो आम लोगों को बहुत ही कम पता होती हैं।
“थैलेसीमिया एक आनुवंशिक (जेनेटिक) रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इससे मरीज को बार-बार खून की कमी (एनीमिया) होती है। यह बीमारी किसी संक्रमण की तरह नहीं फैलती, बल्कि माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए जाती है। अगर दोनों माता-पिता थैलेसीमिया के कैरियर हैं, तो बच्चे में इस बीमारी के होने की संभावना 25% तक हो सकती है। इसलिए इसे समझना और सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।
डॉ. पवन कुमार सिंह, वाइस चेयरमैन – (हेमेटो-ऑन्कोलॉजी & BMT), ऑन्कोलॉजी, ShardaCare–Healthcity
अगर आप जान चुके हैं कि थैलेसीमिया क्या है तो अब जान लीजिए की इसे रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है समय पर जांच और जागरूकता। शादी से पहले या प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले ब्लड टेस्ट (थैलेसीमिया स्क्रीनिंग) करवाना चाहिए। अगर दोनों पार्टनर कैरियर पाए जाते हैं, तो जेनेटिक काउंसलिंग के जरिए सही निर्णय लिया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी कुछ टेस्ट के जरिए बच्चे में इस बीमारी की जांच की जा सकती है। इन उपायों से थैलेसीमिया के नए मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
about thalassemia (Image credit: chatgpt)
पहले थैलेसीमिया का इलाज सिर्फ बार-बार खून चढ़ाने और दवाइयों तक सीमित था, जिससे मरीज को जीवनभर अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब बोन मैरो ट्रांसप्लांट (स्टेम सेल ट्रांसप्लांट) एक प्रभावी इलाज के रूप में सामने आया है, जो कई मामलों में स्थायी समाधान दे सकता है। इसके अलावा, जीन थेरेपी जैसी नई तकनीकें भी भविष्य में इस बीमारी के इलाज को और आसान बना सकती हैं।
genetic counselling thalassemia (Image Credit chatgpt)
थैलेसीमिया को लेकर सबसे बड़ी जरूरत है सही जानकारी और जागरूकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि समय पर जांच, सही सलाह और आधुनिक इलाज के जरिए न सिर्फ इस बीमारी को रोका जा सकता है, बल्कि कई मरीजों को सामान्य और स्वस्थ जीवन भी दिया जा सकता है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल थैलेसीमिया से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल थैलेसीमिया या किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।