वर्ल्ड थैलेसीमिया डे 2020 : पेरेंट्स से बच्चों को मिलने वाली थैलेसीमिया डिजीज के कारण, लक्षण और उपचार

थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। माता-पिता इसके वाहक होते हैं। प्रतिवर्ष लगभग 10,000 से 15,000 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित होते हैं। बीमारी हीमोग्लोबिन की कोशिकाओं को बनाने वाले जीन में म्यूटेशन के कारण होती है। इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन के निर्माण की प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती है और रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है। इसके कारण उसे बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है।

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Written By: Anshumala | Updated : May 8, 2020 10:32 PM IST

Thalassemia causes & Symptoms : थैलेसीमिया (Thalassemia) बच्चों में होने वाली एक रक्त विकार से संबंधित बीमारी है। यह रोग बच्चों को उनके माता-पिता से मिलता है, इसलिए इसे अनुवांशिक रूप से होने वाला रोग कहा जाता है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रत्येक वर्ष 8 मई को 'विश्व थैलेसीमिया दिवस' मनाया जाता है। इस बार का थीम है 'यूनिवर्सल एक्सेस टू क्वॉलिटी थैलेसीमिया हेल्थकेयर सर्विसेज : बिल्डिंग ब्रिजेज विद एंड फॉर पेशेंट्स'। थैलेसीमिया होने पर शरीर में खून की बहुत कमी हो जाती है। इसका कारण है हीमोग्लोबिन के निर्माण की प्रक्रिया का ठीक से काम न करना। खून की कमी होने पर शरीर में बार-बार बाहरी खून चढ़ाना पढ़ता है। जानें, थैलेसीमिया के कारण, लक्षण (Thalassemia causes & Symptoms) क्या होते हैं...

जन्म के 4-6 महीने में नजर आता है लक्षण (Thalassemia Symptoms)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, थैलेसीमिया से पीड़ित ज्यादातर बच्चे गरीब देशों में पैदा होते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों में लक्षण जन्म से 4 या 6 महीने में नजर आते हैं। कुछ बच्चों में 5 से 10 साल में भी लक्षण दिखाई देते हैं। त्वचा, आंखें, जीभ और नाखून पीले पड़ने लगते हैं। दांतों को उगने में कठिनाई आती है। स्थिति गंभीर न होने पर पौष्टिक भोजन और व्यायाम बीमारी को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।

थैलेसीमिया का कारण (Thalassemia causes)

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशांत वर्मा के अनुसार, थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है और माता-पिता इसके वाहक होते हैं। प्रतिवर्ष लगभग 10,000 से 15,000 बच्चे इस बीमारी के शिकार होते हैं। यह बीमारी हीमोग्लोबिन की कोशिकाओं को बनाने वाले जीन में म्यूटेशन के कारण होती है। थैलेसीमिया के रोगियों में ग्लोबीन प्रोटीन या तो बहुत कम बनता है या बिल्कुल भी नहीं बनता है। इसके कारण लाल रक्त कोशिकाएं (Red blood cells) नष्ट हो जाती हैं। इससे शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और पीड़ित को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है।

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रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है असर

लाल रक्त कोशिकाओं की आयु 120 दिनों की होती है, लेकिन इस बीमारी के कारण आयु घटकर 20 दिन रह जाती है, जिसका सीधा असर हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से शरीर कमजोर हो जाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है, जिसके कारण पीड़ित व्यक्ति को कई बीमारी घेर लेती है।

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शरीर में हो जाती है खून की कमी

यह रोग होने पर बच्चे के शरीर में खून की कमी हो जाती है। इससे शरीर का विकास रुक जाता है। इसमें अनुवांशिक काउंसलिंग अनिवार्य है। थैलेसीमिया की गंभीर अवस्था में खून चढ़ाना जरूरी हो जाता है।

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