World Thalassemia Day 2020: बच्चों के लिए बहुत ही खतरनाक है थैलेसीमिया, जानें इसके लक्षण और उपचार

थैलेसीमिया, रक्त संबंधित गंभीर बीमारी है। इस बीमारी के चलते बच्चों में खूब की कमी होने लगती है। थैलेसीमिया एक रक्त संबंधी जेनेटिक बीमारी है, जो माता-पिता के जरिए बच्चों को होती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचने के उपाय-

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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 7, 2020 6:36 PM IST

World Thalassemia Day 2020: हर साल 8 मई को वर्ल्ड थैलेसीमिया डे (World Thalassemia Day 2020) मनाया जाता है। इस डे को मनाने का उद्देश्य लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरुक करना है। थैलेसीमिया, रक्त संबंधित गंभीर बीमारी है। इस बीमारी के चलते बच्चों में खूब की कमी होने लगती है। थैलेसीमिया एक रक्त संबंधी जेनेटिक बीमारी है, जो माता-पिता के जरिए बच्चों को होती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचने के उपाय-

एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में रेड ब्लड सेल्स (RBC) की संख्या 45 से 50 लाख प्रति घन मिली मीटर होती है। थैलेसीमिया की वजह से रेल ब्लड सेल्स (RBC) तेजी से नष्ट होने लगते हैं। इस बीमारी के वजह से नए ब्लड सेल्स बनने बंद हो जाते हैं। रेड ब्लड सेल्स की सामान्यत: औसतन आयु 120 दिन होती है, जो घटकर सिर्फ 10 से 25 दिन की ही रह जाती है। इस वजह से शरीर में खून की कमी होने लगती है और धीरे-धीरे शरीर अन्य बीमारियों का शिकार हो जाता है।

थैलेसीमिया के लक्षण (Symptoms of Thalassemia)

थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है, इसलिए जन्म के 6 महीने बाद से ही बच्चों में इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। इनके प्रमुख लक्षण हैं-

  • जल्दी ही थकान महसूस होना
  • कमजोरी और कुपोषित बच्चा।
  • स्किन का रंग पीला होना।
  • चेहरे की हड्डी की विकृति
  • वजन बढ़ना
  • विकास की गति धीमी
  • पेट की सूजन
  • गहरा और गाढ़ा मूत्र।
  • सांस लेने में परेशानी

थैलेसीमिया के उपचार (Treatment of Thalassemia)

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को संतुलित आहार लेना चाहिए। ऐसे मरीज को डॉक्टर्स डायट के साथ-साथ विटामिन, आयरन और सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं। वहीं, हालात गंभीर होने पर मरीजों का खून बदला जाता, इसके अलावा बोन मैरो ट्रांसप्लांट और पित्ताशय की थैली को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है।

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इस बीमारी से बचने के लिए मरीज को हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन ज्यादा और कम वसायुक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही मरीजों को आयरन युक्त फूड्स,  मछली, चिकन जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। नियमित रूप से योग और व्यायाम करने से भी इस बीमारी से बचा जा सकता है।

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा थैलेसीमिया से बचा रहे, तो माता-पिता बनने से पहले एक बार ब्लड टेस्ट जरूर कराएं। इसके बाद बच्चा होने के बाद भी समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाते रहें। प्रेग्नेंसी के चार महीने के अंतराल में भ्रूण का परीक्षण करवाएं। अगर हो सके, तो शादी से पहले लड़का-लड़की का ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए।

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