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वर्ल्‍ड टीबी डे : भारत में डॉट्स है टीबी के इलाज का पक्‍का वादा, जानें इसके बारे में सब कुछ

भारत ने तय किया है कि इस बीमारी को 2020 तक जड़ से खत्‍म कर देना है, इसी के लिए बनाई गई व्‍यापक रणनीति का हिस्‍सा है ‘डॉट्स’।

वर्ल्‍ड टीबी डे : भारत में डॉट्स है टीबी के इलाज का पक्‍का वादा, जानें इसके बारे में सब कुछ
भारत ने तय किया है कि इस बीमारी को 2020 तक जड़ से खत्‍म कर देना है, इसी के लिए बनाई गई व्‍यापक रणनीति का हिस्‍सा है ‘डॉट्स’। ©Shutterstock.

Written by Yogita Yadav |Published : March 23, 2019 5:39 PM IST

टीबी यानी क्षय रोग खतरनाक भले हो, पर अब यह लाइलाज नहीं रहा। भारत में इसे हराने के लिए व्‍यापक रणनीति लागू की जा चुकी है। इसी रणनीति का हिस्‍सा है ‘डॉट्स', जिसे टीबी के इलाज का पक्‍का वादा माना जाता है। अगर आपको भी इस खतरनाक बीमारी को परास्‍त करना है, तो जानें डॉट्स के बारे में सब कुछ।

हो सकता है इलाज

हमारे देश में अब ऐसी दवाईयां बन चुकी हैं जिनसे क्षय रोग ठीक हो सकता है। इन दवाओं का कोर्स 6-9 महिने का होता है। अब तक इस रोग के काबू में न आ पाने की सबसे बड़ी वजह यही है कि थोड़ा सा ठीक महसूस करने पर मरीज इन दवाओं का सेवन बंद कर देता है। जबकि इससे टी.बी के दोबारा होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

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क्‍या है डॉट्स

डॉट्स यानी DOTS (Directly Observed Treatment, Short Course) के जरिए टी.बी के रोगियों को ठीक किया जाता है। यह विधि स्वास्थय संगठन द्वारा विश्व स्तर पर टी.बी. को नियन्त्रण में करने के लिये अपनाई गई है, जिसमें रोगी को एक-दिन छोड़कर हफ्ते में तीन दिन डॉट्स कार्यकर्ता के द्वारा दवाई का सेवन कराया जाता है।

जानें डॉट्स विधि के बारे में

डॉट्स विधि के अन्तर्गत चिकित्सा के तीन वर्ग है। पहला, दूसरा व तीसरा। प्रत्येक वर्ग में चिकित्सा का गहन पक्ष व निरंतर पक्ष होता है।

गहन पक्ष - गहन पक्ष के दौरान यह सुनि‍श्चित करना होता है कि रोगी दवा की प्रत्येक खुराक डॉट्स कार्यकर्ता की देख-रेख में लें। इस दौरान हर दूसरे दिन, सप्ताह में तीन बार दवाईयों का सेवन कराया जाता है। अगर निर्धारित दिन पर रोगी चिकित्सालय में नहीं आता है तो डॉट्स प्रोवाईडर की जिम्मेदारी बनती है,  कि रोगी को घर से लेकर आए उसे समझाए और उसे दवा खिलाएं।

निरंतर पक्ष - निरन्तर पक्ष में रोगी को हर सप्ताह दवा की पहली खुराक डॉट्स कार्यकर्ता के सामने लेनी है तथा अन्य दो खुराक रोगी को स्वयं लेनी होगी। अगले हफ्ते की दवाईयां लेने के लिये रोगी को पिछले हफ्ते लिया गया दवाओं का खाली पैक अपने साथ लाना जरूरी होता है।

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बलगम की जांच

दवाओं की खुराक देने के बाद रोगी के बलगम की जांच करवाई जाती है। यदि बलगम की जांच की रिपोर्ट निगेटिव है तो रोगी को निरन्तर पक्ष की दवाईयां देना शुरु कर दिया जाता है। यदि बलगम की रिपोर्ट पॉजि़टिव हो तो इलाज करने वाले चिकित्सक रोगी को दी जा रही दवाओं की अवधि बढ़ा देता है।

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टीबी के सभी रोगियों का इलाज डॉट्स से संभव

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डॉट्स पद्धति के अन्तर्गत सभी प्रकार के क्षय रोगियों को तीन समूह में बांटकर उनका इलाज किया जाता है। सभी प्रकार के क्षय रोगियों का इलाज डाट्स से सम्भ व है।

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