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भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य यह है कि 2025 तक टीबी से मुक्ति मिल जायेगी। वर्तमान समय में देखें तो जो मामले प्रकाश में हैं उनके हिसाब से भारत मं टीबी के करीब 28 लाख लोग शिका हैं। वर्ष 2017 के आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग 4 लाख लोगों की मौत टीबी से हुयी थी।
भारत में टीबी की समस्या अन्य कई बीमारियों की अपेक्षा बहुत ज्यादा है। भारत सरकार की तरफ से वर्ष 2025 तक टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक की सरकारों नें टीबी को लेकर जरूरी व सार्थक कदम उठाने कमतर रही हैं। मार्च में प्रकाशित भारत सरकार की रिपोर्ट और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में टीबी से लड़ना अभी भई चुनौतियों से भरा हुआ है।
भारत दुनिया में सबसे अधिक टीबी मरीजों का देश है यह कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के 27 प्रतिशत मरीज भारत में हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य यह है कि 2025 तक टीबी से मुक्ति मिल जायेगी। वर्तमान समय में देखें तो जो मामले प्रकाश में हैं उनके हिसाब से भारत मं टीबी के करीब 28 लाख लोग शिका हैं। वर्ष 2017 के आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग 4 लाख लोगों की मौत टीबी से हुयी थी। World TB Day 2019 : विश्व टीबी दिवस क्या है ?
टीबी के सबसे खतरनाक रूप मल्टी ड्रग रजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) का विश्व की तुलना में भारत में सबसे ज्यादा प्रकोप है। एमडीआर टीबी या मल्टी ड्रग रजिस्टेंट टीबी में इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं का असर ही नहीं होता है। एमडीआर टीबी में मरीजों के बचने की संभावना बहुत कम रहती है। आंकड़ों की मानें तो एमडीआर टीबी से बचने की संभावना 50 से 10 प्रतिशत तक ही रहती है।
दुनिया के 27 प्रतिशत टीबी मरीज भारत में हैं इससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि एमडीआर टीबी के विश्व के 27 मरीज भारत में ही हैं। टीबी को लेकर तमाम तरह की जागरूकता कार्यक्रम होने के बावजूद इसकी चपेट में लोग आ जाते हैं। World TB Day 2019 : टीबी को फैलने से कैसे रोका जा सकता है ?
स्वास्थ्य पत्रिका हीलियो में प्रकाशित एक लेख में मॉन्ट्रियल स्थित मेकगिल यूनिवर्सिटी के डॉ. मधुकर पाइ कहते हैं, "भारत में टीबी का प्रकोप सबसे अधिक है। यहां अधिकतर लोग निजी अस्पतालों में ही इलाज कराते हैं। प्राइवेट सेक्टर की सक्रिय भूमिका के बिना इस बीमारी का निदान मुश्किल है।"
भारत में टीबी की बीमारी की मुख्य वजह लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को माना जाता है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति यह है कि लोग वहां इलाज करवाने से कतराते हैं तो नीजी अस्पतालों में पैसे वालों की ही पहुंच है। भारत में टीबी की वजह से होने वाली मौतों का आकड़ा थोड़ा कम हुआ है लेकिन वह बहुत ही कम है। सरकार का आगामी लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में एक लाख लोगों में 200 लोग जहां टीबी के शिकार हो रहे हैं उसे एक-दो तक लाया जाएगा। वैसे यह लक्ष्य तो बहुत ही अच्छा है लेकिन इसे पाना अभी तो बहुत मुश्किल लग रहा है।
भारत में टीबी के मरीजों की संख्या अधिक होने का मुख्य कारण यह भी है कि टीबी की समय पर पहचान ही नहीं हो पाती है। भारत में सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक टीबी के मरीज हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने टीबी के आंकड़ों को सार्वजनिक करना शुरू किया है जो की एक बहुत अच्छी बात है। भारत में बहुत से मरीज टीबी के शिकार रहते हैं और उनको पता भी नहीं होता और मौत हो जाती है। आने वाले समय पर सभी तक इलाज पहुंचाने का संकल्प ही इस खतरनाक रोग से छुटकारा दिला सकता है।
भारत में स्वास्थ्य का बजट जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम हैं। आंकड़ों की मानें तो भारत सरकार का स्वास्थ्य बजट जरूरत से करीब 10 हजार करोड़ कम है। भारत में ज्यादातर आबादी गांवों में बसती है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इलाज न मिल पाना सबसे बड़ी समस्या तो है ही साथ में वहां के लोगों को जरूरी जांच की सुविधा भी नहीं है जिसकी वजह से लोग टीबी जैसे संक्रामक रोग के गंभीर शिकार होते हैं।
भारत जैसे देशों में बड़ी से बड़ी कंपनियां भी इस क्षेत्र में जरूरी रिसर्च नहीं करती हैं। ज्यादातर कंपनियों का मानना है कि यह गरीबों को होने वाली बीमारी है। गरीबों को होने वाली बीमारी में उनके कारोबार को कोई खास फायदा नहीं होने वाला इस वजह से वो इससे दूरी बनाए रखती हैं। हाल के वर्षों में भारत सरकार ने टीबी के इलाज और उन्मुलन के लिए स्वास्थ्य बजट बढ़ाया है लेकिन इंडिया स्पेंड में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ह जरूरत से लगभग 10 हजार करोड़ कम है।