World Stroke Day 2025: क्या आपको पता है आपके दिमाग को भी नुकसान पहुंचा रहा है प्रदूषण, बढ़ रहा स्ट्रोक का खतरा

Risk of Stroke in Air Pollution: बढ़ा हुआ प्रदूषण आपके ब्रेन को डैमेज भी कर सकता है, जिसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है। इस लेख में जानें कैसे वायु प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ता है।

WrittenBy

Written By: Mukesh Sharma | Published : October 29, 2025 12:26 PM IST

Effects of Air Pollution on Brain: दिल्ली समेत भारत के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर कई बार खतरनाक स्तर पर आ जाता है। हम अच्छे से जानते हैं कि प्रदूषण हमारी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, इससे श्वसन मार्ग, फेफड़े, स्किन और आंखों जैसे जरूरी अंगों को बहुत नुकसान होत है। लेकिन क्या आपको पता है कि प्रदूषण हमारे ब्रेन को भी डैमेज करता है? जिससे स्ट्रोक जैसी बीमारियां का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। आज वर्ल्ड स्ट्रोक डे के मौके पर हम जानने की कोशिश करेंगे कि किस तरह वायु प्रदूषण हमारे मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाकर स्ट्रोक जैसी जानलेवा और जीवन को प्रभावित कर देने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है।

मस्तिष्क पर प्रदूषण का असर

ज्यादातर लोगों को लगता है कि प्रदूषण सिर्फ हमारे फेफड़ों, साइनस और अन्य श्वसन तंत्र के अंगों को प्रभावित करता है। लेकिन वायु प्रदूषण का गंभीर प्रभाव ब्रेन और हार्ट को भी नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक वायु प्रदूषण वाली जगह पर रहना या फिर वायु प्रदूषण का असर बहुत ज्यादा होने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि हवा में बहुत ही सूक्ष्म कण होते हैं, जो सांस के माध्यम से शरीर के अंदर चले जाते हैं और खून में मिल जाते हैं।

ये कण खून व रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कई बार रक्त के थक्के जमने का खतरा रहता है और ये थक्के ब्रेन तक भी पहुंच सकते हैं। इसके साथ-साथ ये बेहद सूक्ष्म कण रक्त वाहिकाओं में सूजन आदि पढ़ा सकते हैं, जिसके कारण भी ब्रेन स्ट्रोक जैसी स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।

(और पढ़ें - ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण)

बच्चों व बुजुर्गों को ज्यादा खतरा

कुछ रिसर्चों में यह पाया गया है कि प्रदूषण का असर दिमाग पर बच्चों और बुजुर्गों में वयस्कों की तुलना में ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बुजुर्गों को इसका खतरा नहीं है। बुजुर्गों और बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में कमजोर होता है, जिस कारण से ये बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है।

कैसे करें बचाव

जो लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां पर वायु प्रदूषण ज्यादा हैं, उन्हें खुद कोशिश करनी है कि वे जितना हो सके प्रदूषण के संपर्क में न आएं। जितना हो सके घर के अंदर रहें और सुबह व शाम के समय जब प्रदूषण ज्यादा होता है तो घर के खिड़की-दरवाजे बंद रखें। घर के अंदर एयर प्यूरिफायर लगाएं। जरूरत पड़ने पर ही बाहर जाएं और बाहर जाते समय अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाएं। अगर काम जरूरी नहीं है तो उसे सुबह या शाम की बजाय दोपहर में ही करें। अगर आप किसी ज्यादा ट्रैफिक वाले क्षेत्र में जा रहे हैं, तो पैदल या बाइक आदि पर जाने की बजाय कार से जाएं।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source