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World Stroke Day 2020: स्ट्रोक की समस्या विश्व में स्वास्थ्य की प्रमुख चिंताओं में से एक है। अस्वस्थ जीवनशैली, कुछ अन्य बीमारियां इसके विकसित होने का कारण हो सकतीं हैं जिनमें से कुछ कारणों का बचाव भी किया जा सकता है लेकिन अभी के दौर में यह बीमारी बहुत गंभीर रूप से सामने आ रही है। कोविड के दौर में जहाँ एक ओर स्ट्रोक के मरीजों की इलाज प्रक्रिया बाधित हुई वहीँ कोविड संक्रमित लोगों में स्ट्रोक के बहुत से मामले देखे गए हैं। यानि अभी के दौर में इसके प्रति और भी ज्यादा सचेत होने की ज़रूरत है। इसके अलावा , भारत में भी यह विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है और एक स्टडी के अनुसार दुनिया में 4 में से एक व्यस्क को स्ट्रोक होगा लेकिन सक्रिय जीवनशैली से इसका जोखिम रोका जा सकता है। यानी स्ट्रोक एक बेहद गंभीर रोग है जिसको तत्काल इलाज की ज़रूरत होती है लेकिन स्वस्थ जीवनशैली के ज़रिये इसके जोखिम को रोका भी जा सकता है। तो कुल मिलकर हमको स्ट्रोक जैसे गंभीर रोग को लेकर बहुत जागरूकता की आवश्यकता है।
यह स्ट्रोक आखिर है क्या और इसके क्या कारण हो सकते हैं बता रहे हैं डॉक्टर अमित श्रीवास्तव, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल :-
स्ट्रोक : सामान्य भाषा में कहें तो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन रुक जाने के कारण उसका संचालन रुक जाता है और कुछ कोशिकाएं मृत हो जातीं हैं इस स्थिति को स्ट्रोक कहते हैं। स्ट्रोक के परिणाम बेहद गंभीर से लेकर सामान्य भी हो सकते हैं। किसी प्रकार की शारीरिक विकलांगता, किसी अंग का संचालन रुक जाना, स्थायी विकलांगता या गंभीर हालात में मृत्यु जैसे परिणाम हो सकते हैं। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं :-
• डायबिटीज, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां, जो रक्तचाप को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।
• कोलेस्ट्रोल का अत्यधिक बढ़ जाना जो धमनियों पर अतिरिक्त दबाव बनाते हैं।
• अत्याधिक वजन जो धमनियों पर अतिरक्त दबाव तो बनता ही है साथ ही रक्तचाप को भी प्रभित करता है।
• किसी अन्य बीमारी के कारण ऐसी दवाइयों का सेवन जो रक्तचाप पर असर डाल सकतीं हैं।
• पहले से गंभीर न्यूरोलॉजी संबंधी बीमारियां जो एक समय बाद इस समस्या की ओर ले जा सकती हैं।
• धूम्रपान, व नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन।
• एंग्जाइटी/डिप्रेशन/ एडजस्टमेंट डिसऑर्डर्स जैसी समस्याएं जो अपने गंभीर रूप में स्ट्रोक का भी जोखिम तैयार कर सकती हैं।
यहां समझना उचित है कि कोविड मूल रूप से श्वसन सम्बन्धी बीमारी है जिसके बचाव की भी तमाम कोशिशें और सावधानियां अपनाई जातीं है लेकिन कोविड का शरीर के अन्य अंगों के संचालन पर भी असर पड़ता है और स्ट्रोक के विषय में इसकी भूमिका समझने के लिए मस्तिष्क के सवास्थ्य के सन्दर्भ में व्यापक रूप से समझना जरूरी है जिसके बारे में बता रहे हैं डॉक्टर साहिल कोहली, कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, नारायणा अस्पताल :-
कोविड संक्रमण के दौर में खास तौर पर इसके लक्षणों को मसहूस करके कोविड की जांच के लिए लोग जाते हैं, लेकिन अध्ययनों के हिसाब से तकरीबन आधे मरीज़ों को न्यूरोलॉजी संबंधी लक्षण होते हैं, जो कि कोविड के लक्षणों से पहले भी देखे जा सकते हैं जैसे:-
1.स्वाद या महक न आना :- बीमारी के रूप में स्वाद न महसूस कर पाने को डिस्ग्युज़िया (AGEUSIA) और महक न आने को एनोस्मिया( ANOSMIA) कहते हैं, विडम्बना है कि ये दोनों कोविड के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं।
2. सिरदर्द :- कोविड के लक्षण में सरदर्द भी एक है, जो न्यूरो संबंधी बीमारियों में आम है, और कोविड का संक्रमण से इसकी गंभीरता में इज़ाफ़ा होने का जोखिम है। कोविड संबंधी तनाव, एंग्जायटी, घरों में इतने दिन लगातार रहना, शारीरिक व्यायाम कम करना आदि के कारण भी सरदर्द कि समस्या में इज़ाफ़ा हुआ है। अगर सर दर्द महक और स्वाद न आने की समस्याओं के साथ हो रहा है, या सामान्य से अधिक सरदर्द रह रहा है तो यह कोविड का ही लक्षण हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।
3. स्ट्रोक/ लकवा :- कोविड के गंभीर मरीज़ों में देखा गया है कि उनका खून गाढ़ा हो जाता है जिसके कारण ब्रेन स्ट्रोक की संभावना हो सकती है साथ ही पश्चिमी देशों में युवा मरीज़ों में गंभीर स्ट्रोक देखे गए हैं। अगर किसी को स्ट्रोक लगा है तो उसे तुरंत अस्पताल लेजाना चाहिए क्योंकि स्ट्रोक के मामले में स्ट्रोक लगने के अगले 4.5 घंटों के दौरान उपयुक्त इलाज दिया सकता है। पहले से स्ट्रोक से पीड़ित है तो संबंधित डॉक्टर के संपर्क में रहें, बीपी, शुगर आदि है तो उससे संबंधित दवाइयां नियमित लेते रहें।
स्ट्रोक के सन्दर्भ में उपरोक्त अन्य दो लक्षणों की चर्चा इस नज़रिए से भी ज़रूरी है क्योंकि मस्तिष्क का स्वास्थय और कोविड संक्रमण का प्रभाव दो अलग अलग लेकिन व्यापक विषय हैं जिनपर विस्तार से समझना ज़रूरी है। स्ट्रोक को लेकर पहले से ही जानकारी और जागरूकता का बहुत अभाव है उसपर से कोविड के दौर में इसका जोखिम और भी बढ़ गया है इसलिए बेहतर है संक्रमण से बचाव और मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से बचाव दोनों सुनिश्चित किये जाएं।
स्ट्रोक से बचाव व इलाज के बारे में बता रहे हैं *डॉक्टर राजुल अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजिस्ट, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली :-
स्ट्रोक का इलाज व बचाव समझने के लिए पहले स्ट्रोक को समझना होगा कि स्ट्रोक है क्या? मस्तिष्क की नसों में क्लॉटिंग जमा हो जाने पर मस्तिष्क में ऑक्सीजन व रक्त का संचार रुक जाता है जिसके परिणामस्वरूप न्यूरॉन्स मृत होने लगते हैं और इसी स्थिति को स्ट्रोक कहते हैं जिसमें व्यक्ति मूर्छित हो जाता है, और जिसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं यदि सही समय पर इलाज न शुरू किया जाए।
स्ट्रोक के इलाज का दायरा हरेक रोगी की स्थिति के अनुसार बहुत व्यापक हो सकता है। लेकिन मुख्य रूप से स्ट्रोक लगने पर अगले साढ़े चार घंटे की अवधि अहम होती है, जो आगे के जोखिम और रोग की गंभीरता दोनों को कम करने में मदद करती है। यानी स्ट्रोक दरअसल एक तरह की एक्यूट इमरजेंसी है अर्थात इसमें तत्काल इलाज की बेहद अहम भूमिका होती है। और इन्हीं साढ़े चार घंटों की अवधि के अन्दर संबंधित डॉक्टरों द्वारा रोगी को एक प्रकार का इंजेक्शन दिया जाता है जिसके द्वारा यह यह क्लॉटिंग निकाली जाती है।
यदि इस साढ़े चार घंटे से अधिक देर हो जाने की बात करें तो 6 घंटे की अवधि में एक प्रकार का तार डाल कर नस में जमी इस क्लॉटिंग को निकला जाता है। स्ट्रोक के इलाज में मूल रूप से ये दोनों सर्वोत्तम उपाय हैं। इसलिए बिना देरी के रोगी को तुरंत अस्पताल लेकर जाएँ और जल्द से जल्द इलाज शुरू करें।
• वजन नियंत्रण में रखना चाहिए ।
• नशे की लत से परहेज।
• डायबिटीज़, हृदयरोग, हाइपरटेंशन आदि जैसे रोग जो रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त प्रभाव डालते हों, ऐसे रोगियों को अपना विशेष ख्याल रखना चाहिए।
• किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव या बीमारी को नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
• व्यायाम, आदि करके शरीर को गतिमान रखना, निष्क्रिय होने से बचाना।
• यदि परिवार के एक से अधिक सदस्यों को 60 वर्ष से कम आयु में स्ट्रोक जैसी बीमारी का सामना करना पड़ा है तो विशेष ध्यान दें क्योंकि यह स्ट्रोक के अनुवांशिक होने के भी लक्षण हो सकते हैं। संबंधित डॉक्टर से इस विषय में चर्चा करें और अपनी जानकारी का दायरा बढ़ाएं।