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World Sight Day 2025: आंखों की परेशानी का कारण बन सकती हैं ये 5 आदतें, आज ही जान लें

World Sight Day 2025: हम रोजमर्रा में जाने-अनजाने में कुछ ऐसी आदतों को अपनाते हैं, जिससे आंखों की रोशनी खराब हो (kin aadaton ki wajah se aankh kharab hoti hai) जाती है। आइए डॉ. पुरेंद्र भसीन से जानते हैं उन आदतों के बारे में।

Written By Ashu Kumar Das
Published : October 7, 2025 8:54 PM IST

World Sight Day 2025: उम्र बढ़ने के साथ शरीर के विभिन्न अंगों की तरह ही आंखें भी कमजोर हो जाती हैं। ये बात हम सालों से सुनते और मानते आ रहे हैं। उम्र के साथ आंखों का कमजोर होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकता है। लेकिन कम उम्र में आंखें कमजोर हो जाएं तो उसका कारण क्या है? आंखों के कमजोर होने का एक प्रमुख कारण है, हमारी रोजमर्रा की आदतें। रोजाना में जाने और अनजाने हम ऐसे काम कर जाते हैं, जिससे न सिर्फ आंखों की रोशनी प्रभावित होती है बल्कि आपको पूरी तरह से दिखाई देना भी बंद हो सकता है। वर्ल्ड साइट डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं उन 5 गलतियों के बारे में, जो आंखों की रोशनी को प्रभावित करती हैं।

1. लंबे समय तक स्क्रीन देखना

मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित रतन ज्योति नेत्रालय संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र के संस्थापक और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि आज के समय बड़े से लेकर बच्चे तक दिनभर मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर बिताते हैं। लंबे समय तक बिना थकान के स्क्रीन पर समय बिताने से रेटिना पर अतिरिक्त भार पड़ता है। स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, धुंधलापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है। इससे बचने के लिए हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर किसी चीज देखने की कोशिश करें।

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2. आंखों को रगड़ना

कई लोग थकान या खुजली महसूस होने पर आंखें रगड़ते हैं, लेकिन यह बहुत हानिकारक है। रगड़ने से आंख की बाहरी परत यानी कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे संक्रमण और दृष्टि संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

3. धूप में बिना सनग्लास के निकलना

सूरज की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें सिर्फ त्वचा के लिए नहीं, आंखों के लिए भी हानिकारक होती हैं। लगातार तेज धूप में बिना सनग्लास के निकलने से मोतियाबिंद और रेटिना को नुकसान का खतरा बढ़ता है। इसलिए धूप में बाहर जाते समय UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लास जरूर पहनें।

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4. नींद की कमी और देर रात तक जागना

नींद पूरी न होने से आंखों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इससे आंखों में सूजन, डार्क सर्कल्स और सूखापन बढ़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें ताकि आंखों को पर्याप्त आराम मिल सके।

5. आंखों की नियमित जांच न कराना

कई बार दृष्टि धीरे-धीरे कमजोर होती है और हमें पता भी नहीं चलता जैसे की काला पानी (काला मोतिया) रोग में होता है। नियमित आई चेकअप न कराना एक आम गलती है। साल में कम से कम एक बार नेत्र परीक्षण करवाना चाहिए विशेषकर जिन्हें डायबिटीज है ताकि शुरुआती चरण में ही किसी भी समस्या का पता लग सके।