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World Sight Day 2021: कम उम्र में ही आंखें ना हो जाएं खराब, एक्सपर्ट बता रहे हैं दृष्टि हानि को रोकने के उपाय

14 अक्टूबर को 'वर्ल्ड साइट डे 2021' मनाया जाता है। एम्स के नेशनल ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इंपेयरमेंट सर्वे इंडिया 2015-19 के अनुसार, 50 साल से ऊपर की आयु के 1.99% भारतीय दृष्टिहीनता के शिकार हैं, जबकि संभावित दृष्टिहीनता का शिकार होने वालों की संख्या चिन्ताजनक है।

Written By Anshumala
Updated : October 13, 2021 7:39 PM IST

World Sight Day 2021: कम उम्र में ही आंखें ना हो जाएं खराब, एक्सपर्ट बता रहे हैं दृष्टि हानि को रोकने के उपाय

World Sight Day 2021: दुनिया भर में 14 अक्टूबर को 'वर्ल्ड साइट डे 2021' मनाया जाता है। इस दिन आंखों से संबंधित समस्याओं के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। दुनिया भर में 20 लाख से ज्यादा लोगों आंखों से संबंधित कई समस्याओं से ग्रस्त हैं। सिर्फ भारत में ही लाखों लोग ऐसे हैं, जो प्रिवेंटेबल विजन लॉस (दृष्टिहीनता) के शिकार हैं। एम्स के नेशनल ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इंपेयरमेंट (visual impairment) सर्वे इंडिया 2015-19 के अनुसार, 50 साल से ऊपर की आयु के 1.99% भारतीय दृष्टिहीनता (Blindness) के शिकार हैं, जबकि संभावित दृष्टिहीनता का शिकार होने वालों की संख्या चिन्ताजनक है। इससे भी बड़ी चिन्ता यह है कि जिन कारणों से यह सब होता है, उनका पता आमतौर पर नहीं किया जाता है।

इसका नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में लोग स्थायी दृष्टिहीनता के शिकार हो जाते हैं। इनमें मोतियाबिन्द जैसे कारण शामिल हैं, जो 50 साल या उससे ज्यादा के 66.2% लोगों में दृष्टिहीनता के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा ग्‍लूकोमा (ऑप्टिक नर्व को नुकसान) या रेटिनल बीमारी जैसे उम्र से संबंधित मैकुलर डीजेनरेशन (एएमडी) और डायबिटीक मैकुलर एडिमा (डीएमई) जो व्यक्ति की आंखों के पिछले हिस्से में टिश्यू की परत को प्रभावित करता है। एएमडी और डीएमई दृष्टिहीनता के अग्रणी कारण हैं और दीर्घकालिक तथा प्रगतिशील हैं। दूसरी ओर, बीमारी का जल्दी पता लग जाए और समय पर उपचार किया जाए, तो रेटिनल बीमारियों का प्रभावी प्रबंध किया जा सकता है। इसके अलावा, ग्‍लूकोमा 60 साल और ज्यादा के लोगों में दृष्टिहीनता (How to prevent loss of sight) के मुख्य कारणों में एक है।

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सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्‍स, दिल्‍ली के चेयरमैन डॉ. महिपाल एस. सचदेव ने कहा, “भारत में अब भी ऐसे एक मिलियन लोग हैं, जो मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीन हैं। हालांकि, उनकी आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती थी। इसकी तुलना में, 40 साल या इससे ज्‍यादा उम्र के लोग हैं, जिन्‍हें ग्‍लूकोमा है और जो सही इलाज नहीं मिलने से स्‍थायी रूप से दृष्टिहीन हो जाएंगे। आज के मिलेनियल्‍स को बुरी तरह प्रभावित कर रही एक अन्‍य चिंताजनक बीमारी है डायबिटिक मैक्‍युलर एडीमा (डीएमई), जिसकी पूरी तरह से रोकथाम नहीं की जा सकती। लेकिन, इसकी शुरुआत को नियमित व्‍यायाम, संतुलित आहार और सिस्‍टेमैटिक स्थितियों जैसे डायबिटीज मेलिटस पर सख्‍ती से नियंत्रण और उपचार के अनुपालन से रोका जा सकता है।”

आंखों की बीमारियों का उपचार और प्रबंध

  1. दृष्टिहीनता रोकने के लिए बीमारी का शुरू में ही पता चलना महत्वपूर्ण है। इसके लक्षणों को पहचानना और स्क्रीनिंग करवाना इसे ठीक रखने की कुंजी हो सकती है। उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना और उपलब्ध विकल्पों को समझना और उन पर चर्चा करना, इसे रोकने और आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के प्रमुख कदम में एक हो सकता है।
  2. भारत में जो कुछ विकल्प उपलब्ध हैं, उनमें लेजर फोटो कोएगुलेशन, एंटी-वीईजीएफ (वैस्कुलर एंडोथेलियल ग्रोथ फैक्टर) इंजेक्शन, सर्जरी और काॉम्बिनेशन थेरेपी तथा इनमें लेजर और वीईजीएफ उपचार शामिल है। इन पर विचार करना खासतौर से महत्वपूर्ण है, क्योंकि महामारी के दौरान उपचार के साथ आंखों की नियमित देखभाल में कमी आई है और इस कारण प्रभावित मरीजों में स्वास्थ्य से संबंधित जटिलताएं देखने को मिलीं हैं। इनमें युवा आबादी भी है।
  3. निर्धारित उपचार का सख्ती से अनुपालन और जीवनशैली में अनुसंशित सुधार से व्यक्ति को आंखों की अपनी बीमारियों को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी और इस तरह उन्हें बेहतर परिणाम का लाभ मिल सकता है।

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