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World Rabies Day 2024:रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है जो किसी संक्रमित जानवर के काटने के बाद लोगों में भी फैल सकती है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 59,000 लोगों की रेबीज के कारण मृत्यु हो जाती है। इसीलिए, रेबीज एक बड़ा स्वास्थ्य संकट और चिंता का मुद्दा है। हर साल 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस (World Rabies Day) मनाया जाता है। इस साल की थीम (World Rabies Day 2024 theme) है ब्रेकिंग रेबीज बाउंड्रीज (Breaking Rabies Boundaries)
डॉ. स्वाती राजगोपाल (Dr. Swati Rajagopal, Consultant - Infectious Disease & Travel Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore) कहती हैं कि, रेबीज से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में स्तनपायी जानवर ही हैं। रेबीज के वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालते हैं जिससे बीमारी के लक्षण उभरने के बाद यह 100 फीसदी जानलेवा बन जाता है। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि रेबीज एक गम्भीर बीमारी है। शरीर में एक जगह इंफेक्शन होता है और वहां से रेबीज ब्रेन तक तेजी से फैलने लगता है जिससे न्यूरोलॉजिकल डैमेज बढ़ जाता है। संक्रमण की गम्भीरता को देखते हुए इस संक्रमण के बारे में सही जानकारी होना और इससे बचाव करना बहुत महत्वपूर्ण है।
बुखार (Fever), सिरदर्द ( headache), दर्द ( pain) घाव की जगह पर चुभन या सरसराहट (tingling at the bite site), कमजोरी ( weakness), थकान (fatigue), agitation, और बेचैनी (anxiety) जैसी समस्याएं शुरूआत में दिखायी देती हैं। हालांकि, रेबीज के शुरूआती लक्षणोंको पहचानने में ही सबसे ज्यादा गलती की जाती है और लोगों को लगता है कि यह किसी और बीमारी के लक्षण हैं।
लेकिन, जैसे-जैसे वायरस का प्रभाव बढ़ता है रेबीज के लक्षण भी गम्भीर होने लगते हैं। जैसा कि रेबीज का कोई इलाज नहीं है इसीलिए, इसके लक्षणों को पहचानने और सही समय पर इलाज शुरू करना ही इसका बचाव हो सकता है। इस तरह के किसी भी तरह के लक्षण दिखायी दें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं-
मसल्स मे दर्द और अकड़न (muscle spasms)
खाना या पानी निगलने में दिक्कत(difficulty swallowing)
पक्षाघात ( paralysis)
पानी या हवा से डर लगना ( a fear of water or wind)
डॉ. स्वाती राजगोपाल के अनुसार, रेबीज संक्रमित जानवर की लार, उसकी नाखून की खरोंचो, खुले हुए घाव और उस जानवर द्वारा काटे जाने के कारण फैलता है। ज्यादातर मामलों में हवा में फैले वायरस भी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और संक्रमण फैलाते हैं। आमतौर पर इस तरह का संक्रमण चमगादड़ों से फैलता है। पालतू कुत्ते, चमगादड़ और रैकून जैसे जानवरों से फैलते हैं। संक्रमित और जंगली जानवरों के सम्पर्क में आने से भी रेबीज फैलता है।
अगर किसी को कुत्ते ने काट लिया है तो सबसे पहले घाव वाली जगह को साबुन और पानी से 15-20 मिनट तक साफ करें। इंफेक्शन का रिस्क कम करने के लिए एंटीसेप्टिक सोल्यूशन लगाएं।
कुत्ते को वैक्सीन्स लगवायी गयीं हैं या नहीं इसके बावजूग आप पीड़ित व्यक्ति के वैक्सीनेशन हिस्ट्री का पता करें। रेविज और इम्यूनोग्लोब्यूलिन वैक्सीन्स के अलावा टेटनस का टीका और घाव की सही तरीके से देखभाल करना बहुत जरूरी है।
इस बात का पूरा ध्यान रखें कि कुत्ते में रेबीज के लक्षण दिखायी दें तो तुरंत ही नगर पालिया और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सूचित करें। अगर जानवर आपके आसपास रहता है या आपका पालतू है तो अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जल्द से जल्द ये काम करें।
वैक्सीनेशन या टीकाकरण रेबीज से बचाव का सबसे अच्छा औऱ कारगर उपाय है। सभी कुत्तों, बिल्लियों और पालतू जानवरो को रेबीज का टीका लगवाएं।
संक्रमित जानवरों के आसपास ना जाएं।
आवारा कुत्तों को छूने या उनके पास जाने से बचें।