World Psoriasis Day 2021: सोरायसिस के एक तिहाई रोगियों को डिप्रेशन, एंग्जायटी होने की संभावना, जानें इसका एडवांस उपचार
सोरायसिस त्वचा का एक स्थायी ऑटोइम्यून रोग है, जिससे लगभग 25 मिलियन भारतीय पीड़ित हैं। यह एक गंभीर रोग है, जिसमें इंफ्लेमेशन होने के साथ ही यह कई कोमोरबिडिटी से जुड़ा है होता जैसे सोरायटिक अर्थराइटिस, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डायबीटीज आदि।
World Psoriasis Day 2021: 29 अक्टूबर को 'वर्ल्ड सोरायसिस डे 2021' होता है। सोरायसिस (Psoriasis) एक स्थायी और स्व-प्रतिरक्षित (ऑटोइम्यून) डिजीज है, जिससे लगभग 25 मिलियन भारतीय पीड़ित हैं। यह रोग त्वचा को प्रभावित करता है। इसमें इंफ्लेमेशन, त्वचा पर लालिमा, खुजली आदि होती है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए या इसका उपचार न हो, तो स्थिति ज्यादा बुरी हो सकती है। इसके लक्षणों (Psoriasis symptoms) को पहचानना आसान है और एक आसान शारीरिक जांच के जरिए से इसका निदान हो सकता है। हालांकि, अधिकतर लोग इसे सिर्फ त्वचा की एक समस्या (Skin Disease) मानकर, इससे जुड़ी परेशानियों की गंभीरता पर जानकारी कम रखते हैं। 'वर्ल्ड सोरायसिस डे 2021' पर शाइन एंड स्माइल डेंटल एंड स्किन क्लिनिक (दिल्ली) में डर्मटोलॉजिस्ट डॉ. सोनी नंदा त्वचा से संबंधित इस गंभीर बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे रही हैं....
सोरायसिस डे की थीम यूनाइटेड’ (World Psoriasis Day 2021 Theme)
'वर्ल्ड सोरायसिस डे' के लिए इस साल की थीम है यूनाइटेड’ (Time to be United), जो सोरायसिस के रोगियों से जुड़ने और उन्हें सहयोग देने की जरूरत पर जोर देता है। यह इस रोग से पीड़ित व्यक्ति और जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी संयुक्त सामुदायिक प्रयासों और नीति-निर्माताओं तक पहुंचने पर केंद्रित है।
सोरायसिस डे का महत्व
यह दिन सोरायसिस और सोरायटिक अर्थराइटिस पर जानकारियों से युक्त और मायने रखने वाली बातचीत बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आता है। बातचीत से मौजूदा गलत-फहमियां दूर हो सकती हैं। यह पता लगाया जा सकता है कि रोगी सोरायसिस को किस प्रकार प्रभावी ढंग से मैनेज कर सकते हैं और जीवन की समृद्ध गुणवत्ता का फायदा ले सकते हैं।
सोरायसिस में नजर आने वाले लक्षण (Psoriasis symptoms)
सोरायसिस में इंफ्लेमेशन का संकेत मिलता है और इसके हल्के प्रभाव में भी बहुत प्रदाह (Inflammation) होता है। इसे कई कोमोरबिडिटी से भी जोड़ा जाता है। सबसे आम यह है कि सोरायसिस के 3 में से 1 रोगी को सोरियाटिक अर्थराइटिस हो जाता है, जो इम्यून सिस्टम से जुड़ा एक अन्य स्थायी रोग है। इसमें जोड़ों और उनके आस-पास की जगहों में सूजन, अकड़न और दर्द होता है। अगर इसका उपचार न हो, तो इससे छह माह से भी कम समय में जोड़ों को स्थायी क्षति हो सकती है।
सोरायसिस के एक तिहाई रोगियों को मनोवैज्ञानिक रोग होने की संभावना
इस रोग से जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जैसे सामाजिक रूप से अलग-थलग होना, संबंध बिगड़ना, काम से गैरहाजिरी, आत्म–सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचना। सोरायसिस के लगभग एक-तिहाई रोगियों को मनोवैज्ञानिक रोग हो जाते हैं, जैसे डिप्रेशन, एंग्जायटी, जिससे रोग और भी बढ़ जाता है।
सोरायसिस से लगभग 7% आबादी प्रभावित
सोरायसिस से लगभग 7 % आबादी प्रभावित है। चूंकि, इसके लक्षण दिखाई देते हैं, इसलिए इसके रोगी अक्सर रोजाना की कई समस्याएं बताते हैं, जैसे यह रोग संक्रामक है और ठीक नहीं हो सकता। इसमें किस तरह के कपड़े पहने जाएं, इसकी भी चिंता रहती है। सोरायसिस का पलटकर या बार-बार होना एक अन्य समस्या है, जो तनाव जैसी छोटी-सी चेतावनी से बढ़ सकती है। उपचार से सुधार ना हो, तो लोगों में डिप्रेशन हो जाता है।
सोरायसिस रोग का उपचार (Treatment of Psoriasis in Hindi)
पिछले दशक में सोरायसिस जैसे स्व-प्रतिरक्षी रोग के उपचार में बड़ा विकास हुआ है। आमतौर पर इसका उपचार इंफ्लेमेशन, चकत्ते और धब्बे कम करने और इस रोग का कारण बनने वाली त्वचा की कोशिकाओं की वृद्धि को कम करने के लक्ष्य से होता है। इनमें सामयिक उपचार (त्वचा पर क्रीम और ऑइंटमेंट लगाना), फोटोथेरेपी (लाइट थेरेपी), ओरल सिस्टेमिक ट्रीटमेंट्स (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स) और उन्नत उपचार विकल्प, जैसे बायोलॉजिक्स शामिल होते हैं। बायोलॉजिक्स जीवित कोशिकाओं से बनी और इंजेक्शन या आईवी इंफ्युजन द्वारा दी जाने वाली दवाओं की एक नई श्रेणी है। बायोलॉजिक्स रोगी के प्रतिरक्षी तंत्र में उन खास प्रोटीन्स को टारगेट करते हैं, जिनकी सोरियाटिक रोग में भूमिका होती है। यह सुरक्षित और प्रभावी उपचार विकल्प हैं, खासकर मध्यम से लेकर गंभीर सोरायसिस और सोरियाटिक अर्थराइटिस से ग्रस्त मरीजों के लिए।