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29 अक्टूबर को ''वर्ल्ड सोरायसिस डे'' मनाया जाता है। इस वर्ष का थीम है ''ट्रीट सोरायसिस सीरियसली''। सोरायसिस एक प्रकार का चर्म रोग है, जो वंशानुगत बीमारी है। सोरायसिस होने पर त्वचा की ऊपरी सतह पर मोटी सी परत बन जाती है। वैसे, ये दूसरी कई वजहों से भी भी हो सकता है। इसमें त्वचा पर लाल रंग की सतह उभर जाती है, जो स्कैल्प, हाथ-पैर, हाथ की हथेलियों, पांव के तलवों, कोहनी, घुटनों और पीठ पर सबसे ज्यादा होती है। अनुवांशिकता के अलावा यह पर्यावरण कारणों से भी होता है। इसमें त्वचा पर लाल दाग पड़ते हैं, जिसमें बहुत खुजली भी होती है। इसे भी पढ़ें- कहीं आप भी तो नहीं पहनते बिना धोए नए कपड़े, हो सकती हैं ये समस्याएं
कैसे होता है सोरायसिस
अनुमानत: भारत में लगभग 1-2 प्रतिशत लोग ही सोरायसिस से पीड़ित हैं। शरीर में अक्सर बदलाव होते रहते हैं, जिसे हम आसानी से समझ नहीं पाते। जिस तरह नाखून और बाल बढ़ते हैं ठीक उसी तरह त्वचा में भी परिवर्तन होते हैं। जब नई त्वचा बनती है, तो उस दौरान शरीर के एक हिस्से में नई त्वचा 3-4 दिन में ही बदल जाती है यानी सोरायसिस के दौरान त्वचा इतनी कमजोर और हल्की पड़ जाती है कि यह पूरी बनने से पहले ही खराब हो जाती है। इस कारण सोरायसिस की जगह पर लाल चकते और रक्त की बूंदें दिखाई पड़ने लगती हैं। वैसे तो इसका उपचार संभव है, लेकिन घरेलू नुस्खों से भी आप इसे बढ़ने से रोक सकते हैं।
केले के छिलके से करें इलाज
केले के छिलके में एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल मौजूद होते हैं, जो त्वचा को फोड़े-फुंसियों, सूरज की तेज किरणों से बचाते हैं। इसमें एस्टरीकृत फैटी एसिड होता है, जो एग्जिमा और सोरायसिस का इलाज भी करता है। इसे भी पढ़ें- मानसून में फंगल इंफेक्शन से बचना है, तो करें इस तरह पैरों की देखभाल
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केले के छिलके से हो सकता है सोरायसिस का घरेलू इलाज। © Shutterstock[/caption]
छिलके का उपयोग
त्वचा रोगों जैसे सोरायसिस से छुटकारा पाने के लिए केले के छिलके के साथ तारकोल मिला कर एक पेस्ट बनाया जा सकता है। पेस्ट बनाने के लिए कुछ केले के छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दें। फिर इसे ब्लेंडर में पीस लें। अब इसमें तारकोल मिला दें। इस पेस्ट को प्रभावित त्वचा पर लगाएं। हल्के हाथों से रगड़ें। 30 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। तारकोल प्राकृतिक कोयले से मिलता है। यह सिर्फ सोरायसिस के लिए ही नहीं बल्कि त्वचा की अन्य समस्याओं के इलाज के लिए भी उपयोगी होता है। जर्नल ऑफ डर्मटोलॉजिकल ट्रीटमेंट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, तारकोल और केले के छिलके सोरायसिस के इलाज के लिए बेहतर तरीके से काम करते हैं।
छिलका ही काफी है
केले का छोटा टुकड़ा और छिलके के पीछे के हिस्से को प्रभावित त्वचा पर रगड़ें। इसे तब तक रगड़ें जब तक आपकी त्वचा भूरे रंग की न हो जाए। इसे 30 मिनट के लिए छोड़ दें। सुबह चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। इसे घरेलू नुस्खों को लगातार कुछ दिनों तक ट्राई करें, सोरायसिस की समस्या दूर हो जाएगी।
खाने से भी होता है लाभ
छिलके का सेवन करने से भी आराम मिलता है। केले के छिलके को नियमित रूप से खाएं। आप फल को छिलके के साथ या सिर्फ छिलके को भी खा सकते हैं। यह आपकी खाने की इच्छा पर निर्भर करता है।