World Preeclampsia Day 2020 : प्रीएक्लेम्प्सिया गर्भ में पल रहे शिशु और मां के लिए है खतरनाक, जानें कंट्रोल करने के घरेलू उपाय

प्रीएक्लेम्प्सिया (Preeclampsia)  गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों के लिए ही खतरनाक होता है। इससे ग्रस्त महिलाओं में शिशु को सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंचता। इसका दुष्प्रभाव गर्भवती महिलाओं की लीवर, किडनी और मस्तिष्क पर भी पड़ता है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 22, 2020 1:38 PM IST

World Preeclampsia Day 2020 : प्रीएक्लेम्प्सिया (Preeclampsia) गर्भावस्था का आधा चरण पार करने के बाद बाद या फिर शिशु के जन्म के कुछ समय बाद होता है। गर्भावस्था के 20 सप्ताह बाद इस बीमारी के बढ़ने की संभावना अधिक होती है। हाई ब्लड प्रेशर और यूरिन में अधिक मात्रा में प्रोटीन का शामिल होना, प्रीएक्लेम्प्सिया के प्रमुख लक्षण हैं। कुछ आंकड़ों के मुताबिक, भारत में (Preeclampsia in India) आठ से 10 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं प्रीएक्लेम्प्सिया से (World Preeclampsia Day 2020) प्रभावित होती हैं।

इस स्थिति में होने वाला हाई ब्लड प्रेशर सामान्य तौर पर होने वाले हाई ब्लड प्रेशर से बिल्कुल अलग होता है, जो प्रसव के बाद अपने आप ठीक हो जाता है। ये जरूरी नहीं है कि सभी गर्भवती महिलाओं में प्रीएक्लेम्प्सिया के लक्षण (Symptoms of Preeclampsia)) मौजूद हों। उन महिलाओं में इसके लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं, जिन्हें  ब्लड प्रेशर की समस्या होती है। ब्लड प्रेशर की ये समस्या गर्भावस्था में बढ़ जाती है, जो प्रीएक्लेम्प्सिया (Preeclampsia) का रूप ले लेती है।

प्रीएक्लेम्प्सिया कैसे हो सकता है खतरनाक? (How can Preeclampsia be Dangerous)

प्रीएक्लेम्प्सिया (Preeclampsia)  गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों के लिए ही खतरनाक होता है। इससे ग्रस्त महिलाओं में शिशु को सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंचता। इसका दुष्प्रभाव गर्भवती महिलाओं की लीवर, किडनी और मस्तिष्क पर भी पड़ता है। इसके कारणों का पता लगाने में अब तक विशेषज्ञ सफल नहीं हुए हैं। आम धारणा है कि प्लेसेंटा में रक्त का उचित तरीके से संचालन नहीं होने से यह समस्या होती है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा, गर्भाशय की दीवारों में स्थित रक्त वाहिकाओं के साथ सामान्य नेटवर्क विकसित नहीं कर पाता है, जो प्रीएक्लेम्प्सिया में बदल जाता है।

घरेलू उपाय से कर सकते हैं कंट्रोल (How to Control Preeclampsia)

आराम है जरूरी - अगर आप ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रही हैं, तो गर्भावस्था की स्थिती में अधिक से अधिक आराम करें। इस दौरान ज्यादा काम ना करें। इसके साथ स्ट्रेस कम लें। इस दौरान दिन में भी सोने की कोशिश करें।

अधिक पानी का करें सेवन -प्रीएक्लेम्प्सिया की समस्या से बचने के लिए दिन में कम से कम 6 से 8 गिलास पानी पिएं। पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

ऑयली खाने से रहें दूर - इस समस्या से बचाव के लिए तैलीय पदार्थों का सेवन कम करें। बाहर का खाना खाने से बचें।

वजन प्रबंधन - गर्भावस्था में महिलाओं का वजन बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। गर्भावस्था में वजन प्रबंधित करके प्रीएक्लेम्प्सिया से बचा जा सकता है। अपने वजन की जांच हर पंद्रह दिन में करती रहें।

कम लें एस्पिरिन -अगर आप दूसरी बार गर्भवती हो रही हैं और आपको पहली बार यह समस्या हो चुकी है, तो सतर्क रहें। एस्पिरिन कम लें। इसे पहले और दूसरे महीने में ना लें। इसकी मात्रा 60 और 81 मिलीग्राम तक ही हो।

यूरीन ना रोकें - गर्भावस्था में यूरीन कभी ना रोकें। हमेशा अधिक से अधिक पानी पिएं और समय-समय पर यूरीन जाकर मूत्राशय को खाली करत रहें।

ढीले कपड़े पहनें - हमेशा खाली पैर रहें या हल्के स्लीपर पहनें। जूते जरूरत के वक्त ही पहनें। हमेशा ढीले-ढाले कपड़े पहनें।

धूम्रपान ना करें - अगर आप स्मोकिंग करती हैं, तो गर्भावस्था में स्मोकिंग करना बंद कर दें। इससे अगर प्रीएक्लेम्प्सिया नहीं है, तो भी इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है।

World Preeclampsia Day 2020: खतरनाक हो सकता है गर्भावस्था में प्रीएक्लेम्प्सिया रोग, जानें इसके कारण, लक्षण, उपचार

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