
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : November 12, 2025 5:45 PM IST
What is Pneumonia: निमोनिया ऐसी बीमारी है जिसके बारे में हर कोई जानता है लेकिन अधिकतर लोगों के सिर्फ यही लगता है कि निमोनिया फेफड़ों की बीमारी है। जबकि ऐसा नहीं है बल्कि यह शरीर की किसी भी कार्य प्रणाली को प्रभावित कर सकता है और इसलिए इसके कारण जिसमें थकान, मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द और सुस्ती जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऑर्थोपेडिक, पल्मोनोलॉजी और पीडियाट्रिक विशेषज्ञों का मानना है कि निमोनिया और अन्य मौसमी संक्रमणों का असर हर आयु वर्ग पर अलग-अलग रूप में दिखाई देता है। वयस्कों में यह जोड़ों और मांसपेशियों की कमजोरी बढ़ा सकता है, बच्चों में सांस संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है, जबकि बुजुर्गों में यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। यही कारण है कि समय पर पहचान, उचित इलाज, पौष्टिक आहार और रोकथाम के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।
निमोनिया के लक्षण अक्सर शुरुआत में सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसके संकेत गंभीर रूप लेने लगते हैं। लगातार तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी के साथ पीला या हरा कफ आना, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई मरीजों को सांस फूलने या ऑक्सीजन की कमी के कारण चक्कर या बेचैनी भी महसूस होती है। बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण कभी-कभी अलग रूप में दिखते हैं जैसे सुस्ती, भूख में कमी या अचानक सांस तेज हो जाना। अगर ये लक्षण दो-तीन दिन से ज्यादा बने रहें, तो इसे सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा, सीनियर कंसल्टेंट, आर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली ने बताया कि, “निमोनिया या किसी भी मौसमी संक्रमण के बाद शरीर में सूजन और थकान लंबे समय तक रह सकती है। यह स्थिति जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द या जकड़न पैदा कर सकती है, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है। कमजोर इम्यूनिटी और लंबे समय तक बेड रेस्ट हड्डियों को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए संक्रमण के बाद हल्की एक्सरसाइज, फिजिकल थेरेपी, हाइड्रेशन और प्रोटीन से भरपूर आहार बेहद जरूरी है, ताकि शरीर जल्दी ठीक हो सके और जोड़ों पर दोबारा असर न पड़े।”
डॉ. तान्या चतुर्वेदी, अटेंडिंग कंसलटेंट पीडियाट्रिक्स, रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर ने बताया कि “बच्चों में निमोनिया का खतरा वयस्कों की तुलना में ज्यादा होता है और इसलिए सर्दियों में बच्चों में निमोनिया के मामले अधिक देखे जाते हैं क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता। यह संक्रमण अक्सर सर्दी-खांसी से शुरू होकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है, जिससे बुखार, सांस की तकलीफ और सुस्ती जैसे लक्षण होते हैं। माता-पिता को चाहिए कि बच्चे को पर्याप्त आराम, पौष्टिक आहार और तरल पदार्थ दें। किसी भी गंभीर लक्षण पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें, ताकि समय पर इलाज और वैक्सीन से बच्चे की सुरक्षा की जा सके।”
डॉ. संदीप काटयार, सीनियर कंसल्टेंट पल्मनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर ने बताया कि,“निमोनिया को अक्सर लोग सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं, जबकि यह फेफड़ों में संक्रमण की गंभीर स्थिति होती है। इससे सांस लेने में कठिनाई, थकान, ऑक्सीजन की कमी और कमजोरी हो सकती है। कई मरीजों में पोस्ट-वायरल थकान लंबे समय तक बनी रहती है। समय पर जांच, दवा का पूरा कोर्स और संतुलित आहार बेहद जरूरी है ताकि संक्रमण दोबारा न लौटे और फेफड़ों की कार्यक्षमता सुरक्षित रहे।”
निमोनिया केवल सर्दियों की आम सर्दी नहीं, बल्कि एक गंभीर संक्रमण है जो शरीर की संपूर्ण कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। यह फेफड़ों से शुरू होकर मांसपेशियों, जोड़ों और प्रतिरोधक क्षमता तक असर डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी रोकथाम समय पर पहचान, पर्याप्त आराम, पौष्टिक आहार, स्वच्छता और वैक्सीन से संभव है। मौसमी संक्रमणों को हल्के में लेना भविष्य में बड़ी जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए ठंड के मौसम में शरीर की देखभाल, हाइड्रेशन और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है, क्योंकि सावधानी ही सबसे अच्छी सुरक्षा है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।