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'विश्व निमोनिया दिवस 2020' (World Pneumonia Day 2020 in hindi) प्रत्येक वर्ष 12 नवंबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। 12 नवंबर 2009 को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा इस दिन की शुरुआत की गई थी। निमोनिया (Pneumonia problem) एक गंभीर श्वसन रोग (Severe respiratory disease) है, जो फेफड़ों में संक्रमण (Lung Infection) का कारण बनता है। जब निमोनिया होता है, तो फेफड़े फूल जाते हैं और कभी-कभी पानी भी भर जाता है। निमोनिया दुनिया भर में बच्चों का संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में प्रमुख कारक है, जिससे प्रत्येक 39 सेकंड में एक बच्चे की मौत हो जाती है। फिर भी निमोनिया के खतरों को नजरअंदाज किया जाता है। 'विश्व निमोनिया दिवस 2020' (World Pneumonia Day 2020 in hindi) पर जानते हैं, निमोनिया क्या है, इसके लक्षण और बचाव के घरेलू उपायों के बारे में यहां....
न्यूमोनिया एक माइक्रोबियल इंफेक्शन होता है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह बैक्टीरिया और फंगस जैसे माइक्रोब्स के कारण होता है। इससे फेफड़ों में सूजन हो जाती है। निमोनिया का प्रमुख कारण (Causes of pneumonia) स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया (Steptococcus pneumonia) नाम का एक बैक्टीरिया होता है, जो हमारे फेफड़ों को इन्फेक्टेड करके हमारी श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। इसका इलाज समय रहते ना करवाया जाए, तो इसमें जान भी जा सकती है। आजकल वैसे भी कोरोना काल में कोरोना से संक्रमित होने पर निमोनिया होना बेहद घातक हो सकता है। मौसम में बदलाव के कारण भी निमोनिया हो सकता है। बदलते मौसम के साथ पर्यावरण और हमारे शरीर का तापमान बदल जाता है। ठंडा रहने, ठंडी चीजों को खाने या पीने से भी निमोनिया हो सकता है।
लगातार सूखी खांसी (Dry cough) आना इसका मुख्य लक्षण है।
तेज बुखार, बच्चों को ठंड भी लगती है।
चूंकि यह एक इन्फ्लेमेटरी डिजीज है, ऐसे में रोगाणु फेफड़ों के वायु छिद्रों पर हमला बोलते हैं। जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती है, सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
सीने में दर्द महसूस होना।
सांस लेने में तकलीफ होने से दिमाग को सही ढंग से ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिससे मतिभ्रम हो सकता है।
बुखार होने पर ठंड लगने के साथ पसीना भी आ सकता है।
एनर्जी लेवल कम और थकान महसूस करना।
सिरदर्द, अधिक प्यास लगना।
अधिक पसीना और पेशाब लगना।
मुंह और आंखों का ड्राई होना।
फेफड़ों में सूजन, पल्स का बढ़ना।
बलगम के साथ खून आना।
खाना ना खाने से कमजोरी होना।
बुखार या सर्दी लगने के बाद निमोनिया होता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों में निमोनिया होने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि इनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है।
कुछ बच्चों में निमोनिया बहुत गंभीर हो जाता है। इसके लिए उनका इलाज हॉस्पिटल में कराने की जरूरत होती है। जब बच्चों में आपको निम्न लक्षण नजर आएं, तो हॉस्पिटल जरूर जाएं...
1 जब बच्चा बहुत जल्दी-जल्दी सांसें ले रहा हो।
2 एक दिन में रोज की मात्रा की तुलना में जब बच्चा कम लिक्विड का सेवन किया हो।
3 सांस फूलने की समस्या नजर आए। खासकर जब सांस लेते समय भारी या सीटी बजने की आवाज आए।
4 जब बच्चे का होठ और नाखून नीले पड़ जाएं।
1 निमोनिया के दौरान सब्जियों का रस का सेवन अधिक करें। इसमें गाजर, पालक, चुकंदर, खीरे का रस और अन्य सब्जियों का रस पीना आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
2 खांसी को ठीक करने के लिए एक गिलास पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर गरारे करें। इसकी मदद से आपके गले में मौजूद बलगम और जलन कम हो जाएगी।
3 एक कप कॉफी लेने से सांस की तकलीफ दूर होती है।
Home Remedies for Pneumonia: क्या है निमोनिया, इसके लक्षण और घरेलू उपचार