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Written By: Kishori Mishra | Updated : April 11, 2020 2:04 PM IST
Older people appear to have fewer antibodies against SARS-CoV-2.
दुनिया भर में पार्किंसंस रोग (Parkinson's Disease in Hindi) के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 11 अप्रैल को 'वर्ल्ड पार्किंसंस डे 2020' (World Parkinson's Day 2020) जाता है। पर्किंसंस रोग नर्वस सिस्टम में धीरे-धीरे बढ़ने वाला एक डिसऑर्डर है, जिससे पूरे शरीर की गतिविधि प्रभावित होती है। इसके लक्षणों में कंपकंपी, धीमी गतिविधि, सख्त मांसपेशियां, शरीर की असाधारण मुद्रा और संतुलन, स्वाभाविक गतिविधियों पर विराम, बोली में बदलाव, लिखावट में बदलाव आदि शामिल हैं। सभी रोगियों में इसके लक्षण अलग-अलग नजर आते हैं। अक्सर इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें अपनी डाइट में क्या शामिल करना चाहिए।
पार्किंसंस बीमारी में कुछ भी खाने से इसके लक्षणों में इजाफा हो सकता है। चूंकि, यह नर्वस सिस्टम से संबंधित एक डिसऑर्डर है, ऐसे में पार्किंसंस के रोगियों को अपनी डाइट में उन चीजों को अधिक शामिल करना चाहिए जो मस्तिष्क की सेहत को बूस्ट रखें। इसके लिए आप किसी डाइटिशियन से सलाह ले सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पार्किंसंस डिजीज (World Parkinson's Day) के बारे में लोगों को कम जानकारी है, इसलिए यह हेल्थकेयर के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है। आज हम आपको वर्ल्ड पार्किंसंस डे 2020 (World Parkinson's Day 2020) के मौके पर इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपको जानना बहुत ही जरूरी है।
पार्किंसंस के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग देखने को मिलते हैं। कंपकंपी, धीमी गतिविधि, स्वाभाविक गतिविधियों पर विराम, बोली में बदलाव, सख्त मांसपेशियां, शरीर की असाधारण मुद्रा और संतुलन, लिखावट में बदलाव आदि इसके कुछ आम लक्षण हैं। पार्किंसंस डिजीज में जुबान धीमी या अस्पष्ट होने लगती है। रोग बढ़ने के साथ ही ये लक्षण बदतर होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
पार्किंसस डिजी का कारण मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं का टूटना या फिर मरना होता है। जब दिमाग की तंत्रिका कोशिका काम करना बंद कर देती हैं, तो इसके परिणाम स्वरूप पार्किंसंस डिजीज हो सकता है। दिमाग में डोपामाइन तत्व की कमी और रासायनिक तत्वों का उत्पादन करने वाले न्यूरॉन्स में किसी तरह की खराबी के कारण पार्किंसंस डिजीज होता है। मस्तिष्क में डोपामाइन की कमी के कारण स्लो मूवमेंट होने लगता है। इसके अलावा आनुवंशिक परिवर्तन के कारण भी पार्किंसंस होता है। वहीं, विषैले पदार्थों के संपर्क में आने की वजह से भी पार्किंसंस हो सकता है।
ऐसी बीमारी होने का मुख्य कारण खराब जीवनशैली होती है, जिसमें से सबसे अहम आहार होता है। गलत आहार के कारण पार्किंसंस होने की संभावना बढ़ती है। जंक फूड्स, पैकेज्ड फूड्स, प्रोसेस्ड और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसी चीजों के कारण पार्किंसंस होने का खतरा होता है। इसके अलावा एक्सरसाइज ना करना, नींद की कमी, अधिक स्ट्रेस होना और एल्कोहल की मात्रा अधिक लेने से पार्किंसंस होने का खतरा बढ़ता है। अल्जाइमर और पार्किंसंस लगभग एक जैसी बीमारी है। अगर आपकी फैमिली में किसी को किसी पार्किंसंस है, तो इसका खतरा आपको अधिक होता है। इसलिए इससे बचने के लिए अपनी जीवनशैली को स्वस्थ रखें।
पार्किंसस के खतरे को कम करने के लिए जंग फूड्स की जगह फल, प्रोटीनयुक्त भोजन, पत्तेदार हरी सब्जियां, विटामिन्स, एंटीऑक्सिडेंट जैसे पदार्थों का सेवन करें। मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। मस्तिष्क स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए अखरोट, काजू और अन्य नट्स को भी खाना जरूरी है। इसके अलावा बेरीज खाएं, क्योंकि इसमें फायदेमंद एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। इससे पार्किंसंस रोग का खतरा कम होता है।
रोजाना व्यायाम करें। नियमित रूप से व्यायाम करने वाले लोगों में पार्किंसंस होने का खतरा कम होता है। शरीर को एक्टिव करने से ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, जिससे मस्तिष्क में भी रक्त का प्रवाह अच्छा होता है। इससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ता है, जो हमारे मस्तिष्क के जैव रासायनिक परिवर्तनों को ट्रिगर करता है।
पार्किंसंस रोग को मैनेज करने के लिए मरीज डाइट में जरूर करें ये चीजें शामिल
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