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हड्डियां पड़ रही कमजोर तो सावधान! डॉक्टर ने बताया इस बीमारी को इग्नोर किया तो बढ़ सकता है बोन फ्रैक्चर का खतरा

Osteoporosis remedies: हड्डियों का कमजोर पड़ना न सिर्फ बोन फ्रैक्चर के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि साथ ही साथ ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों होने के खतरे को भी बढ़ाती हैं। विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के मौके पर डॉक्टर से लें कुछ जरूरी सुझाव।

हड्डियां पड़ रही कमजोर तो सावधान! डॉक्टर ने बताया इस बीमारी को इग्नोर किया तो बढ़ सकता है बोन फ्रैक्चर का खतरा

Written by Mukesh Sharma |Updated : October 20, 2023 12:14 PM IST

Risk factor of osteoporosis: शरीर की हड्डियां कमजोर होने के पीछे का कारण सिर्फ खानपान में कमी नहीं होता है बल्कि कई बार किसी गंभीर बीमारी से उबरने के बाद भी मरीजों में हड्डियां कमजोर होने की समस्या देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, सिर्फ बीमारियां ही नहीं बल्कि कुछ प्रकार के ट्रीटमेंट भी हैं जिनके कारण हड्डियों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनमें आमतौर पर कीमोथेरेपी, कोविड उपचार के दौरान स्टेरॉयड का उपयोग आदि शामिल है। परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस होना,गतिहीन जीवनशैली और धूम्रपान जैसे कुछ फैक्टर भी हड्डियों में कमजोरी का कारण बन सकते हैं। ज्यादातर 18-40 की उम्र के मरीजों में हड्डियां कमजोर होने की शिकायत रहती हैं। प्रतिदिन अस्पताल के ओपीडी में 4-5 मरीज इस बीमारी से पीड़ित आते हैं। लगभग 30 से 40 प्रतिशत युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या दिखाई देती हैं। विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के मौके पर अपोलो स्पेक्ट्रा दिल्ली में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर गौरव खेरा ने हड्डियों की बीमारी से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां दी।

बोन मिनरल डेंसिटी की कमी

शरीर में होने वाली अलग-अलग प्रकार की बीमारियों को रोकने के लिए हड्डियों का मजबूत होना भी बहुत जरूरी है। ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में आमतौर पर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) के नुकसान, हड्डियों में घनत्व कमी, गतिहीनता, सूजन और कंकाल की नाजुकता से जुड़ी होती है, जिससे रीढ़, कूल्हे या कलाई में फ्रैक्चर होता है। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है, जिसका निदान आमतौर पर नजरअंदाज हो जाता है। विशेष रूप से बुजुर्गों में हड्डियों की कमजोरी की समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं। बोन मिनरल डेंसिटी एक ऐसा टेस्ट है, जो हड्डियों की मजबूती को पता लगाने में मदद करता है। इस टेस्ट से पता चलता है कि आपकी हड्डियां सामान्य हैं, ऑस्टियोपीनिया (कमजोर हड्डियां) या ऑस्टियोपोरोसिस (कमजोर हड्डियां जिनमें फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है) एकल ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर आपके दूसरे ऐसे फ्रैक्चर के जोखिम को 50% तक बढ़ा देता है। शरीर में कहीं भी दो ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर से तीसरे फ्रैक्चर का खतरा 80% बढ़ जाता है।

बोन डेंसिटी कम ऑस्टियोपोरोसिस

डॉक्टर गौरव खेरा ने बताया कि जिन लोगों को बोन डेंसिटी कम होती है, उसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि वे ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त हैं। कुछ प्रकार के दवाएं, रजोनिवृत्ति, वृद्धावस्था और शरीर का वजन ज्यादा बढ़ना आदि शरीर की हड्डियों की डेंसिटी को कम कर सकता है, लेकिन भविष्य में इन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कम बोन डेंसिटी और ऑस्टियोपोरोसिस विकसित होने की अधिक संभावना होती है। महिलाओं का बोन डेंसिटी कम होता है और क्योंकि रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल परिवर्तन के कारण हड्डियों के द्रव्यमान तेजी से कम होने लगता है। खान पान संबंधी विकार, कीमोथेरेपी, स्टेरॉयड, ऑस्टियोपोरोसिस का पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान और शराब पीने से भी कम अस्थि घनत्व और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। हम लगभग 18-40 उम्र के युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बढ़ते देख रहे हैं। क्योंकि उन्हें धूप में कम रहना, घर से काम करना, गतिहीन जीवन शैली, तनाव, शराब पीना और धूम्रपान करना पड़ता है।

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लाइफस्टाइल के बदलाव और ऑस्टियोपोरोसिस

जीवनशैली में कुछ बदलाव हड्डियों के डैमेज के जोखिम को कम करते हैं। व्यायाम करने से हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। पैदल चलना, लंबी पैदल यात्रा और डांसिंग आदि फिजिकल एक्टिविटी काफी अच्छा विकल्प है। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए हल्के वजन या इलास्टिक बैंड वाले व्यायाम चुनें। विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें। कैल्शियम की अपनी दैनिक खुराक दूध, डेयरी उत्पादों, हरी सब्जियों और सोयाबीन से प्राप्त करें। विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं जैसे सार्डिन, सैल्मन और अंडे आदि। रोजाना सुबह की धूप के संपर्क में आएं, जिससे आपके शरीर को विटामिन डी मिलेगा। साथ ही डॉक्टर की सलाह से आप कैल्शियम व विटामिन डी सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने वाली कई दवाएं व सप्लीमेंट्स डी डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिए जा सकते हैं।