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Written By: Yogita Yadav | Updated : October 20, 2019 5:29 PM IST
महिलाओं में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। माहवारी, गर्भावस्था और मेनोपॉज तक उनके शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। जिसका असर बोन हेल्थ पर भी पड़ता है। © Shutterstock
बोन हेल्थ पूरे शरीर की सक्रियता और स्वास्थ्य के लिए अपरिहार्य है। इसके प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ओस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है। ओस्टियोपोरोसिस हड्डियों का एक गंभीर रोग है। जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे इतनी कमजोर हो जाती हैं कि व्यक्ति चलने-फिरने और अपने रूटीन वर्क निपटाने से भी लाचार हो जाता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से ज्यादा होती है। आइए जानें आखिर क्यों।
ओस्टियोपोरोसिस हड्डियों से संबंधित बीमारी है। सही पोषण न मिल पाने और विभिन्न शारीरिक बदलावों के कारण इस बीमारी में हड्डियों की सेहत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इस गंभीर बीमारी की ओर लोगों का ध्यान दिलाने के लिए वर्ष 1999 से इंटरनेशनल ओस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन हर वर्ष 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ओस्टियोपोरोसिस डे मनाया जा रहा है। हालांकि इस दिवस की शुरुआत यूनाइटेड किंगडम में 1996 में नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी द्वारा की गई थी।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम ज्यादा रहता है। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर तीन सैकेंड में एक फ्रैक्चर ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होता है। आंकड़े बताते हैं कि हर साल 10 मिलियन लोग ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रसित होते हैं। हॉर्मोनल बदलाव के कारण इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की होती है। पर ऐसा नहीं है कि पुरुषों पर इस बीमारी का प्रकोप नहीं होता। बल्कि उम्र के साथ होने वाले कई बदलावों में उनकी बोन हेल्थ पर भी असर पड़ता है।
आंकड़े बताते हैं कि हर साल 10 मिलियन लोग ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रसित होते हैं। हॉर्मोनल बदलाव के कारण इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की होती है। © Shutterstock
विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस आपको इन 6 कारणों के बारे में जरूर जानना चाहिए. क्योंकि यही मुख्य वजह होती है हड्डियों के कमजोर होने की और जिसकी वजह से ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी होती है.
यह ऑस्टियोपोरोसिस का एक बड़ा कारण है। 30 वर्ष की उम्र के बाद ज्यादातर महिलाओं की बोन हेल्थ प्रभावित होने लगती है। बोन्स टिश्यूज जो बोन्स को मजबूती देते हैं, ये टूटते तो हैं पर नए टिश्यू उस गति से नहीं बन पाते। यानी अब उनकी बोन्स कमजोर होना शुरू हो जाती हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है बोन्स का कमजोर होना जारी रहता है। 60 की उम्र तक पहुंचते ज्यादातर पुरुषों और महिलाओं की हड्डियां कमजोर हो चुकी होती हैं।
महिलाओं में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। माहवारी, गर्भावस्था और मेनोपॉज तक उनके शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। जिसका असर बोन हेल्थ पर भी पड़ता है। यही वजह है कि महिलाओं में जहां हड्डियों में दर्द और फ्रेक्चर की समस्या 40 की उम्र में ही शुरू हो जाती है, वहीं पुरुषों की बोन हेल्थ 50 के बाद भी अच्छी रहती है।
अगर परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या रही है तो बच्चों में इसके होने का जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है। © Shutterstock
बहुत सारी बीमारियां हमें अपने माता-पिता से भी अनुवांशिक तौर पर मिलती हैं। अगर परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या रही है तो बच्चों में इसके होने का जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे लोगों को अपनी बोन हेल्थ के प्रति ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि बीमारियां भी परिवार में क्यों जुड़ी होती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है हमारी ईटिंग हेबिट। एक परिवार के ज्यादातर लोगों की ईटिंग हेबिट एक सी होती है। ऑस्टियोपोरोसिस के लिए भी हमारा खानपान बहुत हद तक जिम्मेदार है। अगर हम ऐसी डाइट ले रहे हैं जिसमें केल्शियम की मात्रा बहुत कम है तो हमारे लिए ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
जब हमारी बोन्स को हमारा बहुत ज्यादा वजन उठाना पड़ता है तो वह समय से पहले कमजोर हो जाती हैं।© Shutterstock
किसी भी चीज पर अगर आप जरूरत से ज्यादा बोझ डालेंगे तो वह समय से पहले खराब होगी ही। हमारी सेहत के साथ भी ऐसा ही है। जब हमारी बोन्स को हमारा बहुत ज्यादा वजन उठाना पड़ता है तो वह समय से पहले कमजोर हो जाती हैं। आंकड़ें बताते हैं कि मोटे लोगों में फ्रेक्चर और हड्डी टूटने के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं।
कुछ खास दवाओं के साइड इफैक्ट के रूप में भी कई बार ऑस्टियोपोरोसिस को कैरी करना पड़ता है। इनमें कोर्टिकोस्टेरोइड सबसे प्रमुख है। इसका इस्तेमाल अमूमन पुरुषों द्वारा शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है। वहीं एड्स और कैंसर की रोकथाम में भी कई बार इनका इस्तेमाल किया जाता है। लंबे समय तक इस दवा का सेवन करने से हड्डियों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है।
ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी कहीं आपकी हड्डियां कमजोर तो नहीं, जानें लक्षण, कारण और बचाव.