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Written By: Jitendra Gupta | Updated : October 20, 2020 10:01 AM IST
हर 5 में से 1 पुरुष 50 के बाद हो सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार! जानें कौन सी चीजें कमजोर करती हैं हड्डियां
मनुष्य के संपूर्ण स्वास्थ्य में हड्डियों के बेहतर स्वास्थ्य की प्रमुख भूमिका होती है, लेकिन हड्डियों से संबंधित रोग चिंता का विषय बने हुए हैं। इन्हीं में से एक है ऑस्टियोपोरोसिस। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 50 वर्ष या इससे अधिक उम्र के हर तीन में से एक स्त्री व हर पांच में से एक पुरुष ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर से ग्रसित होंगे। यानी ऐसा फ्रैक्चर जो सामान्य फ्रैक्चर के मुकाबले, बहुत ही मामूली चोट से भी हो सकता है, और कई बार बिना किसी चोट के भी मरीज को फ्रैक्चर हो जाता है। ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर, खासकर हिप बोन में होने पर अक्सर जीवन को भी जोखिम में डाल देते हैं। लेकिन इस रोग के जोखिम को रोका जा सकता है, और इसका सही से उपचार भी किया जा सकता है।
इसके अलावा अभी के कोविड संक्रमण के दौर की बात करें तो सोशल डिस्टेंसिंग, संक्रमण से संबंधित सावधानी आदि के चलते घरों में अधिक अधिक से अधिक रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसके कारण शारीरिक गतिविधियां भी कम होने, लगातार बैठे रहकर काम करने आदि के कारण हड्डियों का स्वास्थ्य भी जोखिम में पड़ा है, और आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां इन्हीं में से हैं। तो आखिर ऑस्टियोपोरोसिस क्या है और इसके कारण क्या हैं आपको बता रहे हैं नई दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के निदेशक आर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन सर्जरी डॉक्टर राजेश कुमार वर्मा।
सामान्य भाषा में कहें तो ऑस्टियोपोरोसिस एक प्रकार से गंभीर रूप से हड्डियों के कमजोर पड़ जाने की प्रक्रिया है। लेकिन यह केवल हड्डियों के कमजोर रहने तक ही सीमित नहीं रहता इससे बिना कोई गंभीर चोट लगे फ्रैक्चर होने, गंभीर रूप से हड्डियों के टूटने आदि का खतरा प्रबल हो जाता है।
धूम्रपान, शराब, नशे आदि की लत।
महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोग का अतिरिक्त जोखिम है तो ज़ाहिर तौर पर इस विषय को अलग से देखे समझे जाने की ज़रूरत है, इस विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं गुरुग्राम स्थित नारायणा अस्पताल के जॉइंट रिप्लेसमेंट, अर्थरोस्कोपी एंड स्पोर्ट्स मेडिसिन सीनियर कंसल्टेंट, चीफ ऑफ सर्विसेज डॉक्टर मोनू सिंह।
पुरुषों की तुलना में स्त्रीयों को ऑस्टियोपोरोसिस का बेशक अधिक जोखिम होता है, जिसका मुख्य कारण रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव हैं जिसके चलते अतिरिक्त शारीरिक कमजोरी, हड्डियों का कमजोर पड़ना जैसी समस्याएं देखने को मिलतीं हैं। ज़ाहिर तौर पर स्त्रियों को अपने स्वास्थ्य और पोषण के प्रति अतिरिक्त जागरूकता की आवश्यकता है।
ऐसे में स्त्रियों को मेनोपोज़ या रजोनिवृत्ति के बाद ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह पर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेनी चाहिए, इसके अलावा अपने खान पान में कैल्शियम, प्रोटीन सहित सभी पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा का सेवन करना चाहिए, नियमित व्यायाम आदि करना चाहिए। इसके अलावा स्त्रियों के स्वास्थ्य पर सामाजिक ताने बाने का अक्सर विपरीत असर भी पड़ता है जिसके चलते बहुत सी महिलायें अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखतीं, सही पोषण उनको नहीं मिल पता। साथ ही शारीरिक रूप से अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करना, घर के अधिकतर कामों का अकेले बोझ उठाना जैसे कारक भी उनके स्वास्थ्य को जोखिम में डालते हैं। ऐसे में आस पास के बाकी लोगों, परिवार के सदस्यों को भी स्त्रियों पर उनकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालना चाहिए, सभी कामों में बराबर सहयोग करना चाहिए और उनको बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करना चाहिए।
ऑस्टियोपोरोसिस एक गंभीर रोग है लेकिन इसका इलाज पूरी तह से संभव है, तो इसका उपचार होता कैसे है बता रहे हैं श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के कंसल्टेंट, रेमेटोलॉजिस्ट डॉक्टर आलोक कल्याणी।
गंभीर हो चुके ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में मूल रूप से फ्रैक्चर से बचाव किया जाता है साथ ही इसके इलाज के तरीके व्यक्ति में इस रोग की गंभीरता के अनुसार तय किये जाते हैं। इसके चरण कुछ इस तरह से हो सकते हैं :-
फ्रैक्स स्कोरिंग :- यह एक प्रकार की स्कोरिंग होती है जिसके अनुसार शरीर में फ्रैक्चर होने सम्भावना का पता किया जाता है, हालांकि इस स्कोरिंग का काम काफी व्यापक होता है, यह संबंधित डॉक्टर द्वारा तय किया जाता है। साथ ही यह स्कोरिंग अलग देशों, स्त्री पुरुष आदि के अनुसार अलग हो सकती है।
डेक्सा स्कैन :- यह एक प्रकार का ऐसा एक्स रे है जिसके ज़रिये हड्डियों के घनत्व या डेंसिटी का पता किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि हड्डियों को कितना नुक्सान हो चुका है और कितना काम किया जा सकता है।
उपरोक्त जांच और अन्य तरह की जांच के बाद मरीज़ के इलाज की दिशा तय की जाती है जिसमें दवाइयां, कुछ प्रकार व्यायाम, खान पान में बदलाव परहेज़ आदि में से सब या कुछ हो सकते हैं। सही समय पर इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।