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Written By: Yogita Yadav | Published : October 10, 2018 12:16 PM IST
शोध में हुआ खुलासा, बिजी रहने वाले माता-पिता के बच्चों को ओबेसिटी का शिकार होने का रहता है जोखिम। © Shutterstock
दुनिया भर में मोटापा स्वास्थ्य के लिए तेजी से बढ़ते जा रहे जोखिमों में से एक है। यदि इसे समय रहने नियंत्रित न किया जाए तो इससे न केवल शारीरिक बल्कि कई तरह की गंभीर मानसिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
बढ़ रहा है मोटापा
तेज रफ्तार, दौड़ती-भागती जिंदगी का सबसे बड़ा नुकसान है अनियमित दिनचर्या। काम के दबाव में या पैसों की दौड़ में लोग अपनी सेहत का ख्याल रखना ही भूल गए हैं। इसका खामियाजा सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी भुगतना पड़ा रहा है।
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क्या कहता है शोध
फिलाडेल्फिया की यूनिवर्सिटी ऑफ टेंपल में हुई एक रिसर्च ने बच्चों की ओबेसिटी की समस्या का एक बड़ा कारण ढूंढ निकाला है। रिसर्च के मुताबिक जो लोग अधिक व्यस्त रहते हैं, उनके बच्चों के ओबेसिटी के शिकार होने का ज्यादा खतरा रहता है। इस परेशानी का सबसे कारण अच्छी नींद न लेना है। शोध के मुताबिक जो बच्चे पूरी नींद लेते है उनकी कैलेरिज समान्य रहती है और फैट बर्निंग प्रणाली भी सही से काम करती है। मगर पूरी नींद न लेने वाले बच्चों में कैलेरिज जमा होती रहती है और उनके मोटापे की वजह बनती है।
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कैलेरिज बढ़ने का एक बड़ा कारण बच्चों का जंक फूड की ओर अधिक झुकाव भी होता है। शोध में एक और चीज निकल कर सामने आई कि पूरी नींद न लेना बच्चों में मोटापे के अलावा कई अन्य परेशानियां भी पैदा करता है। दरअसल कम नींद लेने पर हमारे शरीर में मौजूद भूख बढ़ाने वाले हार्मोन लेप्टिन की सक्रियता में कमी आ जाती है। जिस कारण हमे कम भूख लगती है। कम भूख लगना कई अन्य समस्याओं की भी वजह बनता है। यह भी पढ़ें - एक आसन हर रोज : योग का यह आसन दूर करेगा तन-मन की थकान
ऐसेे हुआ रिसर्च
यूनिवर्सिटी द्वारा की गई इस रिसर्च में कुल 11 बच्चों को शामिल किया गया था। यह अध्ययन 1 माह तक चला। इस अध्ययन के तहत बच्चों को पहले हफ्ते समय पर सुलाया गया। इसके बाद अगले सप्ताह में आधे बच्चों को समय पर सुलाया गया और आधों को सोने के लिए कम समय दिया गया। इसके बाद तीसरे हफ्ते में इनकी दिनचर्या को आपस में बदल दिया गया। रिसर्च के परिणामों में साबित हुआ कि जिन बच्चों ने कम नींद ली उनका वजन अधिक बड़ा है।
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नींद का रखें ध्यान
इसलिए जरुरी है कि आप बच्चों को जल्दी सोने की आदत डालें। अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों की नींद को नजरंदाज न करें। इस रिसर्च में कई बच्चों को लेकर उनके खान-पान सोने व जागने की आदतों पर अध्ययन किया गया, उसके बाद जाकर वह इस निष्कर्ष पर आएं। छोटे बच्चों को आठ से दस घंटे की नींद लेना अनिवार्य है।