World Multiple Sclerosis Day 2020 : डरें नहीं, समय पर कराएं मल्टीपल स्क्लेरोसिस का इलाज

मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित व्यक्ति अपनी रोजमर्रा के काम को भी खुद नहीं निपटा सकते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे व्यक्ति को बोलने, देखने यहां तक की पेशाब करने में भी परेशानी होती है। इसी कारण एमएस (Multiple Sclerosis) सुनते ही हर व्यक्ति के मन में डर उभर जाता है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 30, 2020 8:16 AM IST

World Multiple Sclerosis Day 2020 : मल्टीपल स्क्लेरोसिस ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की एक बीमारी है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं कराया गया, तो व्यक्ति का जीना मुश्किल हो जाता है। 30 मई को 'मल्टीपल स्क्लेरोसिस दिवस' (World Multiple Sclerosis Day 2020) मनाया जाता है। इस मौके पर मल्टीपल स्क्लेरोसिस के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस को बहुत से लोग एमएस (World Multiple Sclerosis Day 2020) के नाम से भी जानते हैं। इस बीमारी का नाम सुनते ही हमारे मन में व्हील चेयर पर बैठे दिव्यांग व्यक्ति की चित्र उभर आती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अपनी रोजमर्रा के काम को भी खुद नहीं निपटा सकते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे व्यक्ति को बोलने और देखने यहां तक की पेशाब करने तक में परेशानी होती है। इसी कारण एमएस (Multiple Sclerosis) सुनते ही हर व्यक्ति के मन में डर उभर जाता है।

क्या है मल्टीपल स्केलेरोसिस (What is Multiple Sclerosis)

मल्टीपल स्केलेरोसिस,  केंद्रीय तंत्रिका तंत्र या सेंट्रल नर्वस सिस्टम की एक बीमारी है जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) को प्रभावित करती है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें एंटीबॉडी मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और आंखों के नसों पर प्रभाव डालती है। यह आमतौर पर 10 से 16 साल के आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। हालांकि, 20 और 30 की महिलाओं को इसका बहुत अधिक खतरा होता है। पुरुषों की तुलना में, एमएस महिलाओं में अधिक आम है और यह लोगों को 60 वर्ष की आयु तक प्रभावित कर सकता है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस का कारण (Causes of Multiple Sclerosis)

इस बीमारी के कारण अभी अज्ञात है। इसे एक स्व-प्रतिरक्षित बीमारी माना जाता है, जिसमें आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपकी तंत्रिकाओं को आवरण प्रदान करने वाले सुरक्षात्मक खोल को नुकसान पहुंचाती है। माइलिन की तुलना बिजली की तारों की सुरक्षात्मक परत से की जा सकती है। जब माइलिन को नुकसान पहुंचता है और तंत्रिका खुल जाती है, तो उस तंत्रिका में आने जाने वाले संदेश धीमे या अवरुद्ध हो सकते हैं। तंत्रिका को भी नुक्सान हो सकता है। यह स्पष्ट नहीं है कि कुछ लोगों को मल्टीपल स्क्लेरोसिस क्यों विकसित होता है और दूसरों को नहीं। अनुवांशिकता और पर्यावरणीय कारक इसके जिम्मेदार हो सकते हैं।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण ( Symptoms of Multiple Sclerosis)

इस बीमारी का अटैक एक ही बार नहीं आता है, बल्कि सालों बाद रुक-रुक कर होता है। यह अटैक सामान्यत: एक सप्ताह तक रहता है और कई साल बाद फिर आता है। प्रभावित तंत्रिका फाइबर के स्थान के आधार पर मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण भिन्न होते हैं-

  • एक या एक से अधिक अंगों में कमजोरी या सुन्न होना जो आमतौर पर एक समय में शरीर के एक तरफ होती है।
  • आमतौर पर एक समय में एक आंख में, अक्सर आंखों की गतिविधि के दौरान दर्द होना।
  • एक से अधिक दिखना या दृष्टि में धुंधलापन।
  • शरीर के हिस्सों में झुनझुनी या दर्द।
  • गर्दन की गतिविधियों के दौरान बिजली के झटके जैसी सनसनी, विशेष रूप से गर्दन को आगे झुकाते समय।
  • कंपन, समन्वय की कमी या अस्थिर चाल और अस्पष्ट बोलना।
  • थकान, चक्कर आना और आंत्र और मूत्राशय की समस्याएं।

डरें नहीं, इलाज कराएं

भारत में अन्य देशों की तुलना में इसके मरीजों की संख्या कम है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं एमएस की शिकार अधिक होती हैं। इस बीमारी की जांच एमआरआई (MRI) के जरिए होती है। इससे डरने की बजाय मरीजों को सही समय पर इसका इलाज कराना चाहिए। इसका थोड़ा महंगा होता है, लेकिन 1000 से 1200 रुपए प्रतिमाह की दवाएं भी इसके इलाज में कारगर साबित हो सकती हैं।

सामाजिक जीवन हो जाता है खत्म

इस बीमारी के कारण मरीज की सेक्स लाइफ खत्म हो जाती है, रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगती है। इतना ही नहीं, अगर कम उम्र में इसके शिकार होते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई तक छूट जाती है। आमदनी से लेकर  सामाजिक जीवन पूरी तरह से खत्म हो जाता है। ऐसे लोग अक्सर बाहर जाने से बचते हैं। इसका प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखने लगता है।

इन बातों का रखें ख्याल

  • शरीर में विटामिन डी की कमी न होने दें।
  • संतुलित व पोषण से भरपूर आहार लें।
  • खाने में कैल्शियम युक्त भोजन ज्यादा शामिल करें।
  • स्वस्थ व सक्रिय जीवनशैली अपनाएं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि वजन न बढ़े।
  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें।

मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित हर व्यक्ति दिव्यांग नहीं होता। 10 साल में ही 50 प्रतिशत मरीज दिव्यांग हो जाते हैं। अगर किसी को दो बार एमएस का अटैक हो चुका हो, तो उन्हें नियमित रूप से इसका इलाज कराना चाहिए।

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