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Written By: Anshumala | Updated : August 20, 2021 12:19 AM IST
डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया के लक्षणों को जानकर मच्छरों से इन आयुर्वेदिक उपायों से करें अपना बचाव....
How to Keep Mosquitoes Away Naturally in Hindi: विश्व भर में 20 अगस्त को 'विश्व मच्छर दिवस 2021' (World Mosquito Day 2021 in Hindi) सेलिब्रेट किया जाता है। इस वर्ष इस दिन को मनाने के लिए 'रीचिंग द जीरो मलेरिया टार्गेट' (Reaching the zero malaria target) थीम रखी गई है। इस थीम का उद्देश्य है जड़ से मलेरिया जैसी बीमारी को खत्म करना। लोगों को मच्छर जनित इस रोग के प्रति जागरूक करना और मच्छरों से अपना बचाव करना। वैसे तो मच्छर सालों भर घर-बाहर रहते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में इनकी संख्या बढ़ जाती है। इनके काटने से मलेरिया (Malaria) के साथ ही डेंगू (Dengue), चिकनगुनिया (Chikungunya), पीला बुखार (Yellow Fever) आदि हो सकता है। ये सभी खतरनाक हो सकते हैं यदि इनके लक्षणों को जानकर समय पर इलाज ना शुरू किया जाए। इन बीमारियों से बचाव के लिए आपको खुद को मच्छरों से बचाकर रखना होगा। आइए जानते हैं इन चार मच्छर जनित रोगों के लक्षण और मच्छरों को खुद से दूर रखने के कुछ नेचुरल उपायों (How to prevent from mosquito in Hindi) के बारे में यहां....
डेंगू मच्छर काटने से होता है, जिसमें धीरे-धीरे ब्लड प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज मिलना जरूरी हो जाता है वरन मरीज की जान भी जा सकती है। यदि आपको एक बार डेंगू हो चुका है, तो दोबारा भी हो सकता है। डेंगू के शुरुआती लक्षणों में सिर दर्द, तेज बुखार, आंखों, मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द होना, उल्टी, शरीर पर रैशेज आदि नजर आ सकते हैं। गंभीर लक्षणों में ब्लीडिंग, शॉक नजर आने पर हॉस्पिटल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है।
चिकनगुनिया एक वायरल इंफेक्शन है, जो संक्रमित मच्छरों द्वारा प्रेषित होता है। चिनकगुनिया होने पर जोड़ो में बहुत तेज दर्द होता है। इम्यूनिटी को भी प्रभावित करता है। चिकनगुनिया के लक्षण इंफेक्शन होने के एक सप्ताह के अंदर नजर आता है। इसमें आपको बुखार, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, रैशेज आ सकते हैं।
पीला बुखार भी संक्रमित मच्छरों के काटने के कारण ही होता है। इसमें लक्षण सिर दर्द, बुखार, चक्कर आना, उल्टी, जी मिचलाना नजर आ सकते हैं। इसमें त्वचा और आंखें पीली नजर आने लगती हैं। ये लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
प्लास्मोडियम परजीवी (plasmodium parasite) के कारण मलेरिया होता है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। मलेरिया से अधिकतर लोग हर साल ग्रस्त होते हैं। मलेरिया का एंटीडोट भी उपलब्ध है, जिससे इलाज संभव है। मलेरिया होने पर कंपकंपी, बुखार, पसीना आना, ठंड लगना, डायरिया आदि लक्षण नजर आ सकते हैं। ये सभी लक्षण मच्छर के काटने के कुछ सप्ताह बाद नजर आते हैं।
सार्थक आयुर्वेदालय एवं पंचकर्मा केंद्र (मथुरा) के पंचकर्मा विशेषज्ञ और आयुर्वेदाचार्य डॉ. अंकुर अग्रवाल कहते हैं कि मच्छरों से बचाव के लिए नहाने से पहले पूरे शरीर पर सरसों या तिल के तेल से 10 मिनट मालिश करने के बाद नहाना चाहिए। इससे पूरे शरीर पर एक लेयर बनी रहती है। यह लेयर या परत दिखाई नहीं देती है। इस परत के कारण मच्छर काट नहीं पाते हैं।
मच्छरों से बचाव के लिए दूसरा आयुर्वेदिक उपाय बताते हुए डॉ. अंकुर अग्रवाल कहते हैं कि नीम की कुछ पत्तियों को सुखा कर रख दें। इन पत्तियों को जलाएं और कमर में रख दें। कमरे का दरवाजा, खिड़कियों को बंद कर दें। आधा घंटा कमरे में छोड़ दें, इसका धुंआ अच्छी तरह से कमरे में फैल जाएगा और फिर सभी खिड़की-दरवाजे खोल दें। सारे मच्छर भाग जाएंगे।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, एक कॉटन लें। उस पर घी और हल्दी पाउडर मिलाकर लगाएं। फिर उसे जला दें और पूरे धुएं को घर में फैलने दें। इसे धूपन चिकित्सा कहते हैं। इससे मच्छर भाग जाएंगे।
अजवायन के बीज को सरसों के तेल में डालकर कुछ कार्डबोर्ड के टुकड़ों पर लगाएं। इन्हें अपने घर के उन जगहों पर रखें जहां से मच्छर अधिक आते हैं। यह घर को एक बेहतर सुगंध से भी भर देंगे। आप इस तेल को पकाकर इसे घर में स्प्रे कर सकते हैं।
कुछ पौधे ऐसे होते हैं, जिससे मच्छर दूर भागते हैं। फीवरफ्यू, कैटनिप, लैवेंडर, सिट्रोनेला में मच्छर को भगाने वाले प्रॉपर्टीज होती हैं। इन पौधों को घर के अलग-अलग जगहों में रख दें। घर में एक भी मच्छर नजर नहीं आएंगे।
लैवेंडर तेल में सिट्रोनेला और यूकलिप्टस तेल मिलाकर घर में स्प्रे करें। इससे मच्छर बाहर निकल जाएंगे। कुछ घंटों के बाद एक बार फिर से पूरे घर में स्प्रे करने से असर अधिक होगा।
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