
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 20, 2020 1:43 PM IST
गर्मियों में मच्छरों से हैं परेशान, इन नेचुरल टिप्स को अपनाकर करें सफाया
मच्छर दिखने में छोटा जरूर लगता है लेकिन लोगों की जान लेने में यह बहुत माहिर है। मच्छर ऐसी प्रजाती है जो हर साल लाखों लोगों की जान लेती है जबकि कई लाख लोगों को बेबस और हॉस्पिटलाइज्ड करती है। आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में हर साल लगभग 7 लाख लोग मच्छर जनित बीमारियों की चपेट में आकर मरते हैं। इसमें मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जीका वायरस और लसीका फाइलेरिया (एलिफेंटिएसिस) समेत जापानी एन्सेफलाइटिस जैसे वायरस शामिल हैं। आज हम आपको मच्छर काटने से होने वाली 6 गंभीर बीमारियों के बारे में बता रहे हैं। यदि कोई भी मरीज इनमें से किसी भी वायरस का शिकार होता है तो उसे बिना वक्त गवाए डॉक्टर के पास जाना चाहिए और अपना इलाज करना चाहिए।
यह रोग संक्रमित एनोफेलीज नामक मादा मच्छरों के काटने से मलेरिया रोग होता है। यह ऐसी बीमारी है जो परजीवी प्लास्मोडियम के कारण होती है। परजीवी लिवर में जाकर अपनी संख्या बढ़ाते हैं और रेड ब्लड सेल्स को प्रभावित करते हैं। मलेरिया होने पर बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, थकान और उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं। अगर तुरंत इलाज नहीं किया गया तो मलेरिया जानलेवा हो सकता है। दुनियाभर में हर साल करीब 4.35 लाख लोग मलेरिया के कारण अपनी जान गवाते हैं।
डेंगू वायरस का प्रकोप एडीज एजिप्टी नामक प्रजाति की मादा मच्छर द्वारा और कुछ हद तक ए अल्बोपिक्टस द्वारा फैलता है। रोग के लक्षणों में तेज बुखार, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द और नाक और मसूड़ों से हल्का रक्तस्राव शामिल हैं। कुछ लोगों को डेंगू रक्तस्रावी बुखार नामक बीमारी का अधिक गंभीर रूप भी हो सकता है। इस रोग के होने पर व्यक्ति की प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाती है। यदि डेंगू दवाओं से सही न हो तो मरीज को एडमिट किया जाता है। जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
यह एक वायरल बीमारी है जो एडीस एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस जैसे संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और सिर में तेज दर्द चिकनगुनिया के सबसे मुख्य लक्षण हैं। हालांकि, बीमारी का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। लेकिन डॉक्टर इस रोग में जब तक लक्षण दूर न हो जाएं, तब तक आराम करने और तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते हैं।
जीका वायरस संक्रमित एडीस प्रजाति के मच्छर के काटने से फैलता है। वैसे तो जीका वायरण के लक्षण बहुत हल्के होते हैं लेकिन इसमें बुखार, मांसपेशियों में दर्द, शरीर में दाने होना और थकान होना शामिल हो सकते हैं। हालांकि, वायरस से बचाव के लिए कोई टीका नहीं है। लेकिन डॉक्टर बचाव के लिए दवा लिखते हैं।
लसीका फाइलेरिया नामक रोग परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के काटने से होता है। जब यह लसीका प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है और दर्दनाक, सूजे हुए अंगों के परिणाम में दिखता है। कई बार इसके लक्षण बहुत समय बाद दिखते हैं। इस बीमारी का कोई तय इलाज नहीं है बस इसकी रोकथाम की जा सकती है। साथ ही यह बीमारी कितनी खतरनाक है इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि फाइलेरिया दुनिया की दूसरी ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को विकलांग बना रही है।
जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस बाढ़ के चलते चावल के खेतों में भरे पनी, दलदल और पौधों के आसपास तेजी से पनपता है। वैसे यह वायरस आमतौर पर एशिया और पश्चिम प्रशांत में पाया जाता है। जापानी एन्सेफलाइटिस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी सहित केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। अधिकांश इस वायरस के लक्षण या तो दिखते ही नहीं है या फिर बहुत समय बाद दिखते हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से बचाव के लिए एक वैक्सीन उपलब्ध है।