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हर बात पर सेल्फी लेना, किसी भी शब्द के बारे में जानने के लिए फौरन गुगल खंगालने लगाना और परिवार को छोड़ कर घंटों सोशल साइट्स पर आभासी दोस्तों से चैट करते रहना बताता है कि आप इंटरनेट एडिक्शन के शिकार हो चुके हैं। दुनिया भर में इंटरनेट एडिक्शन के शिकार युवाओं की तादात लगतार बढ़ रही है। भारत में ही इसके मामले चौकाने वाले हैं। दो वर्ष पूर्व एम्स में शुरू की गई इंटरनेट एडिक्शन ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
दो साल में दोगुने हुए इंटरनेट एडिक्शन के मरीज़
एम्स ने दो साल पहले इंटरनेट एडिक्शन क्लीनिक शुरु किया - दो साल बाद क्लीनिक में इंटरनेट एडिक्शन के मरीज़ दो गुने हो चुके हैं। एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में हर शनिवार चलने वाले इस क्लीनिक में हर सप्ताह 5 से 6 मरीज़ इंटरनेट एडिक्शन के आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर स्कूल और कालेज के बच्चे हैं।
डराने वाले हैं आंकड़ें
यंग इंडिया की बात करें तो देश की युवा जनसंख्या का 20 से 25 फीसदी हिस्सा मानसिक रोग का शिकार है। इनमें 5 फीसदी डिप्रेशन, 5 फीसदी मूड डिसऑर्डर, करीब 7 फीसदी तम्बाकू इस्तेमाल करने वाले और 10 फीसदी लाइफ टाइम प्रीवलेन्स के शिकार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल वीडियो गेमिंग, ऑनलाइन गैम्बलिंग वे आदतें हैं जो युवाओं को मानसिक बीमारियों का शिकार बना रही हैं। एम्स के डॉक्टरों के आंकलन के मुताबिक दुनिया के 25 फीसदी युवा अलग-अलग मानसिक बीमारियों के शिकार हैं, लेकिन इनमें से लगभग 80 से 90 फीसदी किसी तरह का ट्रीटमेंट नहीं लेते। मानसिक बीमारियों में डिप्रेशन सबसे बड़ी परेशानी के तौर पर उभर रहा है।
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वीडियो गेम्स से होती है शुरूआत
वीडियो गेम्स खेलने या इंटरनेट का ज़्यादा इस्तेमाल करने से स्कूली बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ रहा है असर। एम्स की इस ओपीडी में कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट्स जिनकी उम्र 16 से 25 साल तक हैं, अधिक आ रहे हैं। इनके अलावा इनमें 30 से 35 साल के वे मरीज़ भी शामिल हैं जिन्हें कोई दूसरी मानसिक परेशानी है लेकिन, इसकी वजह इंटरनेट ही है।
ये हैं इंटरनेट एडिक्शन के लक्षण
एम्स के साइकेट्री डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर और क्लिनिकल साइकोलॉजी ओपीडी चलाने वाली डॉक्टर अर्चना भार्गव इंटरनेट के नकारात्मक प्रभाव के बारे में बात करते हुए उसके लक्षण भी बताती हैं, ऐसे बच्चों का एकेडमिक परफॉर्मेंस खराब हो जाता है, वे स्कूल नहीं जाना चाहते और मोबाइल लेने पर बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाते हैं।
ऐसे बचाएं इंटरनेट एडिक्शन से
इस समय बच्चों को इंटरनेट एडिक्शन से बचाने के लिए जागरूकता की सख्त आवश्यकता है। माँ बाप को ध्यान रखना चाहिए कि उनके बच्चे ज्यादा देर तक मोबाइल का इस्तेमाल न करें। अकेलापन महसूस न करें। समय निकालकर खेलकूद में भी ध्यान दें। अभिभावकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने बच्चों को वक़्त दें। साथ ही खुद भी एक्सरसाइज करें और बच्चों को इसके लिए तैयार करें।
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बचाना होगा यंग इंडिया
दुनिया भर में 10 से 24 साल की उम्र के 1.8 बिलियन लोग हैं, जिन्हें युवाओं की तादाद में शामिल किया जाता है। ये दुनिया की एक चौथाई आबादी है। भारत में सबसे ज्यादा युवा 356 मिलियन लोग रह रहे हैं। पिछले साल जारी किए गए नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक 18 से 29 साल के 10 फीसदी युवा आबादी मानसिक तौर पर बीमार है। इस आंकड़े के मुताबिक आधी मानसिक परेशानियां 14 साल की उम्र से शुरु होती हैं। इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए विश्व स्वास्थय संगठन ने इस बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (WORLD MENTAL HEALTH DAY) की थीम (THEME) बदलती दुनिया में युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य (YOUNG PEOPLE AND MENTAL HEALTH IN A CHANGING WORLD) को रखा है।