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Written By: Editorial Team | Updated : October 10, 2018 10:30 AM IST
आयुर्वेद के अनुसार सेहत से जुड़ी कोई भी समस्या, पंचतत्व एवं वात, पित्त व कफ में असंतुलन के कारण पैदा होती है। © Shutterstock
अधकपारी या माइग्रेन एक जटिल विकार है जिसमें बार-बार गंभीर सिरदर्द होता है। आमतौर पर सिरदर्द एक हिस्से को प्रभावित करता है और इसकी प्रकृति धुकधुकी जैसी होती है जो 2 से लेकर 72 घंटों तक बना रहता है। अक्सर इसके साथ कई स्वैच्छिक तंत्रिका तंत्र से संबंधित लक्षण भी होते हैं। रोगी अंधेरे और शांत जगह पर आराम करना चाहता है। कुछ लोगों में माइग्रेन से पहले या उसके साथ अन्य लक्षण भी होते हैं, जिन्हें ऑरा कहा जाता है। सामान्य ऑरा हैं-चमक कौंधना, काले धब्बे दिखना या बांह अथवा पैर में झुनझुनी लगना। अभी माइग्रेन का इलाज उपलब्ध नहीं है लेकिन इसे कुछ हद तक कंट्रोल जरूर किया जा सकता है।
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आयुर्वेद के अनुसार सेहत से जुड़ी कोई भी समस्या, पंचतत्व एवं वात, पित्त व कफ में असंतुलन के कारण पैदा होती है। माइग्रेन भी उन्हीं में से एक समस्या है जो असाधारण सिरदर्द के साथ ही सेहत की अन्य समस्याओं को भी बढ़ाता है।
माइग्रेन की समस्या, शरीर में आकाश तत्व की कमी के कारण होती है। अगर इसे संतुलित किया जाए तो माइग्रेन से निजात पाई जा सकती है। इसमें आकाश मुद्रा बहुत हद तक मददगार है।
जानिए क्या है आकाश मुद्रा -
आकाश मुद्रा योग की वह मुद्रा है, जो शरीर के पांच तत्वों में से आकाश तत्व को बढ़ाती है और आकाश तत्व की कमी से होने वाली सेहत समस्याओं को दूर करती है।
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आकाश मुद्रा बनाने की विधि
आकाश मुद्रा के लिए सबसे पहले पद्मासन, सुखासन अथवा वज्रासन में बैठ जाएं। अब दोनों हाथों की मध्यमा यानि के अग्रभाग यानि पोर को अंगूठे के अग्र भाग से मिलाएं। इसे रोजाना 10 से 15 मिनट के लिए 3 बार करें।
आकाश मुद्रा के फायदे
1. माइग्रेन या साइनसाइटिस के दर्द में कमी
2. सीने के दर्द में लाभ
3. कान के दर्द में राहत
4.उच्च रक्त चाप में फायदेमंद
5.शरीर में भारीपन होने पर कारगर
6.शरीर को विषाक्त तत्वों से मुक्ति
7. सकारात्मक विचारों का संचार
सावधानी
वात प्रकृति वालों को यह मुद्रा नहीं करनी चाहिए। इससे गैस, त्वचा में सूखापन, गठिया की समस्या हो सकती है।