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Malaria : इलाज से पहले बचाव है जरूरी, जानें विस्तार से

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर वर्ष क़रीब 50 करोड़ लोग मलेरिया (Malaria) से पीड़ित होते हैं। जिनमें करीब 27 लाख रोगी जीवित नहीं बच पाते, जिनमें से आधे पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं।

Malaria : इलाज से पहले बचाव है जरूरी, जानें विस्तार से
भारत में सर्वाधिक खतरनाक बीमारी मानी जाती है मलेरिया (Malaria)। पिछले कुछ सालों में डेंगू और चिकनगुनिया से भी ज्‍यादा मलेरिया ने लोगों की जान ली है। © Shutterstock.

Written by Yogita Yadav |Updated : July 11, 2019 8:06 PM IST

यूनिसेफ के आह्वान पर दुनिया भर में 25 अप्रैल को विश्‍व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्‍य है उन कीमती जन निधि को बचाना जो मलेरिया के कारण खो जाती हैं। खासतौर से अफ्रीकी और विकासशील देशों में अब भी गर्मी और बरसात के साथ ही इस बीमारी का आतंक फैलने लगता है। मलेरिया से हर साल दुनिया भर में लाखों जानें जाती हैं। इससे बचने और बचाने के लिए जरूरी है कि हम सभी मलेरिया के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जागरुक हों।

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क्‍या है मलेरिया

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मलेरिया एक वैश्विक जन-स्वास्थ्य समस्या है। मच्छरों के कारण फैलने वाली इस बीमारी में हर साल कई लाख लोग जान गवा देते हैं। प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम नामक कीटाणु मादा एनोफिलीज मच्छर के माध्यम से फैलते है। ये मच्छर एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक कीटाणु फैलाने का काम भी करते है। ठहरे और गंदे पानी में पनपने वाले ये मच्‍छर ही इस बीमारी के वाहक है। खासतौर से ग्रामीण और अल्‍पविकसित इलाके जहां रहने की सुविधाएं और स्‍वच्‍छता पर्याप्‍त नहीं है।

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क्‍या कहते हैं आंकड़ें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर वर्ष क़रीब 50 करोड़ लोग मलेरिया से पीड़ित होते हैं। जिनमें करीब 27 लाख रोगी जीवित नहीं बच पाते, जिनमें से आधे पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। मच्छर मलेरिया के रोगाणु का केवल वाहक है। रोगाणु मच्छर के शरीर में एक परजीवी की तरह फैलता है और मच्छर के काटने पर उसकी लार के साथ मनुष्य के शरीर में पहुंचता है। रोगाणु केवल एक कोषीय होता है जिसे प्लास्मोडियम कहा जाता है।

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तीन तरह का होता है मलेरिया

रोगाणु की क़िस्म के अनुसार मलेरिया के तीन मुख्य प्रकार हैं- मलेरिया टर्शियाना, क्वार्टाना और ट्रोपिका। इनमें सबसे ख़तरनाक है मलेरिया ट्रोपिका, जो पी.फ़ाल्सिपेरम नामक रोगाणु से फैलता है और भारत में भी चारों और फैला हुआ है।

यह समय है संवेदनशील

मलेरिया का संक्रमण होने और बीमारी फैलने में रोगाणु की किस्म के आधार पर 7 से 40 दिन तक लग सकते हैं। मलेरिया के शुरूआती दौर में सर्दी-जुकाम या पेट की गड़बड़ी जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं, इसके कुछ समय बाद सिर, शरीर और जोड़ों में दर्द, ठंड लग कर बुख़ार आना, नब्ज़ तेज़ हो जाना, उबकाई, उल्टी या पतले दस्त होना इत्यादि होने लगता है। लेकिन जब बुखार अचानक से बढ़ कर 3-4 घंटे रहता है और अचानक उतर जाता है इसे मलेरिया की सबसे खतरनाक स्थिति माना जाता है।

इस तरह करें खुद का बचाव

  • मलेरिया का वाहक मच्‍छर है। इसलिए जरूरी है कि खुद को और अपने बच्‍चों को मच्‍छरों से बचाकर रखें।
  • शाम के समय जब मच्‍छर ज्‍यादा होते हैं उस समय घर से बाहर निकलने से परहेज करें।
  • कहीं पर भी पानी इकट्ठा न होने दें, न ही कूड़े आदि के पास से गुजरें।
  • पूरी तरह ढके हुए कपड़े पहनें जिससे मच्‍छर हाथों और टांगों पर काट न सकें।
  • सोने से पहले एंटी मॉस्किटो कॉयल अथवा मच्‍छरदानी का प्रयोग करें।
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