Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
यूनिसेफ के आह्वान पर दुनिया भर में 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य है उन कीमती जन निधि को बचाना जो मलेरिया के कारण खो जाती हैं। खासतौर से अफ्रीकी और विकासशील देशों में अब भी गर्मी और बरसात के साथ ही इस बीमारी का आतंक फैलने लगता है। मलेरिया से हर साल दुनिया भर में लाखों जानें जाती हैं। इससे बचने और बचाने के लिए जरूरी है कि हम सभी मलेरिया के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरुक हों।
यह भी पढ़ें - कम या ज्यादा सोना, क्या है सेहत के लिए ज्यादा घातक, जानिए विस्तार से
क्या है मलेरिया
मलेरिया एक वैश्विक जन-स्वास्थ्य समस्या है। मच्छरों के कारण फैलने वाली इस बीमारी में हर साल कई लाख लोग जान गवा देते हैं। प्रोटोजुअन प्लाज्मोडियम नामक कीटाणु मादा एनोफिलीज मच्छर के माध्यम से फैलते है। ये मच्छर एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक कीटाणु फैलाने का काम भी करते है। ठहरे और गंदे पानी में पनपने वाले ये मच्छर ही इस बीमारी के वाहक है। खासतौर से ग्रामीण और अल्पविकसित इलाके जहां रहने की सुविधाएं और स्वच्छता पर्याप्त नहीं है।
यह भी पढ़ें - गर्मियों में कम पिया पानी, तो बढ़ सकता है मोटापा, जानें विस्तार से
क्या कहते हैं आंकड़ें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर वर्ष क़रीब 50 करोड़ लोग मलेरिया से पीड़ित होते हैं। जिनमें करीब 27 लाख रोगी जीवित नहीं बच पाते, जिनमें से आधे पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। मच्छर मलेरिया के रोगाणु का केवल वाहक है। रोगाणु मच्छर के शरीर में एक परजीवी की तरह फैलता है और मच्छर के काटने पर उसकी लार के साथ मनुष्य के शरीर में पहुंचता है। रोगाणु केवल एक कोषीय होता है जिसे प्लास्मोडियम कहा जाता है।
यह भी पढ़ें – ऑड ड्यूटी आवर से बढ़ जाती हैं सेहत की मुश्किलें
तीन तरह का होता है मलेरिया
रोगाणु की क़िस्म के अनुसार मलेरिया के तीन मुख्य प्रकार हैं- मलेरिया टर्शियाना, क्वार्टाना और ट्रोपिका। इनमें सबसे ख़तरनाक है मलेरिया ट्रोपिका, जो पी.फ़ाल्सिपेरम नामक रोगाणु से फैलता है और भारत में भी चारों और फैला हुआ है।
यह समय है संवेदनशील
मलेरिया का संक्रमण होने और बीमारी फैलने में रोगाणु की किस्म के आधार पर 7 से 40 दिन तक लग सकते हैं। मलेरिया के शुरूआती दौर में सर्दी-जुकाम या पेट की गड़बड़ी जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं, इसके कुछ समय बाद सिर, शरीर और जोड़ों में दर्द, ठंड लग कर बुख़ार आना, नब्ज़ तेज़ हो जाना, उबकाई, उल्टी या पतले दस्त होना इत्यादि होने लगता है। लेकिन जब बुखार अचानक से बढ़ कर 3-4 घंटे रहता है और अचानक उतर जाता है इसे मलेरिया की सबसे खतरनाक स्थिति माना जाता है।
इस तरह करें खुद का बचाव