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Written By: Yogita Yadav | Updated : April 24, 2019 2:46 PM IST
आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर वर्ष क़रीब 50 करोड़ लोग मलेरिया से पीड़ित होते हैं। जिनमें करीब 27 लाख रोगी जीवित नहीं बच पाते, जिनमें से आधे पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। © Shutterstock.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर वर्ष क़रीब 50 करोड़ लोग मलेरिया से पीड़ित होते हैं। जिनमें करीब 27 लाख रोगी जीवित नहीं बच पाते, जिनमें से आधे पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। मच्छर मलेरिया के रोगाणु का केवल वाहक है। रोगाणु मच्छर के शरीर में एक परजीवी की तरह फैलता है और मच्छर के काटने पर उसकी लार के साथ मनुष्य के शरीर में पहुंचता है। रोगाणु केवल एक कोषीय होता है जिसे प्लास्मोडियम कहा जाता है। यूनिसेफ के आह्वान पर दुनिया भर में 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य है उन कीमती जन निधि को बचाना जो मलेरिया के कारण खो जाती हैं। बच्चों का ज्यादातर समय घर से बाहर खुले में गुजरता है इसलिए जरूरी है कि बच्चों को भी मलेरिया से बचने के गुर सिखाए जाएं।
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इस तरह फैलता है मलेरिया
मलेरिया दरअसल एक प्रकार के परजीवी प्लाज्मोडियम से फैलने वाला रोग होता है। इसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है। जब संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो संक्रमण फैलने से उसे मलेरिया हो जाता है। लापरवाही या सही इलाज न होने पर मलेरिया काफी खतरनाक साबित हो सकता है, और इसमें इंसान की जान भी जा सकती है। इसलिए बेहतर है कि इलाज से पहले इसके बचने के उपाय जान लें।
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पहचानें मलेरिया की दस्तगक
यदि कंपकंपी के साथ तेज बुखार आये तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर रक्त जांच कराएं और उपचार लें। घरेलू उपचार के तौर पर रोजाना तुलसी की पत्तियों को चबाकर खाने से भी मलेरिया से बचाव किया जा सकता है। मलेरिया में हल्का भोजन करना ही बेहतर रहता है।
पानी पीते रहें
गर्मियों में होने वाली कई बीमारियों का हमला इसलिए तेजी से बढ़ जाता है कि क्योंकि हमारा शरीर हाइड्रेट नहीं होता। मलेरिया से बचने का भी प्रारंभिक उपाय यह है कि खुद को हाइड्रेट रखें। इन दिनों में शरीर गर्म रहता है। शरीर के ताप को निकालना बहुत जरूरी है। इसके लिये आपको दिर भर में पर्याप्त पानी पीने के अलावा अन्य तरल पदार्थ जैसे शिकंजी, नारियल पानी, सत्तू, आम का पन्ना, छाछ आदि पीते रहना चाहिए।
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शाम के समय पार्क में न जाएं
बच्चों के लिए खुले मैदान और पार्क में खेलना जरूरी है। इससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। पर मलेरिया से बचने के लिए जरूरी है कि शाम के समय यानी जब अंधेरा शुरू होने वाला हो उस समय ऐसी जगह जहां पर कूड़ा या गंदगी पड़ी हो, वहां पर ना जाएं क्योंकि वह जगह मच्छरों के पनपने की अच्छी जगहें होती हैं। साथ ही शाम के समय भी पार्क आदि में न जाएं और घर पर ही रहें।
कपड़ों का भी रखें ध्यान
हल्के रंग के कपड़ों पर मच्छर कम पास आते हैं, जबकि गहरे रंग के कपड़ों पर वे आकर्षित होते हैं। खासतौर से काले रंग के कपड़ों पर मच्छर ज्यादा आते हैं। तो हल्के रंगे के तथा फुल आस्तीन के कपड़े पहन कर आप मलेरिया से बचे रह सकते हैं। इस मौसम में नेट की बाजू वाले कपड़े पहनने से भी बचें। यह बच्चों को पूरी तरह से कवर नहीं कर पाते।
मच्छरदानी लगाएं
अपने दरवाजे और खिड़की पर पतली जालियां लगवाएं व घर में भी मच्छरदानी के अंदर ही सोएं। इससे आप मच्छरों के प्रकोप से बच पाएंगे। चाहे दिन हो या रात, आपको मच्छरदानी के अदंर ही सोएं। छोटे बच्चों के साथ तो विशेष सावधानी रखें।
सिंट्रोनेला तेल आधारित क्रीम
फुल आस्तीन के कपड़े पहने और जहां पर कपड़े नहीं पहन सकते हैं, वहां पर सिंट्रोनेला तेल वाली क्रीम लगाएं। ये आपको मच्छरों से बचने में मदद करेगा। आप इस तेल को पानी में मिलाकर जमीन पर पोछा भी लगा सकते हैं।