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विश्व मलेरिया दिवस 2019 : हर मच्‍छर के काटने से नहीं होता मलेरिया, जानें जरूरी तथ्‍य 

World Malaria Day 2019 : 25 अप्रैल यानी आज दुनियाभर में विश्व मलेरिया दिवस मनाया जा रहा है। हालांकि मच्‍छरों का काटना किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है, पर इस बार आपको यह भी जानना चाहिए कि आखिर किस मच्‍छर के काटने से फैलता है यह खतरनाक रोग।

25 अप्रैल यानी आज वर्ल्ड मलेरिया डे है। इस दिवस का लक्ष्‍य लोगों को मलेरिया के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जागरुक करना है। साथ ही उन भ्रामक सूचनाओं को दरकिनार करना भी है जो लोगों को इस बीमारी के बारे में कन्‍फ्यूज करती हैं। मलेरिया मच्‍छर के काटने से फैलता है इस कारण लोग मच्‍छरों से इतना भय खाने लगते हैं कि इस मौसम में घर में कर्फ्यू जैसा माहौल बना देते हैं। इस तरह के तनाव से बचने के लिए हम आपको बता रहे हैं मलेरिया और उसके इंफेक्‍शन से जुड़़े कुछ जरूरी तथ्‍य।

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कैसे फैलता है मलेरिया

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मलेरिया इंफेक्शन मच्छरों द्वारा व्यक्ति को काटने और इस दौरान उसके द्वारा ह्यूमन ब्लड में छोटे-छोटे पैरासाइट्स को छोड़ने से होता है। ये पैरासाइट्स मच्छरों की सिलेवेरी ग्लैंड में रहते हैं। इसके बाद पैरासाइट्स व्यक्ति के लीवर में पहुंच जाते हैं, जहां वे बढ़ते हैं और 8 से 30 दिनों तक अपनी संख्या में इजाफा करते हैं, जिसके बाद वे ब्लड के जरिए पूरे शरीर में फैल जाते हैं और तब मलेरिया के लक्षण सामने आते हैं। पर यह जरूरी नहीं है कि हर मच्‍छर में यह पैरासाइट्स मौजूद हों या ज्‍यादा मच्‍छरों के काटने से मलेरिया फैलने का जोखिम ज्‍यादा हो। इस बारे में किए जा रहे लगा‍तार शोध यही कहते हैं।

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क्‍या कहते हैं शोध

रिसर्च के मुताबिक यह जरूरी नहीं है हर मच्‍छर के काटने से मलेरिया फैले ही। ज्‍यादा मच्‍छरों के काटने से जोखिम के बढ़ जाने की संभावना से इन्‍कार नहीं किया जा सकता पर यह जरूरी नहीं है। किसी भी व्यक्ति को मलेरिया इंफेक्शन का खतरा उसे काटने वाले मच्छरों की संख्या पर नहीं, बल्कि प्रत्येक मच्छर में मौजूद पैरासाइट्स की संख्या पर निर्भर करता है।

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आरटीएस वैक्सीन

लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं के मुताबिक, मलेरिया के लिए एकमात्र वैक्सीन आरटीएस है। पर यह भी अपना प्रभाव पूरी तरह नहीं दिखा पाती जब चूहे या इंसान को एक ऐसा मच्छर काटता है, जिसके सलाइवा में पैरासाइट्स की संख्या बहुत ज्‍यादा होती है। यह शोध इस बात का भी जवाब है कि क्यों मात्र 50 फीसदी मामलों में ही मलेरिया की वैक्सीन प्रभावी होती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि यह वैक्सीन एक निश्चित अनुपात में ही पैरासाइट्स को मार पाता है और जब पैरासाइट्स की संख्या बहुद ज्यादा होती है, तो यह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाता। ऐसे में वैक्‍सीन के बाद भी मलेरिया को काबू करना मुश्किल हो जाता है।

जरूरी है हर पहलू को जानना

मलेरिया के संदर्भ में लगातार हो रहे शोध इस बीमारी पर काबू पाने के तरीके ढूंढ रहे हैं। पर अभी तक कोई भी तरीका पूरी तरह से प्रभावी साबित नहीं हो सका है। इंपीरियल कॉलेज के एंड्र्यू ब्लागबोरो ने कहा कि स्टडी ने इस बात को दर्शाया है कि मलेरिया की सफल रोकथाम में वैज्ञानिक इसलिए असफल रहे हैं, क्योंकि उन्होंने केवल उस आवधारणा को माना कि यह इंफेक्शन ज्यादा से ज्यादा मच्छरों के काटने से होता है। ब्लागबोरो ने कहा कि शोध का निष्कर्ष बेहद महत्वपूर्ण है और मलेरिया तथा वाहकों के माध्यम से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए वैक्सीन का विकास करते समय इस निष्कर्ष को ध्यान में रखना चाहिए। यह शोध पत्रिका 'पीएलओएस' में प्रकाशित हुआ है।

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