वर्ल्‍ड ल्‍यूपस डे : महिलाओं को ज्‍यादा शिकार बनाती है यह बीमारी, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ल्यूपस होने का जोखिम नौ गुना ज्यादा होता है, अगर समय पर इसकी पहचान न की जाए तो ये कई ऑर्गन्स डैमेज कर सकता है।

WrittenBy

Written By: Yogita Yadav | Updated : May 9, 2019 2:37 PM IST

ल्यूपस (Lupus erythematosus) प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या से सम्बन्धित कई रोगों का सामूहिक नाम है। इस बीमारी के लक्षण के रूप में चेहरे पर तितली जैसे लाल रंग के रेशेज हो जाते हैं, जबकि इसके प्रभाव बहुत ही कष्‍टकर हैं। ल्‍यूपस पर जागरुकता बढ़ाने के लिए 10 मई को विश्‍व ल्‍यूपस दिवस मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस रोग के बारे में विस्‍तार से।

यह भी पढ़ें - जानिए क्‍या है दुर्लभ बीमारी ‘ड्यूशेन मस्कुलर डिस्‍ट्रॉफी’

समझें ल्‍यूपस को

ल्यूपस एक आटो-इम्युन रोग (autoimmune disease) है जिसके होने पर शरीर की रक्षा प्रणाली अति-सक्रिय हो जाती है और सामान्य, स्वस्थ ऊतकों पर हमला करती है। जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम कर रही होती है तब वह विषाणु, बैक्टिरिया एवं अन्य रोगाणुओं से लड़ने के लिये एंटीबॉडी बनाती है। ल्यूपस रोग की स्थिति में ये एण्टीबाडी रोगाणुओं एवं स्वस्थ ऊतकों में विभेद नहीं कर पाते और स्वस्थ ऊतकों पर भी हमला करना शुरू कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप जलन, सूजन, जोड़ों, त्वचा, हृदय, रक्त, फेफड़ों आदि को नुकसान आदि लक्षण प्रकट होते है।

यह भी पढ़ें – विश्‍व थैलेसिमिया दिवस 2019 : जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

चार मुख्य प्रकार के ल्यूपस हैं:

  • systemic lupus erythematosus,
  • discoid lupus erythematosus,
  • drug-induced lupus erythematosus
  • neonatal lupus erythematosus

ये ल्‍यूपस है सबसे ज्‍यादा गंभीर

इनमें से प्रणालीगत रक्तिम ल्यूपस (SLE) सबसे अधिक होता है और सर्वाधिक गंभीर भी है। यह भारत के हर एक लाख लोगों में से 8-11 मरीजों को प्रभावित करती है। ल्यूपस का कोई ऐसा इलाज उपलब्ध नहीं है जो इसे जड़ से खत्म कर दे, इलाज के जरिए इसके लक्षणों को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें – विश्व हीमोफिलिया दिवस 2019:  बेबी प्‍लान कर रहे हैं, तो हीमोफि‍लिया के बारे में जानना भी है जरूरी

ल्यूपपस के लक्षण 

ल्यूपपस के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्न होते हैं। कुछ लोगों कें एक या दो लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि कुछ में इसके लक्षण अधिक कष्ट कर हो जाते हैं। इससे पीडि़त व्यक्ति को

  • थकान
  • बुखार
  • ज्वाइंट पेन, अकड़न और सूजन
  • चेहरे पर तितली के आकार का रैशेज जो नाक और गाल के ऊपरी हिस्से  पर दिखाई देते हैं।
  • त्वचा के घाव जो सूर्य के संपर्क में आने पर दिखाई देते हैं। इसे प्रकाश संवेदनशीलता भी कह सकते हैं।
  • फिंगर्स और पैर की उंगलियों जो ठंड या स्ट्रेदस के दौरान सफेद या नीले पड़ने लगते हैं।
  • सांस लेने में मुश्किल
  • छाती में दर्द
  • सूखी आंखें
  • सिरदर्द, भ्रम और स्मृति हानि आदि हो सकते हैं।

ये हो सकती हैं जटिलताएं

गर्भावस्था  में जटिलताएं : जिन महिलाओं में ल्यूसस की समस्या़ होती है उनमें गर्भपात होने का खतरा ज्याादा होता है। ल्यूंपस प्रेग्नेंसी के दौरान उच्च रक्तचाप का कारण बनता है। इन जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए, डॉक्टर अक्सर गर्भावस्था में देरी की सलाह देते हैं जब तक कि आपकी बीमारी कम से कम छह महीने तक नियंत्रण में न हो।

किडनी : ल्यूपस किडनी डैमेज का कारण बन सकता है। इसके अलावा किडनी फेल्योर होने का सबसे बड़े कारणों में से ल्यूपस प्रमुख है।

रक्त समस्या‍एं : ल्यूपस रक्त की समस्याओं का कारण बन सकता है, जिसमें एनीमिया और रक्तस्राव या खून के थक्के का खतरा बढ़ सकता है। यह रक्त वाहिकाओं (वास्कुलाइटिस) की सूजन का कारण बन सकता है।

फेफड़े : ल्यूपस होने से छाती के गुहा स्तर (pleurisy) की सूजन विकसित करने की संभावना बढ़ जाती है, जो सांस लेने में दर्द देता है। फेफड़ों और निमोनिया में रक्तस्राव भी संभव है।

ह्रदय : ल्यूपस आपके दिल की मांसपेशियों, आपके धमनियों या झिल्ली (पेरीकार्डिटिस) की सूजन का कारण बन सकता है। कार्डियोवैस्कुलर बीमारी और दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ता है।

इस तरह करें ल्यूपस से बचाव

असल में यह एक बीमारी नहीं, बल्कि कई बीमारियों का समूह है। इसमें एक साथ शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसमें संतुलित आहार पर विशेष ध्याजन दिया जाए।

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर सब्जियों और फलों का सेवन करें।

अलसी, कैनोला ऑइल, ऑलिव ऑइल, मछली, अलसी, मूंगफली आदि का सेवन करना फायदेमंद होता है।

बेक्ड और तले हुए भोजन से दूरी बनाएं। साथ ही क्रीम से भरपूर खाद्य और हाई फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट का भी कम सेवन करें।

अल्फा स्प्राऊट्स (एक तरह की फली के बीज), टैबलेट्स और बीजों से बचकर रहें। ये लक्षणों को तीव्र करने का कारण बन सकते हैं।

हड्डियों और मसल्स को मजबूत बनाने के लिए लो फैट मिल्क, दही या योगर्ट, चीज, पालक और ब्रॉकली जैसी चीजें खाएं।

बैंगन, आलू और टमाटर जैसी चीजें इस बीमारी में कुछ लोगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इनके सेवन से पहले अपने डॉक्टरर से सलाह अवश्य लें।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source