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सुबह-शाम का नाश्ता हो, स्कूल स्नैक्स या दोस्तों के साथ पार्टी, ज्यादातर बच्चे जंक फूड की ही जिद करते हैं। जबकि यह आदत अब इतनी ज्यादा पुरानी हो गई है कि अब पेरेंट्स भी बच्चों को जंक फूड खाने के लिए प्रेरित करते हैं। वे उन्हें बढि़या प्रदर्शन या मस्ती टाइम के लिए जंक फूड खिला रहे हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इस तरह आप अपने बच्चे ही नहीं उनकी अगली पीढि़यों को भी बर्बाद कर रहे हैं। जंक फूड खाने वाले बच्चे मोटे तो होते ही हैं, इनका लिवर और पैंक्रियाज भी बहुत दिनों तक स्वस्थ नहीं रह पाते। असल में यह स्वाद नहीं आपकी और आपके बच्चों की सेहत का दुश्मन है। आज विश्व लीवर डे (World Liver Day)के मौके पर हम आपको लिवर से जुड़ी जरूरी बातें बताने के साथ ही लिवर और जंक फूड में कनेक्शन बता रहे हैं।
विश्व लीवर दिवस (World Liver Day)
लाइफस्टाइल की बढ़ती समस्यारओं में लिवर की समस्या गंभीरतम समस्याओं में से एक है। लिवर हमारे शरीर का इतना महत्वपूर्ण अंग है कि हम जो भी खाते हैं, वह इसी से होकर गुजरता है। बल्कि यह शरीर की डिटॉक्सीफाई करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया का भी हिस्सा है। पर अब जिस लाइफस्टाइल में हम सब रह रहे हैं वहां सेहत के लिए समय कम होता जा रहा है। हम कुछ भी और कभी भी खाते हैं। जिसका सबसे ज्यादा नुकसान लिवर को उठाना पड़ता है। लिवर की सेहत को ध्यान में रखते हुए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे अर्थात विश्व यकृत दिवस के नाम किया गया है। इस दिन हमें लिवर और उससे जुड़े मुद्दों पर ज्यादा से ज्यादा बात करनी है, ताकि इसकी सेहत के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाई जा सके।
लिवर का दुश्मन है जंक फूड
समग्र संस्कृति के बीच में खानपान का अपना खास महत्व होता है। इस लिहाज से अगर हम मौजूदा संस्कृति को कोई नाम दें तो इसे जंक फूड संस्कृति नाम दिया जा सकता है। 1991 में पहली बार भारत में जंक फूड संस्कृति की शुरूआत हुई और तब से हम इसके इतने ज्यादा आदी हो गई कि हम यह भूल ही गए कि हमें बच्चों को इसकी ओर आकर्षित होने के लिए मना करना है। इसके विपरीत बच्चों के अच्छे प्रदर्शन या अच्छे मूड के लिए हम उन्हें जंक फूड खिलाने अलग-अलग जगहों पर ले जा रहे हैं। हमारे घर के डायनिंग टेबल तक अब जंक फूड पहुंच चुके हैं। यह हमें ज्यादा सुविधाजनक भी लग रहे हैं। पर लिवर के लिए ये साइलेंट किलर का काम कर रहे हैं।
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परोस रहे हैं बीमारियां
जंक फूड से न केवल मोटापा बढ़ता है, बल्कि इसमें यूज होने वाले ऑयल, कोला, चिप्स का सीधा असर लिवर और पैनक्रियाज पर पड़ता है। इतना ज्यादा कि पाचन तंत्र के बाधित होने से शुगर लेवल, ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल लेवल में इजाफा होने लगता है। इन सब कारणों से 15-16 साल के बच्चों में डायबिटीज की बीमारी शुरू हो जाती है और 35 साल तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें हार्ट की बीमारी हो जाती है। इसलिए न केवल घर बल्कि स्कूल के अंदर और बाहर भी जंक फूड की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए।
पीढि़यों तक नुकसान पहुंचाता है जंक फूड
हाल ही में हुए एक शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य् सामने आया है कि जंक फूड केवल आपकी सेहत ही नहीं बल्कि आपके बच्चोंए के बच्चोंर की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। जंक फूड खाने से बीमार हुए अंग पीढि़यों तक अपनी खराब सेहत लिए रहते हैं। वैज्ञानिकों ने गर्भावस्था में जंक फूड खाने वाली महिलाओं पर शोध किया। जिसमें उन्होंंने पाया कि इसका असर केवल उनके बच्चों पर ही नहीं बल्कि बच्चोंड के बच्चोंम पर भी पड़ता है।
इस संस्कृति को खारिज करने की है जरूरत
आहार और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जितनी जल्दी हो सके अपने आहार से जंक फूड को बाहर करने की जरूरत है। इसके लिए पूरे समाज को सामुहिक प्रयास करने होंगे। प्रशासन की ओर से जंक फूड पर बैन लगाया जाना एक बेहतर प्रयास हो सकता है। स्कूल में जंक फूड बैन हो और स्कूल के बाहर 500 मीटर तक ऐसी कोई दुकान नहीं हो। साथ ही जंक फूड के नुकसान को लेकर स्कूलों के अंदर पोस्टर लगाए जाएं ताकि इस बारे में सभी को जानकारी मिले और वे घर पर भी जंक फूड यूज नहीं करें।