वर्ल्‍ड लिवर डे 2019 : मोटापा भी बन रहा है लिवर के लिए चुनौती, हो जाएं सावधान

अगर आपको लगता है कि सिर्फ शराब पीने से ही आपका लिवर बीमार होता है, तो आपको अपने ज्ञान में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। कुछ भी और कभी भी खा लेने की सजा असल में आपके लिवर को भुगतनी पड़ती है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : April 17, 2019 7:31 PM IST

नए लाइफस्‍टाइल के कारण होने वाली समस्‍याओं में सबसे घातक समस्‍याओं में से एक है मोटापा। यही मोटापा अब लिवर के लिए भी चुनौती बन गया है।  फैटी लिवर डिसीज यानी यकृत पर चर्बी जमने की यह बीमारी इतनी धीमी गति से बढ़ती है कि इसके संकेत भी दिखाई नहीं देते। पर जब तक इसके बारे में मालूम चलता है यह घातक स्‍तर तक पहुंच चुकी होती है। अगर आप भी इससे बचना चाहते हैं तो समय रहते हैं जान लें इसके बारे में सब कुछ।

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समझें ये संकेत

अगर आपका पेट आपकी छाती से ज्यादा बाहर आने लगे, अगर आपको झुकने और अपने जूते का फीता बांधने में कठिनाई होने लगे, अगर आप अपनी शर्ट ठीक से पैंट के अंदर न कर पा रहे हों तो यह सीधा संकेत है कि आपके शरीर में फैट की मात्रा बढ़ रही है। हम भारतीयों के लिए यह तो कोई नई बात नहीं है, लेकिन इन दिनों किए जा रहे तमाम नए अध्ययनों से पता चलता है कि किसी व्यक्ति के दीर्घकालीन स्वास्थ्य के बारे में कोई अनुमान लगाना या भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। भारतीय शहरों में फैटी लीवर की बीमारी की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। फैटी लीवर के कारण दिल का दौरा पडऩे का खतरा हो सकता है। इसके अलावा इससे कैंसर भी हो सकता है।

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खतरनाक हैं आंकड़ें

  • भारत में लीवर की गंभीर बीमारी में फैटी लीवर तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
  • पश्चिमी देशों के समान वजन वाले लोगों के मुकाबले भारतीयों में फैट की मात्रा दोगुनी होती है।
  • 32 फीसदी भारतीयों में कुछ हद तक फैटी लीवर की बीमारी होने का अनुमान है।
  • 70 से 90 फीसदी मोटापे और मधुमेह के शिकार लोग फैटी लीवर की बीमारी से ग्रस्त हैं।
  • 54 फीसदी लोग, जो न शरीर और न ही पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं, फैटी लीवर के रोगी हैं।
  • 24 फीसदी भारतीय पुरुष फैटी लीवर से प्रभावित हैं, जबकि ऐसी महिलाओं की तादाद 13 फीसदी है।
  • 20 फीसदी फैटी लीवर के रोगियों की बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
  • लीवर पर फैट के कारण शहरी भारतीयों को दिल का दौरा पडऩे से मौत हो जाने या फिर दिल का दौरा पडऩे का दोहरा खतरा होता है।

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नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज़ (एनएएफएलडी)

अब वसायुक्त लीवर का खतरा सिर्फ उन लोगों तक ही सीमित नहीं रह गया है, जो बहुत ज्यादा शराब पीते हैं। नकारात्मक जीवन शैली से बायो-कैमिकल रिएक्शन पैदा हो रहा है। जो फैटी लीवर की बीमारी का कारण बन रही है। अगर हम सचेत नहीं हुए तो यह जल्दी ही भारत में एक महामारी का रूप ले सकती है, क्योंकि इसका अब तक कोई इलाज नहीं है।

रखें लिवर का ख्‍याल

लीवर न तो धड़कता है और न ही इसकी नब्ज चलती है, न यह आवाज करता है और न सिकुड़ता है।  हृदय के विपरीत यह दबाव में भी काम कर सकता है। लीवर जितने जटिल काम करता है, वह सब अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह अपने ऊपर पड़ रहे दबाव का संकेत भी नहीं देता है, जब तक उसके साथ बहुत गंभीर गड़बड़ न हो रही हो। इसलिए जरूरी है कि लिवर को समझें और उसका ख्याल रखें।

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