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कुष्ठ रोग दुनिया का सबसे पुराना जीवाणु संक्रमण वाला रोग है. कुष्ठ रोग को कुछ लोग कलंकित बीमारी के तौर पर भी देखते हैं. कुष्ठ रोग शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है. शरीर की स्किन से लेकर हाथ, पैर और चेहरे की बनावट तक में असर होता है. दुनियाभर में कुष्ठ रोग के मामले सबसे ज्यादा भारत में होते हैं. भारत में कुष्ठ रोग को लेकर कई तरह की गलतफहमी और मिथक भी हैं. कुष्ठ रोग को लेकर कुछ गलत धारणाएं हम यहां पर बता रहे हैं. कुष्ठ रोग के मिथक और सच्चाई जानना जरूरी है.
कुष्ठ रोग दिवस 2020 पर हम यहां पर इस रोग के मिथक और सच्चाई पर बात कर रहे हैं. आप भी इस जानकारी को अपने लोगों के साथ शेयर करें.
मिथक 1- कुष्ठ रोग बहुत तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है.
सच्चाई- ऐसा नहीं कि किसी कुष्ठ रोगी के पास आप बैठे तो यह आपको हो जाए. किसी संक्रमित इंसान के साथ आप लगातार संपर्क में रहते हैं तो कुष्ठ रोग होने की संभावना है. 95 प्रतिशत लोगों में इसके संक्रमण की संभावना नहीं होती है.
मिथक 2- दूसरा सबसे बड़ा मिथक यह है कि अगर आपको कुष्ठ रोग है तो आपकी उंगलियां कटकर गिर जाएंगी.
सच्चाई- यह बिल्कुल सच नहीं है. कुष्ठ रोग की वजह से सनसनी और सुन्नता हो जाती है. कुछ लोगों में यह चोट या अन्य कारणों से देखने को मिलता है. कुष्ठ रोग की वजह से उंगलियां कटकर नहीं गिरती हैं.
मिथक 3- भारत जैसे देश में कुष्ठ रोग को लेकर कई तरह की ऐतिहासिक बातें भी हैं. इसे कोढ़ के नाम से जाना जाता है. इस रोग को भारतीय समाज में यह पाप की वजह से होने वाली बीमारी है.
सच्चाई- यह एक गलत धारणा है. ऐतिहासिक ग्रंथों में वर्णित कुष्ठ रोग का कोई वजूद नहीं है. यह उतना खतरनाक नहीं है जितना ग्रंथों में लिखा गया है. इसका इलाज संभव है.
मिथक 4- जिन लोगों को कुष्ठ रोग हो जाए उनको अलग रखना चाहिए.
सच्चाई- ऐसा नहीं होना चाहिए. कुष्ठ रोग की पहचान और समय पर इलाज की जरूरत होती है. MDT के माध्यम से कुष्ठ रोग को ठीक किया जा सकता है.
मिथक 5- कुष्ठ रोगी के बगल में बैठने से कुष्ठ रोग हो सकता है.
सच्चाई- ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह अत्यधिक संक्रामक बीमारी नहीं है.