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World Kidney Day 2026: महिलाओं में बार-बार UTI और थकान हो सकती है किडनी डैमेज का संकेत, इन 9 लक्षणों पर जरूर दें ध्यान

डॉक्टर बताते हैं कि किडनी की बीमारी की दर महिलाओं में लगभग 16% तक देखी गई है, जबकि पुरुषों में यह करीब 8 से 9% तक रहती है। वर्ल्ड किडनी डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं महिलाओं में किडनी की बीमारी के लक्षण क्या हैं?

World Kidney Day 2026: महिलाओं में बार-बार UTI और थकान हो सकती है किडनी डैमेज का संकेत, इन 9 लक्षणों पर जरूर दें ध्यान
VerifiedMedically Reviewed By: Dr Jayant Kumar Hota

Written by Ashu Kumar Das |Published : March 12, 2026 4:10 PM IST

World Kidney day 2026 Women and Kidney Health Risks That Often Go Undetected : खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण भारत में किडनी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट - नेफ्रोलॉजी डॉ. जयंत कुमार (Dr Jayant Kumar Hota, Senior Consultant, Nephrology, Indraprastha Apollo Hospitals) का कहना है कि भारत में पुरुषों की तुलना में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का खतरा ज्यादा पाया जाता है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट का हवाला हुए देते डॉक्टर बताते हैं कि किडनी की बीमारी की दर महिलाओं में लगभग 16% तक देखी गई है, जबकि पुरुषों में यह करीब 8 से 9% तक रहती है।

किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं और लंबे समय तक पता ही नहीं चल पाता है। डॉ. जयंत कुमार का कहना है कि भारत में आज भी ज्यादातर महिलाएं शारीरिक थकान को पूरी तरह से इग्नोर कर देती हैं। जिससे किडनी की बीमारी शुरुआती स्टेज से गंभीर तक कब पहुंच जाती है, पता ही नहीं चलता है।

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महिलाओं में किन कारणों से बढ़ती है किडनी की बीमारी

वर्ल्ड किडनी डे के खास मौके पर द हेल्थ साइट के साथ बात करते हुए डॉ. जयंत कुमार बताते हैं कि महिलाओं में कुछ ऐसे कारण होते हैं जो किडनी की बीमारी के खतरे को बढ़ा देते हैं।

  1. बार-बार होने वाला यूरिन इन्फेक्शन (UTI)- महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन ज्यादा आम होता है। अगर इसका समय पर इलाज न हो तो यह किडनी तक पहुंचकर वहां दाग (scarring) बना सकता है। यह दाग धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को कम कर देता है और किडनी की बीमारी गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है।
  2. ऑटोइम्यून बीमारियां- भारत में महिलाओं में लूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी भी काफी देखी जाती है। इस तरह की बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम खुद किडनी के फिल्टर पर हमला करने लगता है और विषाक्त पदार्थों को स्टोर करने लगता है।
  3. हार्मोनल बदलाव- 40 साल की उम्र के बाद मेनोपॉज की समस्या शुरू होती है, तो एस्ट्रोजन हार्मोन बनना कम या ज्यादा हो जाता है। इससे किडनी से जुड़ी बीमारी तेजी से होती है।
  4. गर्भावस्था- डॉक्टर बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्या प्री-एक्लेम्प्सिया (Preeclampsia) उन महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है जिनमें पहले से किडनी की समस्या रही हो। ऐसी महिलाओं में किडनी की बीमारी उम्र के साथ तेजी से बढ़ती है।

महिलाओं में किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण

डॉक्टर बताते हैं कि महिलाओं में किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि पहले स्तर पर इसे पीरियड्स की थकान, हार्मोनल बदलाव, बच्चे के जन्म के बाद हुए शारीरिक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन यह किडनी की बीमारी का पहला संकेत होते हैं।

  1. बिना किसी कारण लगातार शारीरिक थकान और कमजोरी
  2. मांसपेशियों में ऐंठन
  3. स्किन का जरूरत से ज्यादा ड्राई होना और खुजली
  4. पैरों, टखनों या आंखों के आसपास सूजन
  5. बार-बार या पेशाब करते समय झाग आना
  6. सिरदर्द और मतली
  7. पैरों में अक्सर दर्द रहना
  8. मानसिक धुंधलापन (brain fog)
  9. मानसिक थकान महसूस होना

डॉक्टर कहना है कि इनमें से कई लक्षण मेनोपॉज या उम्र बढ़ने से मिलते-जुलते होते हैं। यही कारण है कि महिलाओं में किडनी की बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है।

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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।