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World Kidney day 2026 Women and Kidney Health Risks That Often Go Undetected : खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण भारत में किडनी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट - नेफ्रोलॉजी डॉ. जयंत कुमार (Dr Jayant Kumar Hota, Senior Consultant, Nephrology, Indraprastha Apollo Hospitals) का कहना है कि भारत में पुरुषों की तुलना में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का खतरा ज्यादा पाया जाता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट का हवाला हुए देते डॉक्टर बताते हैं कि किडनी की बीमारी की दर महिलाओं में लगभग 16% तक देखी गई है, जबकि पुरुषों में यह करीब 8 से 9% तक रहती है।
किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं और लंबे समय तक पता ही नहीं चल पाता है। डॉ. जयंत कुमार का कहना है कि भारत में आज भी ज्यादातर महिलाएं शारीरिक थकान को पूरी तरह से इग्नोर कर देती हैं। जिससे किडनी की बीमारी शुरुआती स्टेज से गंभीर तक कब पहुंच जाती है, पता ही नहीं चलता है।
वर्ल्ड किडनी डे के खास मौके पर द हेल्थ साइट के साथ बात करते हुए डॉ. जयंत कुमार बताते हैं कि महिलाओं में कुछ ऐसे कारण होते हैं जो किडनी की बीमारी के खतरे को बढ़ा देते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि महिलाओं में किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि पहले स्तर पर इसे पीरियड्स की थकान, हार्मोनल बदलाव, बच्चे के जन्म के बाद हुए शारीरिक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन यह किडनी की बीमारी का पहला संकेत होते हैं।
डॉक्टर कहना है कि इनमें से कई लक्षण मेनोपॉज या उम्र बढ़ने से मिलते-जुलते होते हैं। यही कारण है कि महिलाओं में किडनी की बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।