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गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ा देती है आयोडीन की कमी, शरीर में ये 5 बदलाव बताते हैं आयोडीन की कमी
World Iodine Deficiency Day 2020: आयोडीन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में नमक का ख्याल आने लगता है और मौजूदा वक्त में आयोडीन एक ऐसी चीज है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते होंगे। आयोडीन एक ऐसा पोषक तत्व है, जो थायराइड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है। इतना ही नहीं आयोडीन शारीरिक विकास और मेटाबॉलिज्म को भी कंट्रोल रखने में मदद करता है। इसके पीछे छिपा हुआ कारण ये भी है कि हमारा शरीर खुद आयोडीन का निर्माण नहीं कर पाता है इसलिए हमें अन्य पदार्थों से इसे प्राप्त करने की जरूरत होती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार एक साधारण वयस्क को रोजाना 150 माइक्रोग्राम आयोडनी की आवश्यकता होती है। वहीं गर्भावस्था के दौरान, गर्भवती महिलाओं को रोजाना 220 माइक्रोग्राम आयोडीन लेने की सलाह दी जाती है। वे महिलाएं, जो स्तनपान कराती है, उन्हें सबसे ज्यादा 290 माइक्रोग्राम आयोडीन के सेवन की सलाह दी जाती है। यूं तो आयोडीन युक्त नमक आपके शरीर में जरूरी आपूर्ति करता है लेकिन कई अन्य स्रोत भी हैं, जो आयोडीन की कमी को दूर करने का काम करते हैं। आप सब्जियों, अंडे, पनीर, दूर और मछली से भी आयोडीन प्राप्त कर सकते हैं।
डॉक्टर अंजलि शर्मा, नैचुरोपैथ एंड योगा एक्सपर्ट, शुद्धि नैचुरोपैथ क्लिनिक के मुताबिक, स्वास्थ्य की दृष्टि से व्यक्ति में आयोडीन की बेहद आवश्यकता है। जहां एक तरफ इसकी शारीरिक और मानसिक विकास में भूमिका होती है वहीँ इनकी कमी होने पर घेंगा, भेंगापन, हाइपोथायराइड, कमज़ोरी आदि जैसे रोग हो सकते हैं, और यदि गर्भवती को आयोडीन की कमी हो तो गर्भपात हो सकता है, बच्चे का मानसिक विकास अवरुद्ध हो सकता है और गंभीर स्थितियों में मृत भी पैदा हो सकता है। आयोडीन की कमी के उपचार होते हैं लेकिन बेहतर खुराक से इसकी कमी को दूर किया जा सकता है। आयोडीन युक्त नमक, मुनक्का, सी फ़ूड, छिलके समेत आयोडीन युक्त आलू, बीन्स, बैरीज़, केले, दूध, दही आदि के सेवन से आयोडीन की कमी पूरी करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में लगभग 30 प्रतिशत लोगों को आयोडीन की कमी का खतरा है लेकिन शरीर में इसकी कमी का अंदेशा कैसे लगाया जाए इसके बारे में जानना जरूरी है। इस लेख में हम आपको आयोडीन की कमी के कुछ संकेतों के बारे में बता रहे हैं, जिनके जरिए आप शरीर में आयोडीन की कमी का पता लगा सकते हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे 5 संकेतों के बारे में जो आपको बताएंगे कि शरीर में हो चुकी है आयोडीन की कमी।
आयोडीन एक जरूरी माइक्रोन्यूट्रीएंट है, जिसकी हमारे शरीर को बेहद जरूरत होती है और ये हमारे शरीर के हर टिश्यू में पाया जाता है। आयोडीन थायराइड हार्मोन- थायरोक्सिन और ट्राईआयोडायरोनिन के बनाने में योगदान देता है। थायराइड की एक स्थिति हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड अंडरएक्टिव होता है और हमारा शरीर अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करने के लिए थायराइड हार्मोन का उपयोग नहीं कर पाता है, जिस कारण आपका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। थकान, कब्ज, वजन बढ़ना हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में शामिल हैं।
ड्राई स्किन और मांसपेशियों में कमजोरी भी हाइपोथायरायडिज्म के अतिरिक्त संकेतों में शामिल है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को हाइपोथायरायडिज्म का खतरा आठ गुना अधिक होता है, जिसके कारण महिलाएं इस रोग के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। महिलाएं किसी भी उम्र में हाइपोथायरायडिज्म का शिकार हो सकती हैं।
गर्दन में गांठ या फिर घेंघा का निर्माण आयोडीन की कमी का एक स्पष्ट संकेत है। ऐसा हमारी गर्दन के सामने की ओर दिखाई देता है। आयोडीन की कमी का पहला संकेत घेंघा ही है। घेंघा के कारण आपको सांस लेने और निगलने में बहुत ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जब आप लेटे हुए होते हैं तो आपको दम घुटने जैसा महसूस होता है।
शरीर में आयोडीन के लेवल की जांच के लिए आपका डॉक्टर आपको पेशाब टेस्ट की सलाह दे सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण है आयोडीन का पेशाब के माध्यम से शरीर का बाहर निकलना। इस टेस्ट के माध्यम से आप ये पता लगा सकते हैं कि क्या वाकई में आपके शरीर में आयोडीन की कमी है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को थायराइड हार्मोन की जरूरत होती है, जिसके लिए पर्याप्त आयोडीन के सेवन की आवश्यकता होती है। ये हार्मोन मायलिन का निर्माण करता है, जो तंत्रिका कोशिकाओं की रक्षा करता है। जिन महिलाओं में आयोडीन की कमी होती है उन्हें गर्भपात और स्टिलबर्थ का खतरा रहता है।